परमवीरों के सम्मान पर सवाल नहीं, परमवीर चक्र विजेताओं के सम्मान के साथ-साथ आमजन की सुविधा भी सुनिश्चित होनी थी,उमरिया पान नगर परिषद के कुछ वार्डों के नामों को लेकर ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों ने जताई आपत्ति।
कलयुग की कलम से राकेश यादव

परमवीरों के सम्मान पर सवाल नहीं, परमवीर चक्र विजेताओं के सम्मान के साथ-साथ आमजन की सुविधा भी सुनिश्चित होनी थी,उमरिया पान नगर परिषद के कुछ वार्डों के नामों को लेकर ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों ने जताई आपत्ति।
कलयुग की कलम उमरिया पान -शासन द्वारा उमरिया पान क्षेत्र में नवीन नगर परिषद के गठन की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। इस नवगठित नगर परिषद में उमरिया पान, बम्हनी, पचपेड़ी एवं बरौदा ग्राम पंचायतों को सम्मिलित करते हुए कुल 15 वार्डों का गठन किया गया है। विशेष बात यह है कि इन सभी वार्डों के नाम देश के परमवीर चक्र विजेता शहीदों के नाम पर रखे गए हैं, जिसे आमजन द्वारा सम्मान और गौरव की दृष्टि से देखा जा रहा है।
हालांकि, वार्डों के नामकरण को लेकर ग्रामीणों एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने कुछ व्यवहारिक आपत्तियां दर्ज कराई हैं। स्पष्ट किया गया कि किसी भी ग्रामवासी अथवा जनप्रतिनिधि को देश के परमवीर चक्र विजेताओं के सम्मान से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन कुछ वार्डों के नाम इतने जटिल एवं कठिन हैं कि आम बोलचाल में उनका उच्चारण करना ग्रामवासियों के लिए कठिन हो रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि दैनिक प्रशासनिक कार्यों, पते, पहचान पत्र, दस्तावेजों एवं संवाद में वार्डों के नामों का सहज होना आवश्यक है। अत्यधिक कठिन नाम होने से आम नागरिकों को असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। इसी कारण ग्रामवासियों ने शासन-प्रशासन के समक्ष विधिवत आपत्ति दर्ज कराने और वार्डों के नामों में संशोधन हेतु सुझाव प्रस्तुत करने की बात कही है।
जनप्रतिनिधियों ने भी इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि परिसीमन एवं वार्ड निर्धारण की प्रक्रिया के दौरान राजस्व अमले द्वारा कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा नहीं की गईं। उनका आरोप है कि न तो जनप्रतिनिधियों से और न ही ग्रामवासियों से वार्डों के नामकरण को लेकर कोई राय या सुझाव लिया गया। जबकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्थानीय सहभागिता एवं परामर्श की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि प्रशासनिक अमला नामकरण से पूर्व ग्राम सभाओं अथवा जनप्रतिनिधियों से सुझाव मांगता, तो इस प्रकार की आपत्तियों की स्थिति उत्पन्न नहीं होती। कम से कम प्रक्रिया के दौरान संवाद स्थापित किया जाना चाहिए था, जिससे जनभावनाओं का समुचित सम्मान हो सके।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, शासन के नियमानुसार नगर परिषद गठन, परिसीमन एवं वार्ड नामकरण के पश्चात आपत्तियों के निराकरण के लिए निर्धारित समय-सीमा दी जाती है। इसी क्रम में प्रशासन द्वारा एक सप्ताह की अवधि आपत्तियां आमंत्रित करने हेतु निर्धारित की गई है। इस अवधि में नागरिक एवं जनप्रतिनिधि अपनी लिखित आपत्तियां एवं सुझाव सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं।
कानूनी प्रावधानों के तहत प्राप्त आपत्तियों पर परीक्षण एवं विचार के उपरांत ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। प्रशासन का दावा है कि सभी आपत्तियों का नियमानुसार परीक्षण कर, जनहित और व्यवहारिकता को ध्यान में रखते हुए आवश्यक निर्णय लिया जाएगा।
ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि शासन-प्रशासन उनके सुझावों को गंभीरता से लेगा और ऐसा समाधान निकालेगा जिससे परमवीर चक्र विजेताओं के सम्मान के साथ-साथ आमजन की सुविधा भी सुनिश्चित हो सके। अब सभी की निगाहें आपत्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रशासन के अंतिम निर्णय पर टिकी रहेंगी।



