मध्यप्रदेश

जिला जनसंपर्क कार्यालय उमरिया  ऐतिहासिक कहानी

विनीत कुमार जायसवाल ब्यूरो चीफ कलयुग की कलम राष्ट्रीय समाचार पत्रिका न्यूज़ वेबसाइट उमरिया

 

दसवी सदी की कल्चुरी कालीन पत्थर से निर्मित है मां विरासिनी का स्वरूप

 

उमरिया 24 अक्टूबर – बिरासिनी मंदिर में आदिशक्ति स्वरूपा बिरासिनी माता की 10 वीं सदी की कल्चुरी कालीन काले पत्थर से निर्मित भव्य मूर्ति विराजमान है । यह पूरे भारत में माता काली की उन गिनी चुनी प्रतिमाओं में से एक है जिसमें माता की जिव्हा ( जीभ) बाहर नहीं है । मंदिर के गर्भ गृह में माता के पास ही भगवान् हरिहर बिराजमान हैं जो आधे भगवान् शिव और आधे भगवान् विष्णु के रूप हैं । मंदिर के गर्भ गृह के चारो तरफ अन्य देवी देवताओं की मूर्तियाँ स्थापित हैं । मंदिर परिसर में राधा-कृष्ण , मरही माता, भगवान् जगन्नाथ और शनिदेव के छोटे-छोटे मंदिर भी स्थित हैं । मंदिर सफेद संगमरमर से निर्मित है । माता की अलौकिक शक्तियों के कारण लोगों की मनोकामनाएं हमेशा पूरी होती हैं और यहां साल भर लोगों की भीड़ रहती है ।

मान्यतानुसार बिरासिनी माता ने सैंकड़ों वर्ष पूर्व पाली निवासी धौकल नामक व्यक्ति को सपना दिया कि उनकी मूर्ति एक खेत में है जिसे लाकर नगर में स्थापित करो । धौकल नामक व्यक्ति ने मूर्ति लाकर एक छोटी सी मढिया बनाकर माता को बिराजमान कराया । बाद में नगर के राजा बीरसिंह ने एक मंदिर का निर्माण कराकर माता की स्थापना की ।

 

बीरसिंहपुर पाली बिरासिनी माता के प्राचीन मंदिर का पुनर्निर्माण का प्रारंभ जगतगुरु शंकराचार्य द्वारका शारदा पीठाधीश्वर स्वामी श्री स्वरूपानन्द सरस्वती जी के पावन करकमलों द्वारा माघ शीर्ष कृष्ण पक्ष गुरुवार विक्रम संवत २०४६ ( दिनांक 23 नवम्बर 1989 ) को किया गया और बीरसिंहपुर कालरी ध्ैम्ब्स्ध्सभी दानदाताओं के सहयोग से लगभग सत्ताईस लाख रूपये में माता के संगमरमर के भव्य मंदिर पूर्ण हुआ द्य मंदिर का वास्तुचित्र , वास्तुकार श्री विनायक हरिदास छठब्ब् नई दिल्ली द्वारा निशुल्क प्रदान किया गया द्य बिरासिनी माता देवी मंदिर का जीर्णोद्धार का समापन कार्यक्रम , पुनः प्राण प्रतिष्ठा, कलश शिखर प्रतिष्ठा गुरूवार वैशाख शुक्र सप्तमी संवत् २०५६ (22 अप्रेल 1999 ) जगतगुरु शंकराचार्य पुरी पीठाधीश्वर स्वामी श्री निश्चलानंद सरस्वती जी के शुभाशीष से संपन्न हुआ।

प्रस्तुतकर्ता  गजेद्र द्विवेदी

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