मध्यप्रदेश

नर्मदा वेयर हाउस गाताखेड़ा में परिवहन ठप, खुले में पड़ी धान से बढ़ी किसानों की चिंता किसानों के साथ-साथ खरीदी प्रभारी भी चिंतित 

कलयुग की कलम से राकेश यादव

नर्मदा वेयर हाउस गाताखेड़ा में परिवहन ठप, खुले में पड़ी धान से बढ़ी किसानों की चिंता किसानों के साथ-साथ खरीदी प्रभारी भी चिंतित 

कलयुग की कलम कटनी -प्राथमिक कृषि साख समिति हीरापुर कौड़िया के अंतर्गत संचालित खरीदी केंद्र क्रमांक–1, नर्मदा वेयर हाउस गाताखेड़ा में धान परिवहन की व्यवस्था ठप होने से हालात दिन-ब-दिन गंभीर होते जा रहे हैं। केंद्र पर नियमित रूप से धान खरीदी तो की जा रही है, लेकिन उठाव नहीं होने के कारण सैकड़ों क्विंटल धान खुले परिसर में पड़ी हुई है। मौसम के बदलते मिजाज और बारिश की संभावना ने किसानों के साथ-साथ खरीदी प्रभारी की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

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जानकारी के अनुसार, बीते कई दिनों से परिवहन एजेंसी द्वारा धान का उठाव नहीं किया गया है। परिणामस्वरूप, वेयर हाउस परिसर में खरीदी गई धान का ढेर लग गया है। खुले में रखी धान न केवल मौसम की मार झेल रही है, बल्कि चोरी और नुकसान का खतरा भी बना हुआ है। केंद्र पर जगह की कमी के चलते अब नई खरीदी को सुरक्षित रखने में भी कठिनाई आ रही है।

मौसम विभाग द्वारा आगामी दिनों में बारिश की संभावना जताए जाने के बाद खरीदी केंद्र पर तनाव का माहौल है। यदि अचानक बारिश होती है तो खुले में रखी धान के भीगने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित होना तय है। ऐसी स्थिति में किसानों को भुगतान में कटौती का सामना करना पड़ सकता है, वहीं खरीदी प्रभारी पर भी जवाबदेही तय की जा सकती है। किसानों का कहना है कि उन्होंने पूरी मेहनत और लागत से फसल तैयार की, सरकारी व्यवस्था के भरोसे धान बेची, लेकिन अब व्यवस्था की खामियों का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ सकता है।

स्थानीय किसानों ने आरोप लगाया कि समय पर परिवहन नहीं होने से उनकी उपज खतरे में है। उनका कहना है कि यदि धान खराब हुई तो नुकसान की भरपाई कौन करेगा। कई किसानों ने यह भी बताया कि पहले ही भुगतान में देरी होती है, अब गुणवत्ता खराब होने का डर अलग से सता रहा है।

खरीदी प्रभारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि परिवहन व्यवस्था को लेकर संबंधित एजेंसियों और अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। सीमित संसाधनों के बीच खुले में रखी धान की सुरक्षा करना मुश्किल हो गया है। प्रभारी के अनुसार, यदि बारिश से धान को नुकसान होता है तो पूरी जिम्मेदारी खरीदी केंद्र पर डाल दी जाएगी, जबकि मूल समस्या परिवहन एजेंसी की लापरवाही है।

किसानों और समिति पदाधिकारियों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि शीघ्र ही परिवहन व्यवस्था बहाल नहीं की गई तो बड़े पैमाने पर नुकसान होना तय है। प्रशासन से आग्रह किया गया है कि धान का तत्काल उठाव सुनिश्चित कर किसानों की मेहनत और सरकारी संसाधनों को बर्बादी से बचाया जाए।

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