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उत्सव धर्मिता ही हमारी माटी और देश की पहचानःडा.पाण्डेय @ रिपोर्टर सुभाष चंद्र पटेल प्रयागराज नैनी

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महोत्सव के चौथे दिन माटी के गीतों ने बांधी समां,सम्मानित हुए युवा कलाकार

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प्रयागराज करछना क्षेत्र के रामपुर में स्थित बृजमंगल सिंह इंटर कालेज में चल रहे 23वें जमुनापार महोत्सव के चौथे दिन युवा कलाकारों ने अपने माटी की महक विखेरते हुए खूब समां बांधी।मंच पर कलाकारों को सम्मानित करते हुए संयोजक डॉ. भगवत पाण्डेय ने कहा कि उत्सव धर्मिता ही हमारी माटी और देश की पहचान है।यही कलाकार हमारे समाज की थाती है जो अपने गीतों में संस्कार और लोक परंपरा को सहेजते हुए किसी के मोहताज न होकर खुद अपनी पहचान बनाते है।इस दौरान शैलेष कुमार विद्यार्थी,दीपू प्रजापति,अनुपम कोटार्य ने पचरा और चैयता गीतों पर खूब तालिया बटोरी तो वही सत्यवान कुमार ने जतसार और कृष्ण कुमार सत्यार्थी ने निरवही गीतों पर खूब समां बांधी।मोनू मस्ताना की पूरबी,प्रदीप निर्मल और अरविंद अकेला द्धारा सोहर गीत पर श्रोता भावुक हो उठे।मोहिनी श्रीवास्तव ने-रेलिया बैरन पियां को लिए जाए रे।प्रस्तुत कर तालियां बटोरी।दूसरे सत्र में ईश्वर के प्रति आस्था के मर्म को समझाते हुए स्वामी विनोदानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि-जाकी रही भावना जैसी,सोइ मूरति देखी तिन्ह तैसी।उन्होने ईश्वर प्राप्ति के लिए सत्संग और साधना को ही सरल उपाय बताया।आचार्य गोपाल कृष्ण त्रिपाठी ने कहा कि ईश्वर के कई रूप है जिसकी जिस तरह की भावना है उसी प्रकार प्राप्ति होती है।ईश्वर तो दयालू है वह साधना मात्र से सहज प्राप्त हो जाता है।इसके लिए एक गुरू की जरूरत होती है।मंच पर विद्यालय की छात्राओं ने गीतों में स्वच्छता,नारी सशक्तिकरण,गोरक्षा का संदेश दिया। प्रधानाचार्य मनीष तिवारी ने सभी के प्रति स्वागत आभार ज्ञापित किया।चौथे दिन के कार्यक्रम का संचालन कवि अशोक बेशरम और राजेन्द्र शुक्ल ने किया।

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