धान खरीदी केंद्र स्लीमनाबाद बना अव्यवस्था का अड्डा भोला राम वेयरहाउस में किसानों को सुविधाओं की जगह अपमान, नियमों की खुलेआम अनदेखी
कलयुग की कलम से राकेश यादव

धान खरीदी केंद्र स्लीमनाबाद बना अव्यवस्था का अड्डा भोला राम वेयरहाउस में किसानों को सुविधाओं की जगह अपमान, नियमों की खुलेआम अनदेखी
कलयुग की कलम कटनी -किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर पारदर्शी और सुचारु व्यवस्था के तहत धान विक्रय की सुविधा देने के उद्देश्य से स्थापित किए गए धान खरीदी केंद्र, स्लीमनाबाद स्थित भोला राम वेयरहाउस में अपने उद्देश्य से भटकते नजर आ रहे हैं। यहां की जमीनी हकीकत सरकारी दावों की पोल खोलती दिखाई दे रही है। अव्यवस्थाओं, मनमानी और नियमों की धज्जियां उड़ाए जाने से यह केंद्र किसानों के लिए राहत नहीं, बल्कि परेशानी का केंद्र बन गया है।
धान बेचने पहुंचे किसानों का कहना है कि केंद्र पर बैठने, छांव और विश्राम की कोई व्यवस्था नहीं है। सुबह से देर शाम तक किसान खुले आसमान के नीचे खड़े रहने को मजबूर हैं। न तो शेड की सुविधा है और न ही हड़प्पा (विश्राम) का कोई इंतजाम। सर्दी हो या धूप, अन्नदाता को मौसम की मार झेलनी पड़ रही है। शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा भी नदारद है, जो स्पष्ट रूप से शासन के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है।
पेयजल संकट ने बढ़ाई परेशानी
केंद्र पर पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। किसानों को घंटों प्यासा खड़ा रहना पड़ता है या बाहर से पानी खरीदना पड़ता है। यह स्थिति उस अन्नदाता के लिए विडंबनापूर्ण है, जिसे सरकार सम्मान का प्रतीक बताती है।
तौल में खुली लूट, 41 किलो 200 ग्राम की मनमानी
किसानों ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि प्रति बोरी 41 किलो 200 ग्राम धान की तौल की जा रही है, जबकि मानक तौल 40 किलो निर्धारित है। इस अतिरिक्त तौल से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। डर के कारण किसान खुलकर विरोध भी नहीं कर पा रहे हैं।
पारदर्शिता का अभाव, बोर्ड तक नहीं
खरीदी केंद्र पर न तो सूचना बोर्ड लगा है और न ही खरीदी से संबंधित नियम, दरें, लक्ष्य या जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी प्रदर्शित की गई है। यह स्थिति पारदर्शिता को पूरी तरह खत्म करती है।
नोडल अधिकारी और सर्वेयर नदारद
केंद्र पर नोडल अधिकारी और सर्वेयर की अनुपस्थिति से गुणवत्ता जांच और निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अमानक धान की भी बिना जांच तौल कराए जाने के आरोप हैं।
केंद्र प्रभारी की मनमानी, किसानों को ठेंगा
किसानों का आरोप है कि केंद्र प्रभारी का रवैया तानाशाही भरा है। शिकायत करने पर तौल रोकने या वापस लौटा देने की धमकी दी जाती है। मजबूरी में किसान चुप रहकर शोषण सहने को विवश हैं।अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस अव्यवस्था पर संज्ञान लेगा या अन्नदाता यूं ही ठगा जाता रहेगा?



