छत्तीसगढ़

स्कूल भवन आज भी अधूरा, बच्चे अधूरे स्कूल भवन में पढ़ने को मजबूर सरपंच द्वारा निकाल लिए गए पूरे पैसे, प्रधानाध्यापक ने की शिकायत

राजेश सिन्हा कलयुग की कलम कोरिया

कोरिया जिला के विकासखंड भरतपुर के ग्राम पंचायत डोगरीटोला में स्कूल भवन पूर्व पंचायत चाटी की सरपंच नेमा बाई के द्वारा बनवाया तो गया मगर उस स्कूल भवन को पूर्ण रूप से अधूरा छोड़ दिया गया,भवन का ना सही तरह से पुताई कराई गई है और ना ही स्कूल भवन में बिजली फिटिंग का काम करवाया गया और ना ही स्कूल में लिखाई का कार्य कराया गया भवन की सभी खिड़कियां पूरी तरह जाम है।दरवाजे व खिड़कियों की पेंटिंग का कार्य भी नहीं कराया गया है, जिसमें की जंग लग चुके हैं और बरसात में छत का पानी कमरे में ही आता है जो शाला संचालक के योग्य नहीं है फर्श भी फटने की स्थिति में है।

हम आपको बता दें कि कार्यालय प्रधानाध्यापक प्राथमिक शाला डोगरीटोला संकुल केंद्र चांटी विकासखंड भरतपुर जिला कोरिया छत्तीसगढ़ के द्वारा अनुविभागीय दंडाधिकारी तहसील भरतपुर और मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत भरतपुर को लिखित शिकायत की गई है कि जो स्कूल भवन सरपंच के द्वारा बनवाया गया वह भवन बच्चों के पढ़ने लायक नहीं है। आवेदन में बताया गया है कि ग्राम पंचायत चाटी की सरपंच नेमा बाई के द्वारा शाला भवन का निर्माण कराया गया है जिसमें भी ऊंचाई से दीवार खड़ी नहीं कराई गई है, जिसमें सीडी या रैंप बनवाया जा सके ताकि बच्चे पैर साफ करके शाला के अंदर आए और दरवाजा और दीवाल की पुताई भी नहीं करवाई गई है ना किसी प्रकार का नाम लिखा गया है और ना ही शाला मद का नाम लिखा गया है ना बिजली फिटिंग करवाई गई है तेज बारिश आने से सीधे कक्ष में पानी आने की संभावना रहती है,बारिश होने पर कक्ष में पानी आता है जिसकी सूचना पंचायत को लिखित रूप से भी की गई है।कई बार मौखिक रूप से सरपंच महोदया से कहने पर कि वहां पुताई व नाम लिखाई कराई जाए और लिखित रूप में भवन को शाला के स्कूल प्रभारी को सौंपा जाए तब सरपंच महोदय के पति के द्वारा साफ कहा गया कि मैं कुछ नहीं करवाऊगा और नवीन भवन का ताला तोड़कर सरपंच पति के द्वारा बोला गया कि स्कूल यहां लगाइए। जो कि आज भी अपूर्ण है।

 

 

मगर आज 11 महीने बीत जाने के बावजूद भी स्कूल भवन निर्माण कार्य पूर्ण नहीं करवाया गया जो अंदर से देखने में पाठशाला दिखाई ही नहीं देता है जिसकी शिकायत भी प्रधानाध्यापक ने स्वयं जनकपुर के अधिकारियों से की मगर आज भी स्कूल भवन निर्माण अधूरा का अधूरा ही पड़ा है। जो दर्शाता है कि इस स्कूल भवन निर्माण में कई प्रकार की कोताही बरती गई और कागजों में ही निर्माण कार्य पूर्ण दिखाकर पूरे पैसे आहरण कर लिए गए, शिकायत के बावजूद भी नहीं हुई कोई कार्यवाही। एक प्रधानाध्यापक बच्चों के हित की बात करता तो है मगर उसी विभाग के उच्च अधिकारियों के द्वारा बच्चों की हित की बातों को अनसुना का किया जा रहा है जो दर्शाता है कि भ्रष्टाचार किस चरम सीमा पर पहुंच चुका है।

कोरिया-राजेश सिन्हा कलयुग की कलम

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