स्वतंत्र विचार

जिंदगी दो दिन की है? एक दिन आपके हक़ में!, एक दिन आपके खिलाफ,! *जिस दिन हक में हो गुरुर मत करना*?,  और जिस दिन खिलाफ हो, थोडा सा सब्र ज़रूर करना !

कलयुग की कलम

जिंदगी दो दिन की है?

एक दिन आपके हक़ में!, एक दिन आपके खिलाफ,!

जिस दिन हक में हो गुरुर मत करना?,

और जिस दिन खिलाफ हो, थोडा सा सब्र ज़रूर करना !

नही बनी अबकी बार ट्रम्प सरकार! भारत के सियासत मे भी बदलाव सियासी विरासत लालू पुत्र के हाथ में जाती हुई दिख रही है बिहार!——–

आजदुनियाँ के देशों के बदलते सियासी हालात के जज्बात भरे लम्हों मे किये जा रहे साहसिक फैसलो का वक्त हौसला के साथ मुस्करा कर ऐहतराम कर रहा है सलाम कर रहा है!

एक तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प जो दुनियाँ की महाशक्ति का ताज पहन कर बादशाहीयत कर रहे थे! आज बेआबरू होकर ह्वाईट हाऊस से बेदखल किये जा रहे है! कल का बादशाह आज अफवाहो में उङ गया! जहाँ से चला था वही पहुँच गया! यह साबित हो गया है कि दुनिया गोल है! सियासत में हर जगह गोलम गोल है!इसी लिये कहा गया है *शोहरत की बुलन्दी भी पल भर का तमाशा है*

जिस शाख पर बैठे हो वह टूट भी सकती है।

ट्रम्प का बेङा वहा की जागरूक जनता ने बेड़ा गर्क कर दिया है!

वहीं भारत में बर्तमान केन्द्र सरकार का फरमान लोगों को का जीवन नर्क कर दिया है।अन्दर ही अन्दर बदलाव की ज्वाला मुखी सुलग रही है! सबकी जुबान से अपशब्द भरी बोली निकल रही है! बिहार से बदलाव का मानसून तूफान बनकर लोकतन्त्र के जंगल में लगी आग पर जमकर बरस रहा है! सियासत के monsoonny बादल पूर्वी विक्षोभ के कारण तेज हवा के साथ यूपी की सियासी धरती पर निकट भविष्य मे जमकर तङक भङक चमक के साथ जम कर बरस सकते है! कुछ इलाको में हल्की से भारी बर्षात हो सकती है!बर्तमान ब्यवस्था को भारी नुकसान का सामना कर सकता है ! समय रहते हवा का रूख नही बदला! तो दिल्ली के सियासी किले पर भी इस सुनामी का भरपूर असर पङने की सम्भावना ब्यक्त किया जा रहा है बिश्लेषको का यह अनुमान है। बीजेपी सरकार कर दिया देश का बंटाधार!तुगलकी फरमान से पूरे देश मे मचा हुआ है हाहाकार!यह नारा आज बेचारा बनकर दुत्कारा जा रहा है

अबकी बार ट्रंप सरकार

भारत के लोकतांत्रिक ब्यवस्था मे आस्था रखने वालो ने एक बार फिर बिहार में एनडीए गठबन्धन को दिया है नकार ! किसानों पर चारों तरफ से बर्तमान सरकार का प्रहार! बिहार के चुनावी समर में किसानो की जबरदस्त एकता से एनङीए की हुयी है हार!ढपोरशंखी वादों की बुनियाद पर बनी भाजपा का अच्छे दिन का भरोशा! सबका साथ सबका विकास 15 लाख हर देश वासी को देने की पूरी नही कर सके काला धन ला ना सके काले धन के खाते वहीं पर बंद हो गए काला धन कहां गया क्या गगनचुंबी जिला स्तर पर बनते ऑफिस शो में वह पैसा लग गया आस! सब रह गया उधार! हर हफ्ते नया प्रोपेगेंडा! नया कानून दिखावटी देश भक्ति के जनून के कारण देश मे ला दिया बर्बादी का बहार !पश्चाताप के दावानल में झुलस रही देश की जनता आज आह भर रही क्यों! बनाई बीजेपी सरकार! नाकामियों के दौर से गुजर रही यह सरकार महंगाई बेरोजगारी तानाशाही मंदी की के समय भी गन्दी सियासत के खेल में देश को कर दिया बेकार! खून का आंसू रो रहा है देश का बेरोजगार बेगार! लोकतांत्रिक ब्यवस्था में सबसे बड़ा वोट के अधिकार से आज सियासतदार मालदार बन गया!और इसी को हथियार बनाकर जनता को उनके अधिकारो से बंचित करने का भयंकर कुचक्र रच कर कर रहें है हर क्षण वार! सत्ता के लिये जाति धर्म नफरत के जहरीले बीज को बोकर मानवता के बीच से इन्सानियत को हर मौके पर कर रहे तार तार! आपसी मेल मिलाप ! भाईचारगी! का बिलोपन हो गया समरसता का समापन हो गया ! आज का बदलता परिवेश अमन चैन तरक्की भाईचारगी की वापसी के लिए बदलाव की ईबारत लिखना शुरू कर दिया है क्रम वार!! जन जन की शुरू हो गयी है पुकार! सच्चाई को दुत्कार कर झूठ की ईबारत ने महारत हासिल कर लिया है बदलाव की बक्र दृष्टी उस पर रही है लगातार? भारतीय संस्कृति को स्थापित करने में मशगूल सियासत के मुखिया ने जो भूल की है वही समूल नाश का कारण बन गया है! विदेशी नीति मे सफलता के लिये भ्रमण के नाम पर देश की मुद्रा का अपब्यय सियासतदारो की सुबिधा के लिये देश वासीयो के हक नाजायज ब्यय! किसानो के हक हकूक पर कुठाराघात! बिश्वासघात ! से जनमानस कराह उठा है!आस्था हो गयी है लाचार! तानाशाही कानून के चलते जेल की सलाखों मे समय काट रहें है देश के तमाम पत्रकार! बर्बादी का दौर शुरू हो चुका है! अब नही काम कर पा रहा है मोदी मैजिक मोदी का चमत्कार! जिस तरह से वक्त सत्ता के नशे में चूर मगरूर सियासतदारो को सबक सिखा रहा है! वह आने वाले कल मे परिवर्तन का दे रहा है पुरस्कार! प्रकृति प्रदत्त नियम परिवर्तन है! सहयोग समर्थन समर्पण के दम पर सियासी सिंहासन पर पदस्थापित बेताज बादशाह के कारनामो ने सबके मन मे भर दिया है तिरस्कार! सियासत का चमकता सशक्त सूरज आज अस्त हो रहा है! कल क्या होगा यह तो कहना मुश्किल है ! लेकीन आगत का स्वागत करने की भारतीय परम्परा आज भी कायम है! आने वाले कल को श्रद्धा समर्ण के साथ कोटिश: सादर चरण स्पर्श

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏लेखक उत्तर कुमार शांडिल्य अध्यक्ष{ विश्व लेखक बिरादरी}

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