कटनी- आज जब देश में शासन व्यवस्था और कानून व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की बातें हो रही हैं, वहीं ज़मीनी हकीकत कई बार इन दावों की पोल खोल देती है। मध्यप्रदेश के कटनी जिले में पदस्थ यातायात प्रभारी राहुल पाण्डेय पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। नागरिकों का आरोप है कि वे चालान के नाम पर खुल्लम-खुल्ला अवैध वसूली कर रहे हैं और खासकर गरीब तबके को बेवजह परेशान किया जा रहा है।आमजन की बात को अनसुना करना, अभद्र भाषा का प्रयोग और खुद को कानून से ऊपर समझना जैसे आरोप उन पर लगातार लगते आ रहे हैं।
मनमानी का पर्याय बन चुके हैं राहुल पाण्डेय
राहुल पाण्डेय का नाम सुनते ही स्थानीय लोगों के चेहरे पर डर और असहायता की छाया दिखने लगती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वह अक्सर सड़क पर खड़े होकर वाहनों को रोकते हैं और बिना किसी उचित कारण के चालान काट देते हैं। कई बार तो किसी दस्तावेज़ की मांग किए बिना ही वाहन चालकों को डरा-धमका कर पैसा वसूला जाता है। चालान की पर्ची कभी नहीं दी जाती, और अगर कोई सवाल करता है तो उसे झूठे केस में फँसाने की धमकी दी जाती है।
चालान का डर और वसूली का खेल
यातायात नियमों का पालन कराना एक जिम्मेदारी है, लेकिन जब वही जिम्मेदारी डर, धमकी और अवैध वसूली का माध्यम बन जाए, तो कानून व्यवस्था पर सवाल उठना लाज़मी है। कई गरीब ऑटो चालक, मजदूर और ग्रामीण लोग जो छोटे-छोटे काम कर परिवार पालते हैं, उनके पास इतने पैसे नहीं होते कि वे हर बार ₹500 से ₹1000 तक का चालान भर सकें। लेकिन राहुल पाण्डेय की टीम उन्हें रोककर ‘ड्रेस कोड’, ‘ड्राइविंग लाइसेंस’, ‘मॉडिफाइड साइलेंसर’ जैसे बहानों से चालान बना देती है। कुछ वाहन चालकों ने दावा किया कि जब उनके पास सभी दस्तावेज मौजूद थे, फिर भी उनसे ₹200 से ₹500 नकद लेकर छोड़ दिया गया, और कोई रसीद नहीं दी गई। यह सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और अवैध वसूली का मामला बनता है।
गरीबों पर सीधा प्रहार
जिन लोगों के पास महंगी गाड़ियाँ होती हैं या राजनीतिक पहचान होती है, उन्हें बिना जांच के छोड़ दिया जाता है। वहीं जिनके पास बोलने का हक़ नहीं या जो गरीब तबके से आते हैं, उन्हें आसानी से शिकार बना लिया जाता है। कई मामलों में यह देखा गया है कि मजदूर जो निर्माण स्थल से लौट रहे थे, उनके साइकिल या मोटरसाइकिल तक को रोक लिया गया और उनसे ₹100 से ₹200 की वसूली कर ली गई।
जनता की आवाज को दबाया जा रहा है
यदि कोई व्यक्ति इस मनमानी का विरोध करता है या वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत करने की बात करता है, तो उसे डराया-धमकाया जाता है। कई लोग कहते हैं कि उन्हें थाने ले जाकर झूठे केस में फँसाने की धमकी दी गई। इतना ही नहीं, राहुल पाण्डेय द्वारा कथित रूप से अपने मातहत कर्मचारियों को भी यह निर्देश दिए जाते हैं कि किसी की शिकायत को गंभीरता से न लिया जाए।