होली के रंग में सजी आत्मनिर्भरता की मिसाल कटनी में तीन दिवसीय आजीविका उत्पाद मेला बना आकर्षण का केंद्र
कलयुग की कलम से राकेश यादव

होली के रंग में सजी आत्मनिर्भरता की मिसाल कटनी में तीन दिवसीय आजीविका उत्पाद मेला बना आकर्षण का केंद्र
कलयुग की कलम कटनी -होली के पर्व को आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण से जोड़ते हुए जिले में ‘होली के रंग, आजीविका के संग’ थीम पर तीन दिवसीय आजीविका उत्पाद मेले का सफल आयोजन किया गया। कटनी में आयोजित इस मेले ने स्थानीय उत्पादों को मंच देने के साथ ग्रामीण महिलाओं की प्रतिभा और उद्यमशीलता को नई पहचान दी।
जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में आयोजित इस मेले में कलेक्टर आशीष तिवारी एवं जिला पंचायत सीईओ हरसिमरनप्रीत कौर के निर्देशन तथा जिला परियोजना प्रबंधक एनआरएलएम शबाना बेगम के मार्गदर्शन में मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, जनपद पंचायत कटनी द्वारा जिले के विभिन्न विकासखंडों में ऐसे मेलों का आयोजन किया गया।
तीन दिन तक रहा उत्साह
जनपद पंचायत भवन, पुरानी कचहरी परिसर के सामने 27 फरवरी से 1 मार्च तक चले इस मेले का शुभारंभ जनपद उपाध्यक्ष जगदीश उर्मलिया, जनपद सदस्य प्रदीप सिंह एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत द्वारा किया गया। कार्यक्रम में संकुल संगठन पदाधिकारी एवं स्वयं सहायता समूह की सदस्याओं की सक्रिय सहभागिता रही।
स्थानीय उत्पादों की रही धूम
मेले में विकासखंड कटनी के समूहों द्वारा तैयार उत्पादों की प्रदर्शनी एवं विक्रय किया गया। प्रमुख आकर्षण रहे —हर्बल गुलाल और पूजन सामग्री खोया व मेवों से बनी पारंपरिक गुझिया नमकीन, पापड़, चिप्स हर्बल हैंडवॉश, क्लीन वॉश, शैंपू, टॉयलेट व बाथरूम क्लीनर गौकाष्ठ, गोबर से बने उत्पाद एवं जैविक सामग्री इन उत्पादों ने न केवल स्थानीय लोगों को आकर्षित किया, बल्कि स्वदेशी और पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों की ओर भी जागरूक किया।
महिलाओं की आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण, क्षमता विकास और स्वरोजगार से जोड़ने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। यह मेला ग्रामीण महिलाओं को बाजार उपलब्ध कराने और उनकी आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
आयोजन में रहा सामूहिक सहयोग
कार्यक्रम के सफल आयोजन में जिला नोडल सुश्री सीमा, विकासखंड प्रबंधक धर्मेंद्र गुप्ता, सहायक विकासखंड सरिता कुशवाह, शकुंतला नंदा, रामचंद्र राजपूत, राजेश खरे, मनीष दहायत, धर्मेंद्र सोनी सहित समस्त सीआरपी एवं समूह सदस्यों का सराहनीय योगदान रहा यह मेला केवल खरीद-फरोख्त का मंच नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत की सशक्त तस्वीर बनकर उभरा।



