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सफाई के नाम पर लाखों का खेल! सरपंच-सचिव की मिलीभगत के आरोप, घुघरी पंचायत में गंदगी का अंबार

कलयुग की कलम से राकेश यादव

सफाई के नाम पर लाखों का खेल! सरपंच-सचिव की मिलीभगत के आरोप, घुघरी पंचायत में गंदगी का अंबार

कलयुग की कलम उमरिया पान – जिले की ढीमरखेड़ा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत घुघरी में साफ-सफाई व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक तरफ पंचायत के रिकॉर्ड में सफाई के नाम पर लाखों रुपये खर्च दर्शाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गांव की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। गांव के विभिन्न मोहल्लों और सार्वजनिक स्थलों और मंदिरों के पास कचरे के ढेर लगे हुए हैं, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरपंच और सचिव की मिलीभगत से साफ-सफाई के नाम पर फर्जी बिल लगाकर शासकीय राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि न तो नियमित कचरा उठाव हो रहा है और न ही नालियों की सही तरीके से सफाई की जा रही है। बरसों से जमी गंदगी अब बदबू और बीमारियों का कारण बनती जा रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि कई बार पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। ऐसे में लोगों के बीच आक्रोश बढ़ता जा रहा है और वे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

सफाई व्यवस्था के क्या हैं मानक?

ग्राम पंचायत स्तर पर साफ-सफाई के लिए नियमित कचरा संग्रहण, नालियों की सफाई, सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता और कचरे के उचित निपटान की व्यवस्था अनिवार्य होती है। इसके लिए पंचायत को शासन से बजट भी उपलब्ध कराया जाता है, जिसका उपयोग पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए। साथ ही, सफाई कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति और कार्य की निगरानी भी आवश्यक है।

मौजूदा हालात को देखते हुए यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर जब लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं, तो गांव में साफ-सफाई क्यों नहीं दिख रही? अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या दोषियों पर कार्रवाई होती है या नहीं।

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