जबलपुर- निजी स्कूल संचालकों, बुक सेलर्स और निजी प्रकाशकों के नेक्सस के जाल में स्कूली छात्रों के अभिभावक फंसे हुए हैं। जिन्हें एनसीईआरटी की किताबों की तुलना में तीन से चार गुना महंगी किताबें खरीदनी पड़ रही हैं। यह खुलासा एसडीएम की जांच रिपोर्ट में हुआ है। जिन्हें जांच में दुकानदारों के ठिकानों में एनसीईआरटी की किताबें नहीं मिलीं। कुछ दुकानदारों का कहना था कि स्कूल संचालकों के दबाव में यह किताबें उन्होंने मंगाई थी।
एक दिन पहले पांच एसडीएम और तहसीलदारों ने शहर की पांच बड़ी किताब दुकानों में छापे की कार्रवाई की थी। जिनके ठिकानों से 21 हजार 600 किताबें संदिग्ध मिली थीं। जिनमें फर्जी आइएसबीएन नम्बर दर्ज मिले थे। अब इन्हीं एसडीएम की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि यह नेक्सस किस तरह अभिभावकों को लूट रहा है। उदाहरण के लिए पहली कक्षा की गणित की किताब 299 रुपए की है तो वहीं एनसीईआरटी उसे महज 65 से 70 रुपए में बेचता है। ऐसा ही अंतर दूसरी कक्षाओं की किताबों में भी है। इससे समझा जा सकता है कितनी मुनाफाखोरी की जा रही है।
सबका रिकॉर्ड पहुंचा कलेक्टर के पास – इस बीच संगम बुक डिपो, न्यू राधिका बुक पैलेस और उसकी शाखाओं के अलावा चिल्ड्रन बुक डिपो से जब्त की गई किताबों का रिकॉर्ड और रिपोर्ट एसडीएम और तहसीलदारों ने कलेक्टर दीपक सक्सेना को सौंपा है। अब उसी आधार पर कार्रवाई होगी। एसडीएम रांझी रघुवीर सिंह मरावी ने बताया कि किताबों की जांच में बड़ी गड़बड़ी मिली है। पूरा जांच प्रतिवेदन कलेक्टर को भेजा गया है।
कीमतों की पड़ताल में खुली पोल : जांच में दुकानों से किताबों की मूल्य सूची बरामद की गई। कुछ किताबों की कीमतों की पड़ताल की गई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। कक्षा पहली के लिए निजी प्रकाशकों की हिन्दी की किताब 274, अंग्रेजी 399 और गणित की किताब 299 रुपए की थी। वहीं एनसीईआरटी की इसी कक्षा की गणित की किताब 65, हिन्दी 70 और अंग्रेजी 65 से 70 रुपए की है। इसी तरह पांचवीं कक्षा की निजी प्रकाशक की गणित की किताब 570 और एनसीईआरटी की 160 की है। बड़ी बात यह कि निजी प्रकाशको की किताबें फर्जी निकली हैं।