छत्तीसगढ़

कोरिया मनेन्द्रगढ़ शहर में मिलावटी दूध का कारोबार चल रहा है। शहर के 50 फीसदी से ज्यादा घरों में मिलावटी और अमानक दूध पहुंचाया जा रहा है।

राजेश सिन्हा कलयुग की कलम

कोरिया मनेन्द्रगढ़ शहर में मिलावटी दूध का कारोबार चल रहा है। शहर के 50 फीसदी से ज्यादा घरों में मिलावटी और अमानक दूध पहुंचाया जा रहा है। कहीं एसेंस और पाउडर से तैयार करके दूध सप्लाई किया जा रहा है तो कहीं पर मिलावट का खेल चल रहा है। इन सबके बीच अफसर भी मौन बनकर बैठे रहे। आश्चर्य की बात तो यह है कि यदा-कदा कभी दूध के सैंपल लिए भी जाते हैं तो इन सेंपलों में विभाग को एक भी अमानक और मिलावटी दूध नहीं मिलता है। सरकार की सख्ती के बाद भी अफसर मौन साधे हुए हैं। शहर में मिलावटी दूध का कारोबार इतना ज्यादा हावी है, कि लोगों के लिए असली और नकली दूध में पहचान करना काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। डेयरी संचालकों की मानें तो हर दिन सिर्फ शहर में हजारो लीटर दूध की खपत है। इसमें लगभग 60 प्रतिशत से अधिक दूध ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचता है। वहीं शेष दूध अन्य दुग्ध संयंत्रो से पहुंचता है। जिसे डेयरी संचालको द्वारा मिलावट करते हुए आसानी से महंगे दामों में घरों तक पहुंचा दिया जाता है।

एसेंस से बन रहा दूध, इस तरह करते हैं मिलावट

दूध व्यापारियों द्वारा अधिक मुनाफा के चक्कर में बाजार में बिकने वाले दूध में एसेंस के केमिकल का उपयोग किया जा रहा है। व्यापारियों द्वारा कम पैसे की लागत से अधिक मुनाफा के चक्कर से लोगो के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। 50 ग्राम एसेंस के पाउडर में मूंगफली और आरारोट का पाउडर मिलाकर दूध बनाया जा रहा है। सिंथेटिक दूध बनाने के लिए 100 ग्राम मूंगफली पाउडर और दोगुना अरारोट पाउडर सहित एसेंस के 50 ग्राम को मिलाकर लगभग 15 मिनट तक आग में पकाने के बाद दूध में मिला दिया जाता है। सूत्रों की मानें तो एक किलो दूध पाउडर से लगभग 15 लीटर दूध निर्मित किया जाता है। जिसे डेयरी और दुग्ध व्यापारियों द्वारा शहरभर में बेचा जा रहा है।

कोरिया से…..

राजेश सिन्हा की खास रिपोर्ट….

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