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जबलपुर शताब्दी समारोह में राष्ट्रभक्ति का विराट संदेश नेताजी का एक वाक्य भारत को झकझोर देता था : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 

कलयुग की कलम से राकेश यादव

जबलपुर शताब्दी समारोह में राष्ट्रभक्ति का विराट संदेश नेताजी का एक वाक्य भारत को झकझोर देता था : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 

कलयुग की कलम जबलपुर -केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज जबलपुर में आयोजित सिद्धि बाला बोस लाइब्रेरी एसोसिएशन के “शताब्दी वर्ष समापन समारोह” का दीप प्रज्ज्वलन कर भव्य शुभारंभ किया। यह समारोह राष्ट्रभक्ति, साहित्य और इतिहास के गौरवशाली क्षणों का साक्षी बना।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस ऐसे महान व्यक्तित्व थे जिनका मात्र एक वाक्य ही पूरे भारत को उदेलित कर देता था। उनकी प्रतिमा वीरता, साहस और शौर्य का जीवंत स्मरण कराती है। उन्होंने कहा कि नेताजी का जीवन संघर्ष, त्याग और राष्ट्रप्रेम की प्रेरणादायक मिसाल है, जो आज भी युवाओं को दिशा देता है।

डॉ. यादव ने कहा कि सिद्धि बाला बोस लाइब्रेरी और सिटी बंगाली क्लब की ख्याति इतनी व्यापक थी कि स्वयं नेताजी सुभाषचंद्र बोस यहां पधारे थे। उन्होंने कहा कि बंगाल के योगदान के बिना भारत की स्वतंत्रता की कल्पना अधूरी है। बंगाल ने स्वतंत्रता संग्राम को वैचारिक ऊर्जा, नेतृत्व और साहस प्रदान किया।

इस अवसर पर शताब्दी समारोह की स्मारिका “यात्री” का विमोचन किया गया, जिसमें संस्था के सौ वर्षों के संघर्ष, साहित्यिक योगदान और सामाजिक भूमिका को सहेजा गया है। कार्यक्रम से पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री जे.पी. नड्डा एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस की प्रतिमा का अनावरण कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही कार्यक्रम स्थल पर आयोजित प्रदर्शनी का उद्घाटन कर उसका अवलोकन किया, जिसमें स्वतंत्रता संग्राम, बंगाली समाज और संस्था के ऐतिहासिक दस्तावेजों को प्रदर्शित किया गया।

केंद्रीय मंत्री श्री नड्डा ने कहा कि पुस्तकालय और साहित्यिक संस्थाएं समाज की बौद्धिक चेतना को जीवित रखती हैं। शताब्दी का यह सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल, कैबिनेट मंत्री श्री राकेश सिंह सहित अनेक गणमान्य जनप्रतिनिधि, साहित्यकार, शिक्षाविद् एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। समारोह राष्ट्रभक्ति, संस्कृति और ज्ञान की त्रिवेणी के रूप में यादगार बन गया।

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