ढीमरखेड़ा बिहरिया बीट में अतिक्रमणकारियों को रोकने गए, वन विभाग के अमले पर अतिक्रमणकारियों ने बोला हमला झूमा झपटी कर वनकर्मियों से की मारपीट 20 एकड़ में फैलाया कब्जा
कलयुग की कलम से राकेश यादव

ढीमरखेड़ा बिहरिया बीट में अतिक्रमणकारियों को रोकने गए, वन विभाग के अमले पर अतिक्रमणकारियों ने बोला हमला झूमा झपटी कर वनकर्मियों से की मारपीट 20 एकड़ में फैलाया कब्जा
कलयुग की कलम ढीमरखेड़ा – वनों की सुरक्षा और संरक्षण किसी भी राष्ट्र के प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए आवश्यक है। लेकिन जब इन्हीं वनों पर अतिक्रमण कर हरे भरे पेड़ पौधे काट कर कब्जा किया जाता है, और उस पर रोक लगाने पहुंचे वन विभाग के कर्मचारियों पर हमला कर दिया जाता है, तब यह न सिर्फ कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बनता है, बल्कि वन संपदा की रक्षा करने वालों के मनोबल पर भी गहरी चोट पहुंचाता है। ऐसी ही एक गंभीर घटना मध्य प्रदेश के ढीमरखेड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत बिहरिया बीट में सामने आई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बिहरिया बीट के अंतर्गत पिछले कुछ समय से लगातार अतिक्रमण की शिकायतें मिल रही थीं। रेंजर अजय मिश्रा और उनके स्टाफ को सूचना मिली थी कि कुछ लोग करीब 20 एकड़ वन भूमि पर कब्जा कर खेती करने का प्रयास कर रहे हैं। सूचना के आधार पर विभागीय टीम मौके पर पहुंची और अतिक्रमण को रोकने की कार्रवाई शुरू की। लेकिन स्थिति तब बेकाबू हो गई, जब अतिक्रमणकारियों ने समझाइश के बावजूद वन कर्मचारियों पर हमला बोल दिया।

वन विभाग के कर्मचारियों ने इस हमले की सूचना तत्काल थाना ढीमरखेड़ा में दी। इसके बाद वन विभाग द्वारा एक लिखित रिपोर्ट दर्ज करवाई गई, जिसमें हमलावरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई। विभाग ने स्पष्ट किया कि यह हमला न केवल सरकारी कार्य में बाधा है, बल्कि वन संरक्षण अधिनियम और आपराधिक कानूनों का भी सीधा उल्लंघन है। बिहरिया बीट एक ऐसा क्षेत्र है जो घने जंगलों और वन्य जीवों के लिए जाना जाता है। पिछले कुछ वर्षों से ग्रामीणों के संरक्षण में कुछ बाहरी लोग धीरे-धीरे यहां कब्जा कर खेती, निर्माण, और अन्य गतिविधियां कर रहे हैं। यह अतिक्रमण धीरे-धीरे संगठित रूप लेता जा रहा था। अब तक लगभग 20 एकड़ जमीन पर अनाधिकृत कब्जा कर लिया गया है। स्थानीय प्रशासन और वन विभाग को पहले भी इस क्षेत्र में कार्रवाई करनी पड़ी थी, लेकिन हालिया घटना ने पूरे क्षेत्र को हिला कर रख दिया है।
समझाने के बाद भी नहीं माने अतिक्रमणकारी
*वन विभाग लगातार कर रहा संघर्ष*
वन विभाग के कर्मचारियों की जिम्मेदारी केवल जंगलों की निगरानी और संरक्षण की नहीं है, बल्कि उन्हें अक्सर स्थानीय राजनीति, सामाजिक दबाव और माफिया तंत्र से भी जूझना पड़ता है। बिहरिया बीट की घटना से स्पष्ट होता है कि जंगल की भूमि को निगलने वाला अतिक्रमण अब एक सुनियोजित षड्यंत्र का रूप ले चुका है। रेंजर अजय मिश्रा ने बताया कि,“हम सिर्फ कानून का पालन कर रहे थे। अतिक्रमण करने वालों को शांतिपूर्वक समझाया गया, लेकिन उन्होंने लाठी-डंडों से हमला कर दिया।



