ढीमरखेड़ा महाविद्यालय में राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का भव्य समापन कैंसर और मधुमेह पर विशेषज्ञों के मंथन से जागरूकता, शोध और नवाचार को मिली नई दिशा
कलयुग की कलम से राकेश यादव

ढीमरखेड़ा महाविद्यालय में राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का भव्य समापन कैंसर और मधुमेह पर विशेषज्ञों के मंथन से जागरूकता, शोध और नवाचार को मिली नई दिशा
ढीमरखेड़ा, कटनी। उच्च शिक्षा विभाग, मध्य प्रदेश शासन के संरक्षण में शासकीय महाविद्यालय ढीमरखेड़ा में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का आज गरिमामय वातावरण में सफल समापन हुआ। “कैंसर एवं मधुमेह: उभरती चुनौतियाँ और भविष्य की दिशा” विषय पर केंद्रित इस संगोष्ठी ने न केवल वैज्ञानिक विमर्श को नई दिशा दी, बल्कि विद्यार्थियों में शोध चेतना, स्वास्थ्य जागरूकता और नवाचार की भावना भी प्रबल की।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रभारी प्राचार्य डॉ. बृजलाल अहिरवार के मार्गदर्शन में मां सरस्वती के पूजन से हुआ। छात्राओं ने मधुर सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर वातावरण को आध्यात्मिक गरिमा से भर दिया। इसके पश्चात अतिथियों एवं वक्ताओं का पारंपरिक रूप से शॉल, श्रीफल, स्मृति चिन्ह एवं पौधे भेंट कर स्वागत किया गया।
शोध संगोष्ठी की रूपरेखा और उद्देश्य
संगोष्ठी की संयोजिका डॉ. मनीषा व्यास ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा, उद्देश्य और विषय-वस्तु से उपस्थित जनों को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि कैंसर और मधुमेह जैसी वैश्विक चुनौतियाँ केवल चिकित्सा का विषय नहीं हैं, बल्कि सामाजिक, जीवनशैली और पर्यावरणीय कारकों से भी गहराई से जुड़ी हैं। इस संगोष्ठी का उद्देश्य बहुआयामी दृष्टिकोण से समाधान तलाशना और शोधार्थियों को नवीन दिशाओं से परिचित कराना है।
प्रथम दिवस : वैज्ञानिक दृष्टिकोण और चिकित्सा समाधान
तकनीकी सत्र – 1
प्रथम तकनीकी सत्र में मुख्य वक्ता प्रो. सर्दूल सिंह संधू, डीन एवं विभागाध्यक्ष, जीव विज्ञान विभाग, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर ने ऑनलाइन माध्यम से कैंसर और मधुमेह पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान और तनाव इन रोगों के प्रमुख कारण बन रहे हैं। उन्होंने प्रारंभिक जांच, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम को बचाव का सर्वोत्तम उपाय बताया।
इसके पश्चात डॉ. मोनिका कपूर, सीएमओ, नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज, जबलपुर ने “मधुमेह: वैश्विक महामारी और समाधान की कार्ययोजना” विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि मधुमेह केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की चुनौती बन चुका है। उन्होंने सामुदायिक जागरूकता, नियमित स्क्रीनिंग और जीवनशैली सुधार को नियंत्रण का आधार बताया।
तकनीकी सत्र – 2
द्वितीय तकनीकी सत्र में डॉ. मीनल रहमान, स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज, जेएनयू, जयपुर, राजस्थान ने कैंसर नियंत्रण में नैनो तकनीक की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि नैनोमेडिसिन लक्षित उपचार (targeted therapy) के माध्यम से स्वस्थ कोशिकाओं को सुरक्षित रखते हुए कैंसर कोशिकाओं पर प्रभावी प्रहार कर सकती है।
इसके बाद डॉ. जय प्रकाश अवस्थी, शासकीय महाविद्यालय उमरियापान, जिला कटनी ने मधुमेह के नैदानिक प्रबंधन में आयुर्वेदिक औषधियों की उपयोगिता पर व्याख्यान दिया। उन्होंने पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के समन्वय को भविष्य की दिशा बताया।
द्वितीय दिवस : आधुनिक शोध और वैकल्पिक चिकित्सा पर विमर्श
तकनीकी सत्र – 1
दूसरे दिन के प्रथम तकनीकी सत्र में डॉ. संचाली अजय पाद्येय, सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर, छत्तीसगढ़ स्टेट फॉरेंसिक साइंस लेबोरेट्री, रायपुर ने “कैंसर: व्यक्तिगत चिकित्सा की दिशा में नए कदम” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि जीन आधारित उपचार (precision medicine) भविष्य में कैंसर उपचार को अधिक प्रभावी और कम दुष्प्रभाव वाला बना सकता है।
इसके पश्चात डॉ. सपना राय, प्राध्यापक, शासकीय स्वशासी आदर्श विज्ञान महाविद्यालय, जबलपुर ने “कैंसर प्रबंधन में औषधीय पौधे: एक वैकल्पिक दृष्टिकोण” विषय पर प्रेरक व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने औषधीय वनस्पतियों की भूमिका, उनके जैव सक्रिय तत्वों तथा आयुर्वेदिक उपचार पद्धति के महत्व पर प्रकाश डाला।

तकनीकी सत्र – 2
अगले क्रम में डॉ. प्रणिता भटेले, सहायक प्राध्यापक, शासकीय महाविद्यालय कुंडम, जिला जबलपुर ने “कैंसर अनुसंधान में जीनोमिक्स, एपिजेनेटिक्स और बायोलॉजी प्रणाली का एकीकरण” विषय पर प्रभावी प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि बहु-विषयक शोध से कैंसर की जटिलताओं को समझने और उपचार विकसित करने में नई संभावनाएँ खुल रही हैं।
तकनीकी सत्रों के अध्यक्ष डॉ. जयप्रकाश अवस्थी ने दोनों दिवस के व्याख्यानों का सार प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह संगोष्ठी शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी रही।
विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी : पोस्टर प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र
संगोष्ठी के अंतर्गत विद्यार्थियों द्वारा कैंसर और मधुमेह विषय पर पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रदर्शनी में वैज्ञानिक जानकारी, जागरूकता संदेश और नवाचारी प्रस्तुति का उत्कृष्ट समन्वय देखने को मिला। अतिथियों एवं वक्ताओं ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर विद्यार्थियों की सराहना की।
पुरस्कार विजेता
प्रथम पुरस्कार: अभिषेक कुमार, बीएससी चतुर्थ वर्ष द्वितीय पुरस्कार: आशिका, बीएससी चतुर्थ वर्ष तृतीय पुरस्कार: प्रिया चक्रवर्ती, बीएससी तृतीय वर्ष सांत्वना पुरस्कार: संजना बाढ़ई, रेशु बर्मन, प्रियंका (बी.ए. द्वितीय वर्ष) इस प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता और स्वास्थ्य जागरूकता को प्रोत्साहित किया।
आयोजन में सहयोग करने वाले प्रमुख सदस्य
इस राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी को सफल बनाने में महाविद्यालय परिवार की सक्रिय भूमिका रही। विशेष सहयोग प्रदान करने वालों में –डॉ. मनीषा व्यास (संयोजिका), श्रीमती स्मिता परसाई (सह-संयोजिका), डॉ. सचिन कोष्टा (आयोजन सचिव), डॉ. राजाराम सिंह, डॉ. हर्षित द्विवेदी, डॉ. मनोज कुमार गुप्ता, श्री युवराज तिवारी, श्री जवाहरलाल चौधरी, श्री मनीष कुमार, श्री जितेंद्र कुमार, अभिषेक कुमार, दीनदयाल चक्रवर्ती, लक्ष्मी पटेल, भारती लोधी, काजल शर्मा, श्वेता शर्मा, रीना पटेल, छाया उपाध्याय, शिखा त्रिपाठी, शालिनी पटेल, हेमलता चक्रवर्ती, निशा तिवारी आदि का उल्लेखनीय योगदान रहा।
गणमान्य अतिथियों की गरिमामय उपस्थिति
समापन अवसर पर विभिन्न महाविद्यालयों एवं संस्थानों से आए गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। उपस्थित प्रमुख अतिथियों में –डॉ. आरती धुर्वे, प्रभारी प्राचार्य, शासकीय महाविद्यालय उमरियापान डॉ. रतिराम अहिरवार, प्रभारी प्राचार्य, शासकीय महाविद्यालय सिलौंडी डॉ. बीना सिंह, सहायक प्राध्यापक, शासकीय कन्या महाविद्यालय कटनी डॉ. अरुण कुमार सिंह, प्राध्यापक, शासकीय महाविद्यालय विजयराघवगढ़ डॉ. दिव्या शुक्ला, डॉ. आशीष पांडे, श्री निकेत कुमार डॉ. ईश्वरदीन, सहायक प्राध्यापक, शासकीय महाविद्यालय उमरियापान शोधार्थी, पत्रकारगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
संचालन और आभार प्रदर्शन
कार्यक्रम का प्रभावी संचालन डॉ. श्वेता सिंह बघेल, डॉ. अखिलेश कुमार द्विवेदी एवं डॉ. कृष्ण कुमार नागवंशी ने संयुक्त रूप से किया।
अंत में प्रभारी प्राचार्य डॉ. बृजलाल अहिरवार ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, आयोजकों, विद्यार्थियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की संगोष्ठियाँ शिक्षा को शोध और समाज से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं।
निष्कर्ष : शोध, जागरूकता और नवाचार की दिशा में सार्थक पहल
दो दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी ने यह सिद्ध किया कि कैंसर और मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों से लड़ाई केवल चिकित्सा विज्ञान के भरोसे नहीं जीती जा सकती, बल्कि जागरूकता, शोध, पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के समन्वय से ही प्रभावी समाधान संभव है।
शासकीय महाविद्यालय ढीमरखेड़ा द्वारा आयोजित यह संगोष्ठी न केवल अकादमिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रही, बल्कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सामाजिक जिम्मेदारी और स्वास्थ्य के प्रति सजगता विकसित करने की दिशा में एक प्रेरणादायी कदम सिद्ध हुई।



