खास रिपोर्ट- रीवा में करीब तीन महीने पहले हुए हादसे के बाद प्रदेश भर में असुरक्षित बोरवेल को सुरक्षित करने का अभियान चलाने की घोषणा हुई। अभियान कितने गंभीरता से चले, इसका उदाहरण कुछ दिन पूर्व ही सिंगरौली में हुई घटना से पता लगाया जा सकता है, जिसमें एक बच्ची की जान चली गई। रीवा में हुई घटना भी लापरवाही का ही नतीजा रहा है। क्योंकि वर्ष 2023 के अंत में भी बोरवेल को बंद करने का अभियान पूरे विंध्य क्षेत्र में चलाया गया था। इसके बाद भी रीवा के त्यौंथर तहसील में घटना हो गई। पहले रीवा और अब सिंगरौली में बोरवेल की घटना को अधिकारी सबक के रूप में लें तो भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। बोरवेल को सुरक्षित करने को लेकर फिर से अभियान चलाया जाए और अधिकारी इसकी गंभीरता के साथ निगरानी करें। सब कुछ केवल मैदानी अमले पर नहीं छोड़ा जाए। आम लोगों की जिम्मेदारी भी तय की जाए। निजी बोर को सुरक्षित करने के बाबत सूचना देने की जिम्मेदारी बोर मालिक की तय की जाए। सूचना नहीं देने और बोरवेल असुरक्षित मिलने पर सख्त कार्रवाई की घोषणा की जाए। इतने भर से काम नहीं चलेगा। असुरक्षित बोरवेल को लेकर गांव के सरपंच व सचिव को भी संवेदनशील बनना होगा। ड्यूटी के प्रति नैतिक दायित्व के साथ सरपंच व सचिव इस अभियान को पूरी संवेदना के साथ लें तो तय है कि गांव के नए व पुराने और खुले व बंद सभी तरह के बोरवेल की जानकारी मिल जाएगी। सिंगरौली की बात करें तो जिला पंचायत के अधिकारी वर्ष 2023 के अंत में 3 हजार से अधिक असुरक्षित बोरवेल को बंद करने का दावा कर रहे हैं। साथ ही जिले में सभी असुरक्षित बोरवेल को सुरक्षित किए जाने का प्रमाणपत्र भी उनकी ओर से प्रस्तुत किया गया था। इसके बावजूद हुई घटना उनके इन प्रमाण पत्रों को आइना दिखा रही है। रीवा में घटना के बाद बोरवेल मालिक के विरूद्ध कार्रवाई की गई थी, लेकिन यहां सिंगरौली बोरवेल मालिक ही पीड़ित है। इसलिए प्रशासन सख्त कदम नहीं उठा सका है। यह बात और है कि सिंगरौली की घटना के बाद पीएचइ के इंजीनियर व सीइओ जनपद पंचायत पर निलंबन की कार्रवाई हुई है। ग्राम पंचायत के सचिव व सरपंच को भी नोटिस दिया गया है। भविष्य के लिए कुछ ऐसा किया जाए कि इस तरह की स्थिति नहीं बने।