भरभरा आश्रम में उमड़ा आस्था का सैलाब, संत-महात्मा, साधु-संत एवं हजारों श्रद्धालु हुए शामिल पूरे आश्रम परिसर संत समागम में दिखी श्रद्धा, सेवा और सुरक्षा की मिसाल
कलयुग की कलम से राकेश यादव

भरभरा आश्रम में उमड़ा आस्था का सैलाब, संत-महात्मा, साधु-संत एवं हजारों श्रद्धालु हुए शामिल पूरे आश्रम परिसर संत समागम में दिखी श्रद्धा, सेवा और सुरक्षा की मिसाल
कलयुग की कलम उमरिया पान -नववर्ष के पावन अवसर पर उमरियापान के समीप स्थित प्रसिद्ध भरभरा आश्रम में आध्यात्मिक वातावरण और भक्ति की अनुपम छटा देखने को मिली। संत बनवारीदास महाराज के सानिध्य में आयोजित भव्य संत समागम में मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों से संत-महात्मा, साधु-संत एवं हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। पूरे आश्रम परिसर में दिनभर भक्ति, श्रद्धा और सत्संग की गूंज बनी रही।
नववर्ष के पहले दिन तड़के से ही श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया था। दूर-दराज़ से पहुंचे भक्तों ने संत बनवारीदास महाराज के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और उनके प्रवचनों के माध्यम से जीवन में सद्भाव, सेवा और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश पाया। संत समागम के दौरान प्रवचन, भजन और सत्संग ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति से भर दिया।
इस अवसर पर आश्रम परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। सेवा भावना से ओतप्रोत आश्रम से जुड़े कार्यकर्ताओं द्वारा श्रद्धालुओं को व्यवस्थित रूप से भोजन परोसा गया। भंडारे को श्रद्धालुओं ने प्रभु कृपा और संतों के आशीर्वाद का प्रतीक बताया।
आयोजन के दौरान आश्रम के बाहर मेले जैसा दृश्य देखने को मिला। विभिन्न दुकानों में धार्मिक सामग्री, खिलौने, दैनिक उपयोग की वस्तुएं एवं पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल लगे रहे। परिवार सहित आए श्रद्धालुओं ने जमकर खरीदारी की और स्थानीय स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद लिया, जिससे आयोजन में उत्सव का रंग और गहरा हो गया।
भारी भीड़ को देखते हुए उमरियापान पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। आश्रम परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस बल तैनात रहा। यातायात को सुचारू बनाए रखने, भीड़ नियंत्रण एवं किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पुलिस कर्मी पूरे समय मुस्तैद नजर आए। श्रद्धालुओं ने पुलिस की सजगता और सहयोगपूर्ण रवैये की सराहना करते हुए आयोजन को शांतिपूर्ण और सुरक्षित बताया।
संत समागम के माध्यम से सामाजिक समरसता, धार्मिक आस्था और अनुशासन का सुंदर समन्वय देखने को मिला। यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द और व्यवस्था का भी उदाहरण बना। भरभरा आश्रम में आयोजित संत समागम नववर्ष की एक पवित्र एवं प्रेरणादायक शुरुआत साबित हुआ, जहां आस्था, सेवा और सुरक्षा—तीनों का संतुलित स्वरूप देखने को मिला। यह आयोजन श्रद्धालुओं के मन में शांति, विश्वास और भक्ति की गहरी छाप छोड़ गया।



