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औपचारिकता

सुधीर श्रीवास्तव गोण्डा, उ.प्र.8115285921

नवरात्रों में

माँ का दरबार सजेगा,

माँ के नवरूपों की पूजा होगी,

धूपदीप आरती होगी

हर ओर नया उल्लास होगा।

चारों ओर माँ के जयकारे गूँजेंगे

माँ की चौकियां सजेंगी

जागरण भी होंगे,

माँको मनाने के सबके

अपने अपने भाव होंगे।

मगर इन सबके बीच भी

बेटियों पर अत्याचार होंगें

उनकी अस्मत लूटी जायेगी

उनकीलाचारी की कहानी

फिर हमें धिक्कारेगी।

हम फिर मोमबत्तियां जलायेंगे

संवेदना के भाव दर्शाएंगे,

पर कुछ करने का भाव

दृढ़ प्रतिज्ञ होकर नहीं दिखायेंगे।

नवरात्रों में बेटियों को पूजेंगे,

चरणपखारेंगे,माथे लगाएंगे,

टीकाकरेंगे, माला पहनाएंगे

आशीर्वाद की लालसा में

झोलियाँ फैलाएंगे,

अगले वर्ष का आमंत्रण भी

आज ही पकड़ायेंगे।

देवी माँ खूब रिझायेंगे

मगर ये सब करके भी हम

बेटी बहन की सुरक्षा, स्वाभिमान का

बस!संकल्प नहीं कर पायेंगे,

देवी माँ का पूजन करने की

हर बार की तरह इस बार भी

मात्र औपचारिकता निभायेंगे।

आपनी तसल्ली के लिए बस

देवी माँ के चरणों में हाजिरी लगायेंगे

जय माता दी जय माता दी को

शोर बस गुँजाएंगे।

सुधीर श्रीवास्तव गोण्डा, उ.प्र.8115285921

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