मध्यप्रदेश

एमपी के कटनी जिले के ढीमरखेड़ा महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य ने कर रखा है मेरी पत्नी को कैद, पीड़ित युवक ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर न्याय की लगाई गुहार

कलयुग की कलम से सोनू त्रिपाठी की रिपोर्ट

कटनी- जिले के ढीमरखेड़ा विकासखंड क्षेत्र में हाल ही में अपनी विवादित कार्यप्रणाली को लेकर सुर्खियों में आये ढीमरखेड़ा महाविद्यालय के पूर्व प्रभारी प्राचार्य का एक और कारनामा उजागर हुआ है। जहां पर उनके द्वारा बिना वैधानिक प्रक्रिया को अपनाये दूसरी पत्नी को रख लिया है। जबकि वे पूर्व से विवाहित है ऐसे में हिन्दु विवाह अधिनियम 1955 के तहत बिना तलाक हुये दूसरी शादी करना या दूसरी पत्नी रखना अपराध की श्रेणी में आता है। पूर्व प्राचार्य पर पीड़ित के द्वारा यह भी आरोप लगाये गये कि उसकी पत्नी को प्राचार्य के द्वारा बंधक बनाया गया है और मुझे लगातार जान से धमकी दी जा रही है। इस संबंध में पीड़ित संतोष पिता नरेश मेहतर निवासी ढीमरखेड़ा ने पुलिस अधीक्षक कटनी को शिकायत पत्र सौंपकर बताया कि मेरी शादी छायाबाई से हुई थी। शादी के बाद उसके तीन बच्चे भी हैं। नरेश ने बताया कि लगभग 3 वर्ष पूर्व मेरी पत्नी छाया बाई ढीमरखेड़ा महाविघालय में साफ-सफाई का काम पार्ट टाइम जॉब के रूप में करने लगी। इसी दौरान महाविद्यालय में पदस्थ प्रभारी प्राचार्य बृजलाल अहिरवार ने छाया बाई को बहला-फुसला कर बंधक बना लिया। पत्नी अपने साथ लगभग 50 हजार रूपए कीमती जेवर भी अपने साथ ले गई। नरेश का कहना है कि इस बात की शिकायत उसने ढीमरखेड़ा थाने में भी दी लेकिन ढीमरखेड़ा पुलिस के द्वारा शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसी बीच शिकायत करने की जानकारी लगने पर बीती 28 अगस्त 2024 को बृजलाल अहिरवार मेरे घर में आया और बोला कि तुम बार-बार मेरी शिकायत करते हो। तुम जानते नहीं में बहुत पहुंच वाला हूं मैं तुमको एवं तुम्हारे बच्चो को जान से मरवा दूंगा। इस दौरान ब्रजलाल अहिरवार गाली गलौज करने लगा। जिसका विरोध करने पर वह मुझे जातिगत अपमानित करते हुए मारपीट करने लगा। नरेश का कहना है कि पत्नी के न आने से उसके बच्चे बहुत परेशान हैं तथा उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा भी धूमिल हो रही है।

छात्र-छात्राओं पर पड़ रहा बुरा असर

पीड़ित नरेश का यह भी कहना है कि शिक्षा के मंदिर में उच्च पद पर बैठे व्यक्ति के द्धारा किया गया यह कृत्य महाविघालय के छात्र-छात्राओं पर भी बुरा असर डाल रहा है। क्योंकि उन पर बच्चों को शिक्षित और अच्छा ज्ञान देने की जिम्मेदारी है लेकिन जब खुद के यह हाल है तो बच्चों का भगवान ही मालिक होगा।

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