उत्तरप्रदेश

मिशन शक्ति की सफलता हेतु प्रधान पतियों व थानाध्यक्षों पर नकेल जरूरी

सुभाष चंद्र पटेल रिपोर्टर नैनी प्रयागराज

महिलाओं के नाम पर राजनीति बन्द हो।

महिला अपराधों पर त्वरित एफआईआर न करने वाले एसओ बर्खास्त हों।

 

 प्रयागराज नैनी नौ दिन चले अढ़ाई कोस की कहावत चरितार्थ करते 73 वर्षीय भारतीय लोकतंत्र में आज मिशन शक्ति की जरूरत है जबकि सृष्टि के निर्माण से आज तक सदैव महिलाएं आगे ही रही हैं।

उपरोक्त बातें मीडिया वार्ता में करते हुए पीडब्ल्यूएस प्रमुख आर के पाण्डेय एडवोकेट ने कहा कि यदि विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका व समाज के लोग वाकई मिशन शक्ति को सफल बनाना चाहते हैं तो उन्हें फोटोबाजी, भाषणबाजी व मीडीयाबाजी के बजाय वास्तविक धरातल पर कार्य करना ही होगा अन्यथा 73 वर्षीय लोकतांत्रिक व्यवस्था की तरह 730 सालों में भी कुछ नही होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि सृष्टि के निर्माण व प्रारम्भ से दुर्गा, काली, लक्ष्मी, सरस्वती, शतरूपा, सीता, गार्गी, सुभद्रा, लक्ष्मीबाई, इंदिरा, आशा भोंसले, उषा मंगेशकर, लता मंगेशकर, करणा राणावत, वसुंधरा राजे आदि अनगिनत सफल महान नारी शक्ति के देश में मिशन शक्ति की जरूरत ही क्यों पड़ी? अब वक्त आ गया है कि विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका व समाज के लोग खुद में विचार करें कि त्रुटि कहाँ है व कैसे सुधार हो? वरिष्ठ समाजसेवी आर के पाण्डेय एडवोकेट ने पूछा कि प्रधान पति किस कानून के तहत प्रयुक्त शब्द है व महिला अपराधों के तमाम मामलों में एसओ द्वारा एफआईआर न लिखने पर मा0 अदालतों में 156(3) व 190 सीआरपीसी के मुकदमें क्यों बढ़ रहे हैं? उनका यह भी सवाल है कि महिला सीट पर महिला के नाम पर चुनाव जीतकर प्रधान पति व प्रतिनिधि कैसे कार्य कर सकते हैं? चुनाव जीतकर आयी महिला प्रधान आदि स्वयं कार्य क्यों नही करती हैं? आर के पाण्डेय का सुझाव है कि महिला अपराधों पर तत्काल एफआईआर न करने वाले एसओ को तत्काल बर्खास्त करने व प्रधान पतियों पर नकेल कसने से ही मिशन शक्ति जैसे कार्यक्रम सफल होंगे।

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