छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ खेल विकास प्राधिकरण द्वारा राज्य के पारंपरिक खेलों का दस्तावेजी करण हो – सतीश उपाध्याय

राजेश सिन्हा कलयुग की कलम राष्ट्रीय समाचार पत्रिका न्यूज़ वेबसाइट कोरिया छत्तीसगढ़

कम्प्यूटर एवं लैपटॉप के युग में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खेलों पर गर्द जम गई है, लोग इसको भूलते जा रहे हैं। यह खुशी की बात है कि छत्तीसगढ़ के माननीय मुख्यमंत्री ने इस पर संज्ञान लिया है एवं विलुप्त होते छत्तीसगढ़ खेलों को सामने लाने की बात कही है। छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खेलों में गेडी, भंवरा, फुगड़ी पिट्टुल आदि को भी प्रोत्साहित करना चाहिए ।

छत्तीसगढ़ के माननीय मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ खेल विकास प्राधिकरण का भी गठन किया गया है जिसका उद्देश्य है खिलाड़ियों को अत्याधुनिक खेल सुविधाओं एवं प्रशिक्षण के साथ पारंपरिक खेलों को सामने लाना है ।

छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खेलों में यहां की सभ्यता एवं संस्कृति के भी पुट होते हैं। समय के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में खेले जाने वाले बहुत सारे पारंपरिक खेल अब विलुप्त होते जा रहे हैं, ऐसे खेलों को प्रोत्साहित कर खिलाड़ियों की प्रोत्साहित किया जाना चाहिए एवं ग्रामीण परिवेश में खेले जाने वाले विलुप्त होते खेलों का भी संरक्षण किया जाना चाहिए। छत्तीसगढ़ खेल प्राधिकरण में दो सांसदों ,पांच विधायकों और दो उत्कृष्ट खिलाड़ियों का भी मनोनयन कर दिया गया है ।इसमे दो मत नहीं प्रदेश में हाकी , तीरंदाजी ,एथलेटिक्स, क्रिकेट, स्विमिंग ,आर्चरी इनडोर गेम, मार्शल आर्ट फुटबॉल ,बास्केटबॉल ,टेबल टेनिस ,कबड्डी व खो-खो आदि खेलो का तो संचालन होता ही रहता है मगर पारंपरिक खेल छूट जाते हैं । छत्तीसगढ़ शासन को मेरा सुझाव है कि न इन खेलों के अतिरिक्त छत्तीसगढ़ की विलुप्त होती खेलों के संबंध में जानकारी प्रदेश स्तर पर आमंत्रित किया जाए। अभी भी बहुत सारे ऐसे पारंपरिक खेलों के जानकार है जो छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खेलों को विलुप्त होने से बचा सकते हैं। इसका दस्तावेजी करण होना चाहिए ताकि हम आने वाली पीढ़ी को छत्तीसगढ़ की माटी से जुड़े, यहां की सभ्यता और संस्कृति खेलो से परिचित करा सके,एवं आने वाली पीढ़ी को पारंपरिक खेलों को अवगत करा सकें ।इस दिशा में छत्तीसगढ़ खेल प्राधिकरण कुछ बेहतर कर सकता है। कुछ दिनों पूर्व छत्तीसगढ़ में सीएसआर से राज्य में अत्याधुनिक खेल अकादमी के गठन की बात की गई थी इन अकादमियो के लिए स्टेडियम के चयन का दायित्व एवं खिलाड़ियों के चयन का दायित्व मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित प्राधिकरण की कार्य समिति को सौंपा गया था। अब समय है कि खैल विकास प्राधिकरण के लिए गठित गवर्निंग बॉडी इस दशा में कुछ पहल करें ,ताकि छत्तीसगढ़ से विलुप्त होती पारंपरिक खेलों को भी बचाया जा सके

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