प्रयागराज

निकिता जैसे केस की पुनरावृत्ति रोकने हेतु सरकार व प्रशासन का जागना जरूरी आर के पाण्डेय।

रिपोर्टर सुभाष चंद्र पटेल प्रयागराज नैनी

भ्रष्टाचारमुक्त व अपराधमुक्त भारत हेतु एसओ व लेखपाल की त्वरित जवाबदेही अनिवार्य।

 

कलयुग की कलम

प्रयागराज नैनी निकिता जैसे केस हेतु वरिष्ठ समाजसेवी अधिवक्ता आर के पाण्डेय ने सीधे केंद्र व राज्य सरकारों के साथ प्रशासन को जवाबदेह बताया है।

    जानकारी के अनुसार आज जारी सन्देश में पीडब्ल्यूएस प्रमुख आर के पाण्डेय एडवोकेट ने कहा कि देश में सिविल व आपराधिक मुकदमों का बढ़ना व भ्रष्टाचार एवं अपराध का घटित होना सीधे लेखपाल व एसओ की नाकामी या संलिप्तता होती है। उन्होंने तर्क दिया कि जब एक लेखपाल का दायित्व राजस्व अभिलेखों का रख रखाव व प्रति छः माह में जमीनों की रिपोर्टिंग है तो वर्षों से तालाब आदि सार्वजनिक जमीनों पर कब्जे कैसे हैं? व इसी तरह जब पीड़ित के थाने में जाते ही उसकी तहरीर पर एफआईआर लिखकर उसे निःशुल्क प्रति का ईमानदारी से पालन हो रहा है तो कोर्ट में 156(3) व 190 सीआरपीसी के मुकदमे कैसे बढ रहे हैं? निकिता केस में भी यह पाया गया कि उसके पूर्व शिकायत पर स्थानीय पुलिस ने कोई संज्ञान नही लिया अन्यथा निकिता की जान बच सकती थी। आर के पाण्डेय ने कहा कि यह निहायत ही शर्मनाक व निंदनीय है कि आजादी के 73 वर्षों बाद भी देश में जातिवादी व मजहबी वोट बैंक की गंदी शर्मनाक राजनीति चल रही है जिसका प्रमाण हाथरस केस, निकिता केस, मेवात प्रकरण, सुशांत केस, निठारी कांड, निर्भया प्रकरण, आशाराम केस व कश्मीरी पंडितों आदि के मामलों में देश के राजनैतिक दलों, सामाजिक संगठनों व तथाकथित बुद्धिजीवियों का एकमत न होना व अपनी सुविधानुसार विचार व कार्यवाही तय करना है। सबसे बड़ा दुखद तो यह है कि स्वयं जवाबदेह सरकार व प्रशासन समभाव से कार्य नही करते। आर के पाण्डेय एडवोकेट ने पूछा कि यदि वास्तव में केंद्र व राज्य सरकारें तथा पुलिस प्रशासन ईमानदार हैं तो निकिता जैसे केस कैसे हो गए? उनका कहना है कि अब समय आ गया है कि जहां पर भी जमीन कब्जे व आपराधिक वारदात हों तथा उसमें यह प्रकरण सामने आए कि पीड़ित की शिकायत पर त्वरित कार्यवाही नही हुई वहां सीधे लेखपाल व एसओ को बर्खास्त करके उनकी जवाबदेही सुनिश्चित की जाए तो अवश्य शत प्रतिशत सफलता मिलेगी अन्यथा 73 क्या 730 सालों में भी अपराधों पर नियंत्रण दिवास्वप्न ही होगा।

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