प्रशासनमध्यप्रदेश

घुघरी घाट बना अवैध रेत माफिया का अड्डा खुलेआम उत्खनन, नाबालिग बच्चों और महिलाओं से कराई जा रही मजदूरी, प्रशासन मौन

कलयुग की कलम से राकेश यादव

घुघरी घाट बना अवैध रेत माफिया का अड्डा
खुलेआम उत्खनन, नाबालिग बच्चों और महिलाओं से कराई जा रही मजदूरी, प्रशासन मौन

कलयुग की कलम उमरिया पान-क्षेत्र के घुघरी घाट से बड़े पैमाने पर अवैध रेत उत्खनन का गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है। हालात इतने बदतर हैं कि अवैध रेत कारोबार में नाबालिग बच्चों और महिलाओं से खुलेआम मजदूरी कराई जा रही है, जिससे कानून, मानवता और प्रशासनिक व्यवस्था—तीनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार घुघरी घाट पर दिनभर बिना किसी अनुमति के रेत निकाली जा रही है। हैरानी की बात यह है कि छोटे-छोटे बच्चे, जिन्हें स्कूल में होना चाहिए, वे नदी घाट पर रेत ढोते नजर आ रहे हैं। वहीं कई महिलाएं भी मजबूरी में जोखिम भरे हालातों में मजदूरी कर रही हैं। घाट पर न तो सुरक्षा के कोई इंतजाम हैं और न ही बाल श्रम रोकने के लिए किसी तरह की निगरानी।
नाबालिग बच्चों से श्रम कराना कानूनन अपराध है, इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि अवैध रेत कारोबारियों को राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है, इसी कारण नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। खनिज विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस की निष्क्रियता को लेकर भी क्षेत्र में गहरी नाराजगी देखी जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अवैध रेत उत्खनन से जहां एक ओर शासन को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है, वहीं दूसरी ओर बच्चों का भविष्य अंधकार में धकेला जा रहा है और महिलाओं का शोषण हो रहा है। नदी के पर्यावरण को भी गंभीर क्षति पहुंच रही है।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि घुघरी घाट पर तत्काल छापेमारी कर अवैध रेत उत्खनन पूरी तरह रोका जाए। नाबालिग बच्चों से कराए जा रहे श्रम पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो तथा इस अवैध कारोबार में संलिप्त लोगों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएं।
इनका कहना है
“जो भी अवैध रेत उत्खनन क्षेत्र में संचालित हैं, उन पर कार्रवाई की जाएगी। फील्ड अधिकारियों को मौके पर भेजा जाएगा। हालांकि अभी तक अधिकारी को मौके पर नहीं भेजा गया है।”
— रत्नेश दीक्षित, खनिज विभाग अधिकारी

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