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पोर्टल पर लापरवाही भारी पड़ी धान उपार्जन केंद्रों की ग्रेडिंग गिरी, 4 अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार

कलयुग की कलम से राकेश यादव

पोर्टल पर लापरवाही भारी पड़ी धान उपार्जन केंद्रों की ग्रेडिंग गिरी, 4 अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार

कलयुग की कलम कटनी -खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत धान उपार्जन व्यवस्था को पारदर्शी और सुचारु बनाए रखने के प्रशासनिक प्रयासों के बीच बड़ी कार्रवाई सामने आई है। धान उपार्जन केंद्रों पर आवश्यक सुविधाओं से जुड़ी जानकारी भारत सरकार के पोर्टल पर अपलोड करने में गंभीर लापरवाही बरतने पर कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के निर्देश पर दो उपार्जन केंद्रों के खरीदी प्रभारी और कंप्यूटर ऑपरेटर सहित कुल चार कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। सभी से तीन दिवस के भीतर स्पष्टीकरण तलब किया गया है।

जिला आपूर्ति अधिकारी श्री सज्जन सिंह परिहार ने बताया कि उपार्जन केंद्र कछारगांव (केंद्र कोड 59342194) तथा खमतरा (केंद्र कोड 59342178) पर केंद्र स्तर पर उपलब्ध 16 अनिवार्य सुविधाओं की जानकारी उपार्जन केंद्र प्रभारी के लॉगिन से भारत सरकार के पीसीएसएपी पोर्टल पर दर्ज करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद दोनों केंद्रों पर अपलोड की गई जानकारी और फोटोग्राफ्स गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए, जिसके कारण संबंधित केंद्रों की ग्रेडिंग ‘लेवल-1’ दर्शित हो रही है।

इन पर जारी हुआ नोटिस

उपार्जन केंद्र कछारगांव के खरीदी प्रभारी श्री रघुवीर सिंह बागरी एवं कंप्यूटर ऑपरेटर श्री अशोक मेहरा तथा उपार्जन केंद्र खमतरा के खरीदी प्रभारी श्री दीनदयाल त्रिपाठी एवं कंप्यूटर ऑपरेटर श्री ललित प्यास़ी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

जिला आपूर्ति अधिकारी ने स्पष्ट किया कि इन अधिकारियों-कर्मचारियों को पूर्व में भी पोर्टल पर फोटोग्राफ्स एवं जानकारी अपलोड करने का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। साथ ही समय-समय पर आयोजित बैठकों में भी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। इसके बावजूद निर्देशों की अनदेखी करते हुए सही और मानक अनुरूप जानकारी अपलोड नहीं की गई, जो कि मध्य प्रदेश शासन, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा जारी उपार्जन नीति के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है।

नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में संबंधितों को आगामी धान खरीदी कार्य से ब्लैकलिस्ट किए जाने की कार्रवाई की जा सकती है। तीन दिवस की निर्धारित अवधि में जवाब प्रस्तुत नहीं करने पर यह माना जाएगा कि लगाए गए आरोप स्वीकार हैं, जिसके बाद एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी।

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