मां वीरासन देवी ज्वारे विसर्जन में उमड़ा जनसैलाब, आस्था और चमत्कारिक परंपराओं ने किया भक्तों को भाव-विभोर,वाना छेदन, कांटों का झूला और महाआरती बने आकर्षण, हजारों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
कलयुग की कलम से राकेश यादव

मां वीरासन देवी ज्वारे विसर्जन में उमड़ा जनसैलाब, आस्था और चमत्कारिक परंपराओं ने किया भक्तों को भाव-विभोर,वाना छेदन, कांटों का झूला और महाआरती बने आकर्षण, हजारों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
कलयुग की कलम सिलौंडी – कटनी जिले के प्रसिद्ध मां वीरासन देवी मंदिर में चैत्र नवरात्रि के समापन अवसर पर ज्वारे विसर्जन के दौरान आस्था का अद्भुत सैलाब उमड़ पड़ा। न केवल कटनी, बल्कि आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और इस भव्य धार्मिक आयोजन के साक्षी बने।
ज्वारे विसर्जन के अवसर पर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। पूरे वातावरण में “जय माता दी” के जयकारों और भक्ति गीतों की गूंज सुनाई देती रही। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी मुख्य पुजारी द्वारा परंपरागत रीति से वाना छेदन कर मां वीरासन देवी की महाआरती की गई, जिसे देखने के लिए भक्तों में विशेष उत्साह रहा।
इस दौरान कांटों के झूले की अनूठी परंपरा भी निभाई गई, जिसने श्रद्धालुओं को आश्चर्य और आस्था से भर दिया। कई श्रद्धालु मां की भक्ति में इतने लीन हुए कि उन पर देवी का भाव प्रकट होता दिखाई दिया, जिसे देखने लोग दूर-दूर से पहुंचे।
नवरात्रि के प्रथम दिन से ही सेवा भारती कटनी द्वारा प्रतिदिन भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। भंडारे में श्रद्धालुओं की लगातार भीड़ बनी रही, जिससे पूरे आयोजन का स्वरूप और भी भव्य हो गया।
पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धा, भक्ति और परंपराओं का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने मां वीरासन देवी मंदिर को एक दिव्य आध्यात्मिक केंद्र में परिवर्तित कर दिया। यह आयोजन क्षेत्र की आस्था और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।



