नियमों को जेब में रखकर ढीमरखेड़ा तहसील में हों रही रेत की चोरी हाथ में हाथ रखे बैठा प्रशासन, हर माह साहबों तक पहुंच रहा नजराना जिन खदानों की अनुमति नहीं वहां से भी निकल रही रेत रायल्टी की जगह रेत कंपनी के गुर्गे टोकन सिस्टम से ढुलवा रहे रेत शासन को लग रहा करोड़ों का चूना
कलयुग की कलम से राकेश यादव

नियमों को जेब में रखकर ढीमरखेड़ा तहसील में हों रही रेत की चोरी हाथ में हाथ रखे बैठा प्रशासन, हर माह साहबों तक पहुंच रहा नजराना जिन खदानों की अनुमति नहीं वहां से भी निकल रही रेत रायल्टी की जगह रेत कंपनी के गुर्गे टोकन सिस्टम से ढुलवा रहे रेत शासन को लग रहा करोड़ों का चूना
कलयुग की कलम ढीमरखेड़ा-इन दिनों ढीमरखेड़ा क्षेत्र के अनेकों घाटों से रेत का अवैध उत्खनन जोरों से चालू है और रेत कंपनी के गुर्गोँ के द्वारा नियम कानून को हाथ में लेकर दर्जनों घाटों से रेत की निकासी की जा रही है। यह घाट ऐसे है जहां पर प्रशासन के द्वारा अनुमति नहीं दी गई बावजूद इसके कुख्यात बदमाश के द्वारा तहसील के दर्जनों घाटों से रेत का अवैध उत्खनन करवाया जा रहा है। स्मरण रहे कि तहसील क्षेत्र के कई घाट ऐसे है जहां पर पर्यावरण विभाग की अनुमति नहीं दी गई है जिस कारण से खनिज विभाग के द्वारा रेत उत्खनन की अनुमति नहीं दी गई बावजूद इसके तहसील में व्यापक पैमाने पर रेत की चोरी की जा रही है, हालांकि इस काम में प्रशासन की मिलीभगत भी परिलक्षित हो रही है। बिना प्रशासन की सह इतने बड़े पैमाने पर रेत की निकासी नहीं की जा सकती है। उल्लेखनीय है कि रेत का अवैध उत्खनन ढीमरखेड़ा तहसील के अनेकों हिस्सों में किया जा रहा है। जिससे यह समस्या भयावह रूप ले चुकी है। शासन द्वारा मात्र दो घाटों को रेत खनन की स्वीकृति दी गई है, लेकिन हकीकत यह है कि दर्जनों घाटों पर अवैध रूप उत्खनन हो रहा है।
मशीन लगाकर कर रहे नदियों का सीना छलनी
बड़ी-बड़ी मशीनें दिन-रात नदियों के तल को छलनी कर रही हैं। इस प्रक्रिया में न केवल प्राकृतिक संसाधनों का दोहन हो रहा है, बल्कि जैव विविधता और पर्यावरण पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है। खनिज विभाग ने ढीमरखेड़ा तहसील में रेत खनन के लिए केवल दो घाटों की अनुमति दी है,लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि दर्जनों घाटों से रेत माफिया खुलेआम अवैध उत्खनन कर रहे हैं। धनलक्ष्मी कंपनी ने ठेका लेने के बाद इसे पेटी ठेकेदारों को सौंप दिया है, जो अपने स्थानीय गुर्गों के जरिए घाटों पर रेत निकाल रहे हैं। माफियाओं के द्वारा दो – दो मशीनें चालू हैं कर नदियों के सीने को चीरकर कार्य किया जा रहा है। उल्लेखनीय हैं कि रेत निकालने के लिए नियमों के खिलाफ बड़ी-बड़ी मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। इससे न केवल नदी तल का क्षरण हो रहा है, बल्कि आसपास की भूमि पर भी असर पड़ रहा है। ग्रामीण इलाकों में गहरी खाइयों का निर्माण हो गया है, जो दुर्घटनाओं को निमंत्रण दे रही हैं। स्थानीय प्रशासन और खनिज विभाग इस समस्या पर पूरी तरह से मौन हैं। यह आरोप है कि इन विभागों के अधिकारियों को नियमित रूप से रेत माफियाओं द्वारा भुगतान किया जाता है, जिससे उनकी मिलीभगत साफ झलकती है। ग्रामीणों की शिकायतों को अनदेखा कर दिया जाता है, जिससे उनका विश्वास प्रशासन से उठ गया है।
माफियाओं की करतूत, मोड़ दी नदी की धार
अत्यधिक रेत खनन से नदी तल गहराने लगता है, जिससे नदियों का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित होता है। इस बदलाव से न केवल जलीय जीवों का निवास स्थल नष्ट होता है, बल्कि बाढ़ और सूखे जैसी समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं। रेत प्राकृतिक रूप से जल को संचित करने का कार्य करती है। लेकिन रेत के अत्यधिक खनन से भूजल स्तर में गिरावट आ रही है, जिससे आसपास के क्षेत्रों में पानी की किल्लत बढ़ रही है। रेत खनन से मछलियों और अन्य जलीय जीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहा है। इसके अलावा, नदी किनारे की वनस्पतियां भी समाप्त हो रही हैं, जिससे जैव विविधता पर गहरा असर पड़ रहा है। नदी तल पर अत्यधिक खनन से आसपास की भूमि कमजोर हो जाती है। इसके साथ ही रेत माफियाओं के द्वारा नदी की धार को मोड़कर रेत की निकासी की जा रही है।
ग्रामीणों को डराकर खेतों से करते है निकासी
रेत माफियाओं के डर से ग्रामीण इनके खिलाफ कुछ बोलने की हिम्मत नहीं कर पाते। जिनकी भूमि से जेसीबी, ट्रक और ट्रैक्टर गुजरते हैं, उन्हें मामूली किराया दिया जाता है। इस लालच के कारण ग्रामीण भी इनके कार्यों में हस्तक्षेप नहीं करते। ग्रामीणों की शिकायतों को अनसुना कर दिया जाता है। प्रशासन का रवैया यह है कि रेत माफियाओं के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया जाता, जिससे ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ जाती है। यदि किसी के द्वारा शिकायत की भी जाती है तो रेत माफियाओं के गुर्गो द्वारा उन्हें धमकी दी जाती है। तहसील क्षेत्र में कई जगह ऐसी है जहां पर ग्रामीणों के खेतों से होकर नदी में जाना पड़ता है । रेत माफियाओं के द्वारा जहां से रेत की निकासी की जाती है वहां के ग्रामीण त्रस्त हो चुके है। इस संबंध में उनके द्वारा कई बार अधिकारियों को शिकायत की गई लेकिन रेत माफियाओं और अधिकारियों की संगामित्ती के कारण अधिकारी किसी तरह की कार्यवाही की हिम्मत नहीं जुटा पाते है।
स्वीकृति कहीं और की उत्खनन हों रहा कहीं और
नियमों के अनुसार, रेत की खुदाई दो फिट से अधिक नहीं होनी चाहिए। लेकिन यहां रेत माफियाओं द्वारा भारी मशीनों के जरिए गहराई में पानी के अंदर से रेत निकाली जा रही है। इससे नदियों में बड़ी-बड़ी खाइयों का निर्माण हो गया है। रेत खनन करते समय पर्यावरणीय मानकों की पूरी तरह अनदेखी की जा रही है। नदियों के पास रहने वाले जीव-जंतुओं और पौधों के लिए यह स्थिति विनाशकारी साबित हो रही है। अवैध रूप से रेत का खनन होने के कारण जीव-जंतुओं की मौत भी हो रही है।
हर विभाग में रेत माफिया पहुंचाते हैं लक्ष्मी
रेत माफियाओं की पूरी सेटिंग प्रशासन और खनिज विभाग के साथ हो चुकी है। ऐसा कहा जाता है कि संबंधित अधिकारियों को नियमित रूप से रिश्वत दी जाती है, जिससे अवैध खनन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। अवैध खनन से सरकार को भारी राजस्व हानि हो रही है। सरकार द्वारा स्वीकृत घाटों से हटकर अन्य घाटों पर खनन किया जा रहा है, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंच रहा है। सवाल यह उठता है कि जब घाट में उत्खनन को पर्यावरण विभाग की अनुमति नहीं दी गई और घाट स्वीकृत नहीं है तो किन अधिकारियों के द्वारा सरंक्षण में रेत माफियओं के द्वारा दो-दो पोकलेन मशीन उतार दी गई।
बदमाश और सत्ताधारी दल के नेताओं का संरक्षण
विदित हो कि ढीमरखेड़ा तहसील अंतर्गत आने वाले दर्जनों घाटों को धनलक्ष्मी कंपनी के द्वारा पेटे ठेका में देकर प्रतिमाह 25 लाख रुपए की राशि दी जा रही है जहां पर अनेकों व्यक्तियों के द्वारा उक्त पेटा ठेका लिया गया है। इस अवैध कार्य को संचालित करने के लिये क्षेत्र के कुख्यात बदमाश एवं सत्ताधारी दल के कई नेताओं का संरक्षण गुर्गों को दिया गया है। जिस कारण से स्थानीय प्रशासन की हिमाकत नहीं हो पाती कि वह इनके विरूद्ध कोई कठोर कार्यवाही कर सके।
नायब तहसीलदार ने पकड़ा थी रेत से भरी टेक्टर-ट्राली
क्षेत्र में रेत जोरों के द्वारा धड़ल्ले से रेत की चोरी की जा रही है। विगत दिवस रेत का परिवहन करते हुए उमरियापान नायब तहसीलदार ने एक ट्रैक्टर ट्रॉली को जब्त किया है। नायब तहसीलदार अजय मिश्रा ने बताया कि शुक्रवार दोपहर को घुघरी में रेत परिवहन की सूचना मिली। उमरियापान निवासी चालक छोटू आदिवासी रेत से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली को लेकर आ रहा था। चालक से पूछताछ कर रेत संबंधी कागजात मांगे लेकिन चालक कोई भी दस्तावेज नहीं दिखा सका।ट्रैक्टर ट्रॉली घुघरी के गोलू रजक की हैं। पंचनामा कार्रवाई के बाद नायब तहसीलदार ने रेत से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली को जब्त कर उमरियापान थाना में खड़ा कराया है।



