जम्मू कश्मीर

जम्मू कश्मीर अखनूर से कलयुग की कलम समाचार पत्रिका नेशनल ब्यूरो चीफ लेखक सुनील मिश्रा केशवदास मिश्रा द्वारा प्रकाशित पत्रकारिता पर कविता

कलयुग की कलम

जम्मू कश्मीर अखनूर से कलयुग की कलम समाचार पत्रिका नेशनल ब्यूरो चीफ लेखक सुनील मिश्रा केशवदास मिश्रा द्वारा प्रकाशित पत्रकारिता पर कविता

पत्रकारिता पत्रकारिता है कोई हुस्न की मंडी नहीं

यह त्याग बलिदान की राह है कोई धन कमाने की पगडंडी नहीं

पत्र-पत्रिकाओं से ज्यादा अब चेहरों का हुस्न पढ़ा जाता है

जिसे सच मैं लिखना तक नहीं आता वह पत्रकार कहा जाता है

अध्ययन अध्यापन से ज्यादा विज्ञापन की रहती चाहत है अब तो ऐसे पत्रकार हुए जिनसे भ्रष्टाचारियों को राहत है।

पत्रकार सच का दर्पण है प्राण जिसके कलम को समर्पण है समाज को जीवन करता अर्पण है जरूरत पड़े तो प्राण देकर पत्रकारिता करता दर्पण है।….

पत्रकारिता नहीं पक्षकार बन बैठे हैं कुछ हरामखोर पत्रकारिता को बदनाम कर बैठे हैं कलम के दलाल बन बैठे हैं ए भ्रष्टाचार के संरक्षक हैं राजनीति के अंगरक्षक हैं।

पत्रकारिता के विषधर तक्षक हैं लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के भक्षक हैं राज्य सत्ता के पुजारी हैं प्रशासन के ये मदारी हैं

भ्रष्टाचारियों की पत्र पतव्रता यह नारी है सच लिखना छोड़ बैठे हैं कलम को लालच मैं तोड़ बैठे हैं सत्य पुष्ठ मरोड कर बैठे हैं । यह हरामखोर बन बैठे हैं।

जम्मू कश्मीर अखनूर से कलयुग की कलम समाचार पत्रिका लेखक सुनील मिश्रा केशवदास मिश्रा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!
Close