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जंगल में सीख, संवेदना और संस्कार का संगम: साहडार के वनांचल में “वन अनुभूति” द्वितीय चरण का भव्य कैंप, बच्चों ने प्रकृति को जाना, समझा और जिया

कलयुग की कलम से राकेश यादव

जंगल में सीख, संवेदना और संस्कार का संगम: साहडार के वनांचल में “वन अनुभूति” द्वितीय चरण का भव्य कैंप, बच्चों ने प्रकृति को जाना, समझा और जिया

कलयुग की कलम उमरिया पान ढीमरखेड़ा -सामान्य वन मंडल कटनी अंतर्गत वन परिक्षेत्र ढीमरखेड़ा के साहडार के जंगल में डीएफओ गर्वित गंगवार के निर्देशन में “वन अनुभूति” कार्यक्रम का द्वितीय चरण कैंप उत्साह, ज्ञान और प्रकृति प्रेम से सराबोर वातावरण में आयोजित किया गया। मध्यप्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड, भोपाल एवं मध्यप्रदेश शासन वन विभाग द्वारा संचालित इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्कूली विद्यार्थियों को वनों, वन्यजीवों और पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से जागरूक करना रहा।

इस महत्वपूर्ण आयोजन का संचालन ढीमरखेड़ा वन परिक्षेत्र अधिकारी रेंजर अजय मिश्रा एवं समस्त वन अमले द्वारा किया गया। विभिन्न विद्यालयों से आए बड़ी संख्या में स्कूली विद्यार्थियों ने शिविर में सहभागिता की। साहडार के घने जंगलों के बीच आयोजित इस कैंप ने बच्चों को किताबों से बाहर निकलकर प्रकृति के सान्निध्य में सीखने का अनूठा अवसर प्रदान किया।

कार्यक्रम की शुरुआत वन भ्रमण से हुई, जिसमें बच्चों को जंगल के भीतर ले जाकर पेड़-पौधों, औषधीय वनस्पतियों और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास के बारे में जानकारी दी गई। रेंजर अजय मिश्रा ने सरल और प्रभावी शब्दों में समझाया कि वन केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि जीवन का आधार हैं। उन्होंने बताया कि जंगल हमें शुद्ध ऑक्सीजन, वर्षा, जल संरक्षण और जैव विविधता प्रदान करते हैं। यदि वन सुरक्षित रहेंगे, तभी मानव जीवन सुरक्षित रहेगा।

बच्चों को यह भी बताया गया कि वनों से प्राप्त जड़ी-बूटियां और औषधीय पौधे आयुर्वेदिक चिकित्सा में कितने उपयोगी हैं। अलग-अलग औषधीय वृक्षों की पहचान कर उनके गुण, उपयोग और संरक्षण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया। साथ ही जंगल में रहने वाले वन्य प्राणियों जैसे तेंदुआ, हिरण, सियार, पक्षियों और छोटे जीव-जंतुओं की भूमिका और उनके संरक्षण के महत्व को भी समझाया गया।

कार्यक्रम के दौरान बच्चों में रचनात्मकता विकसित करने के लिए ड्राइंग एवं चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने वन, वन्यजीव, पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ प्रकृति विषय पर आकर्षक चित्र बनाए। इन कलाकृतियों में बच्चों की सोच, संवेदना और प्रकृति के प्रति प्रेम स्पष्ट झलकता दिखाई दिया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को वन अधिकारियों एवं समाजसेवियों द्वारा पुरस्कार वितरित कर सम्मानित किया गया।

शिविर में केवल शैक्षणिक गतिविधियां ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक कार्यक्रम, समूह खेल, प्रकृति आधारित प्रतियोगिताएं और सामूहिक संवाद भी आयोजित किए गए, जिससे बच्चों में टीम भावना, अनुशासन और सामाजिक समरसता का विकास हुआ। वन अधिकारियों ने बच्चों को जंगल में आग से बचाव, प्लास्टिक मुक्त वन क्षेत्र, जल संरक्षण और वृक्षारोपण जैसे विषयों पर भी जागरूक किया।

कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण रहा वन भोज। जंगल के प्राकृतिक वातावरण में बच्चों सहित उपस्थित सभी जनों को पारंपरिक और स्वादिष्ट व्यंजनों का भोज कराया गया। वन भोज में गक्कड़, भरता, दाल-चावल, पूरी, सब्जी एवं हलवा जैसे व्यंजन परोसे गए। बच्चों ने खुले जंगल में बैठकर इस अनूठे भोजन का भरपूर आनंद लिया। यह अनुभव बच्चों के लिए न केवल स्वादिष्ट रहा, बल्कि उन्हें ग्रामीण और वन संस्कृति से जोड़ने वाला भी सिद्ध हुआ। उपस्थित सभी जनों ने भी वन भोज की सराहना की।

डीएफओ गर्वित गंगवार के निर्देशन में आयोजित यह द्वितीय चरण कैंप अपने उद्देश्यों में पूरी तरह सफल रहा। उन्होंने वन अमले के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि “वन अनुभूति जैसे कार्यक्रम भविष्य की पीढ़ी को प्रकृति से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। जब बच्चे जंगल को समझेंगे, तभी वे इसके संरक्षण के लिए आगे आएंगे।”

कार्यक्रम के अंत में बच्चों को यह संदेश दिया गया कि हर बच्चा एक ‘वन मित्र’ बने और अपने आसपास पौधारोपण कर उनकी देखभाल करे। बच्चों ने भी संकल्प लिया कि वे अपने परिवार और समाज में वन संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा का संदेश फैलाएंगे।

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