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पुरुषों के दिल बैठे महिलाओं की बांछें खिली सामान्य महिला के लिए शापित है महापौर की कुर्सी

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पुरुषों के दिल बैठे महिलाओं की बांछें खिली

 

सामान्य महिला के लिए शापित है महापौर की कुर्सी

 

जनता द्वारा चुनी गई कोई भी महिला महापौर नहीं कर पाई पूरा कार्यकाल

 

किन्नर कमलाजान हिजड़ा द्वारा स्थापित पैरामीटर कोई नहीं छू पाया

 

महापौरी तो पति, पिता, भाई, बेटा ही करेगा

 

आरक्षण को न्यायालय में चुनौती दिए जाने की भी आशंका

 

नगरीय निकायों के चुनाव में वार्ड आरक्षण के बाद महापौर, अध्यक्ष के आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होते ही दावेदारों की धड़कनें तेज हो गई हैं ।

 

कटनी नगर निगम महापौर की सीट सामान्य महिला के खाते में जाते ही अन्य वर्ग में आरक्षित सीट होने की बाट जोह रहे नेताओं पर तो गाज गिरी ही मुख्यतः प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के सामान्य जाति के दिग्गजों की आशाओं पर भी तुषारापात हो गया ।

 

कटनी के नगर निगमीय चुनाव में यह तीसरा मौका है जब सामान्य महिला के लिए महापौर की कुर्सी आरक्षित हुई । पहली बार महापौर की कुर्सी पर निर्दलीय किन्नर कमलाजान हिजड़ा ने विराजमान होकर इतिहास रच दिया था । किन्नर कमलाजान हिजड़ा की जीत की ख़बर को बी बी सी लंदन ने प्रसारित कर कटनी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई थी ।

 

महापौर जैसे प्रतिष्ठित पद के लिए जनता द्वारा गाये – गाये ब्याही गई निर्दलीय प्रत्याशी किन्नर कमलाजान हिजड़ा भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस सहित किसी भी राजनीतिक के गले नहीं उतरी ।

 

इस चुनाव में शहर की जनता ने किन्नर को महापौर की कुर्सी सौंप कर न केवल राजनीतिक दलों, उनके नेताओं को उनकी औक़ात बता दी थी बल्कि उनके चेहरे पर कालिख़ भी पोत दी थी ।

 

यही कारण था कि अनपढ़ किन्नर कमलाजान हिजड़ा को राजनीतिक कुचक्र में लपेटकर न्यायालय के रास्ते चलता कर दिया गया था । मग़र जाते – जाते अपने अल्पकालिक कार्यकाल में भी किन्नर कमलाजान हिजड़ा ने नेताओं के लिए एक पैरामीटर स्थापित कर दिया था जिसे आज तक कोई भी महिला हो या पुरूष महापौर पार करना तो दूर छू भी नहीं पाया है ।

 

निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर महापौर के लिए चुनाव में उतरी किन्नर कमलाजान हिजड़ा ने भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशी श्रीमती अलका जैन (जो बाद में विधायक चुन कर राज्यमंत्री बनी थी) को भारी अंतर से पराजित किया था ।

 

चर्चा तो यहां तक थी कि किन्नर कमलाजान हिजड़ा को मिल रहे वोटों की संख्या ने कलेक्टर सहित भोपाल में बैठे मुख्यमंत्री तक की चूलें हिला दी थी और प्रशासन ने किन्नर कमलाजान हिजड़ा को हराने के लिए मतगणना में सारी अनैतिक ताक़त झोंक दी थी मग़र किन्नर कमलाजान हिजड़ा के पक्ष में मिल रही वोटों की सुनामी ने अंततः कलेक्टर को मजबूर कर दिया था कि वह किन्नर कमलाजान हिजड़ा को विजयी घोषित करे ।

 

दूसरी बार सामान्य महिला के लिए महापौर पद आरक्षित होने पर कांग्रेस प्रत्याशी श्रीमती निर्मला पाठक ने भारतीय जनता पार्टी द्वारा एक बार फिर प्रत्याशी बनाई गई श्रीमती अलका जैन को धूल चटाई ।

 

भोपाल में बैठी प्रदेश की भाजपाई सरकार के हाथों से दूसरी बार फिर महापौर की कुर्सी छिन जानी बर्दशते बाहर रही और एक बार फ़िर राजनीतिक कुचक्र में फंसा कर न्यायालयीन रास्ते से श्रीमती निर्मला पाठक को घर बैठा दिया गया ।

 

दोनों बार महापौर पद पर जनता द्वारा चुनी गईं सामान्य महिलाओं को भारतीय जनता पार्टी की पराजित प्रत्याशी श्रीमती अलका जैन ने न्यायालयीन रास्ते से घर बैठा दिया । दोनों बार उपचुनाव हुए ।

 

मतलब बहुत साफ़ है कि महापौर की कुर्सी दो बार आरक्षित होने पर दोनों बार जनता द्वारा चुनी गई सामान्य महिला अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाई ।

 

इसका मतलब यह भी निकाला जा सकता है कि सामान्य महिला के लिए महापौर की कुर्सी का आरक्षित होना शापित है । अब तीसरी बार फिर महापौर की कुर्सी आरक्षित हुई है अंजाम क्या होगा ख़ुदा जाने ।

 

चर्चा यह भी है कि वार्ड आरक्षण और महापौर आरक्षण को लेकर माननीय उच्च न्यायालय में चुनौती दी जा रही है !

 

बहरहाल प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के सामान्य पुरुष वर्ग के मठाधीशों ने अपनी पत्नी को चुनाव में उतारने की चौसर बिछाने की संभावनाएं तलाशनी शुरू कर दी है । सबने अपने – अपने गॉडफादर, गॉडमदर की चरणवंदना कर परिक्रमा लगानी भी शुरू कर दी है ।

 

ख़ासतौर पर प्रत्याशी चयन की सबसे ज़्यादा मारामारी रहने वाली है विधानसभा चुनाव में जनता द्वारा नकार दी गई भारतीय जनता पार्टी के अनैतिक तरीक़े से फ़िर सत्ता हथिया कर सरकार बनाने के कारण ।

 

विद्यार्थी परिषद से राजनीतिक सफ़र शुरू करने वाले वर्तमान प्रदेश भाजपा अध्यक्ष होने से विद्यार्थी परिषद के कतिपय लोगों ने भी अपनी पत्नी को टिकिट दिलाने की यात्रा शुरू कर दी है ।

 

गलियारों में चर्चा तो यह भी सुनाई दे रही है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कोटे से चुने गए निवर्तमान महापौर शशांक श्रीवास्तव भी एक बार फिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कोटे से अपनी पत्नी को चुनाव में उतारना चाहते हैं ।

 

भारतीय जनता पार्टी से विधायक रहे गिरिराज किशोर (राजू) पोद्दार ने तो सोशल मीडिया में अपनी पत्नी श्रीमती किरण पोद्दार को महापौर के संभावित उम्मीदवार का संकेत दे ही दिया है ।

 

वहीं कतिपय कांग्रेसियों द्वारा कांग्रेस की ओर से महापौर रह चुकी श्रीमती राजकुमारी जैन जो कि जिला कांग्रेस (शहर) मिथलेश जैन की पत्नी है का नाम उछाला जा रहा है । वैसे अभी तो सब कुछ भविष्य के गर्भ में है ।

 

हाँ इस बात में कोई दो राय नहीं है कि भारतीय जनता पार्टी हो या कांग्रेस या कोई अन्य पार्टी किसी भी दल के पास एक भी महिला ऐसी नहीं थी जिसने अपने वजूद पर राजनीति की हो और आज भी जो ख़ुद की बिना पर राजनीति कर सके ।

 

यह शास्वत सत्य है कि किसी भी पार्टी से महिला महापौर बने पर्दे के पीछे से महापौरी तो उसके पति, पिता, बेटा, भाई को ही करनी है ।

 

लेखक अश्वनी बड़गैंया, अधिवक्ता स्वतंत्र पत्रकार

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