छत्तीसगढ़

मत बांधो पैरों में बंधन -अंतरिक्ष को चली लड़कियां

राजेश सिन्हा संवाददाता कलयुग की कलम कोरिया

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर यूनिसेफ ने लड़कियों के लिए एक वार्षिक अभियान शुरू किया है वष 2020 का विषय है *मेरी आवाज- हमारा भविष्य* ताकि वे अपनी आवाज बुलंद कर सके और अपने अधिकारों को पहचान कर अपने हक के लिए खड़ी हो सके यूनीसेफ ने लड़कियों के लिए एक वार्षिक अभियान शुरू किया है ,ताकि वे अपनी आवाज बुलंद कर सकें ,और अपने अधिकारों को पहचान कर अपने हक के लिए खड़ी हो सके वर्ष 2020 का विषय है -“मेरी आवाज- हमारा भविष्य”। दुनिया भर में यूनिसेफ द्वारा-किशोरियों को एक सशक्त मंच देकर उनके विचारों को ,उनके आत्मविश्वास को प्रोत्साहित किया जा रहा है । किसी परिवेश में आयोजित परिचर्चा में प्रतिभागियों से उनके विचार को साझा करने के लिए कुछ प्रश्न पूछे गए ।- क्या आप अपने वर्तमान से संतुष्ट हैं? कुछ नया करने के लिए आपका मन क्या कहता है? आपके भविष्य के सपने क्या है? उसको पूरा करने में आपकी भूमिका क्या है? आपके द्वारा देखे गए सपने भविष्य मे कितने सक्षम होंगे? जो आपने सोचा है उसको पूरा करने में आप क्या प्रयास कर रही हैं? प्रस्तुत है -यूनिसेफ के इस अभियान के तहत चुनिंदा बालिकाओं के विचार  परिचर्चा के आयोजक हैं- अंचल के सुप्रसिद्ध साहित्यकार एवं राष्ट्रीय हरित वाहिनी से जुड़े पर्यावरणविद सतीश उपाध्याय मनेंद्रगढ़ संपर्क नंबर 93000 91563 चिरमिरी निवासी एवं राष्ट्रीय कृषि महाविद्यालय रायपुर कीट विज्ञान की स्नातकोत्तर कृषि छात्रा -शेख अलिशा ,देश के जाने-माने साहित्यकार – गिरीश पंकज की इन पंक्तियों के साथ अपने विचारों को साझा किया  -“सुंदर कोमल कली लड़कियां होती अक्सर भली लड़कियां मत बांधो पैरों में बंधन अंतरिक्ष को चली लड़कियां कितना अच्छा मन रखती हैं जो मिश्री की डली लड़कियां-” सोशल मीडिया एवं विभिन्न सांस्कृतिक साहित्यिक कार्यक्रमों में सक्रिय चिरमिरी निवासी-अलिशा का कहना है’- बेटी ईश्वर की अनुकंपा है, बेटी तो सृष्टि का मूल आधार है। बेटी सबकी पालनहार है। बेटियों के विचार सिर्फ उनके नहीं होते बल्कि उनके परिवार उनके समाज के होते हैं हमारे सामने आज न जाने कितने ऐसे उदाहरण हैं जो यह सिद्ध करते हैं कि बेटियां, बेटो से कम नहीं है। 11 अक्टूबर को हर वर्ष अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के रुप में मनाया जाता है और जब बात ‘लैंगिक समानता की आती है तो हम पाते हैं कि आज भी लड़कियों को अपने हक के लिए संघर्ष ।करना पड़ रहा है । शेख अलिशा का कहना है कि कई योजनाएं चलाई गई- बेटी पढ़ाओ ,बेटी बचाओ ,कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, लाडली लक्ष्मी योजना, धनलक्ष्मी, किशोरी शक्ति योजना ,सुकन्या समृद्धि योजना पर सवाल अभी यहीं है क्या वाकई में इन योजनाओं का लाभ लड़कियों को मिल रहा है? इस वैज्ञानिक ,युग जब शिशु के जांच के अल्ट्रासाउंड का उपयोग किया जाने लगा तो लैंगिक समानता कहां रह गई? हमारे देश में इसका आज भी चोरी छुपे गलत इस्तेमाल किया जा रहा है ।लिंग परीक्षण से लड़कियों की मृत्यु दर बढ़ने लगी है। वही कुछ गरीब परिवार के लोग पैसे की चाहत में अपनी लड़कियों को बेच देते हैं । कहीं छोटी बच्चियां भी गलत मानसिकता वालो से भी नहीं बच पाती । प्रत्येक लड़कियों के विचारों मे कुछ कर गुजरने की लालसा देखने को मिलती है, । अलिशा का कहना है कि लड़कियों को कभी खुद को कम नहीं आंकना चाहिए । पूरे विश्वास और बुलंदी के साथ जिन लड़कियों ने कदम को आगे बढ़ाया उन्होंने सफलता ही पाई है। चिरमिरी कोरिया की अर्पना खटकर जो,बारहवी की छात्रा है।इनका कहना है कि- मेरी यह खासियत है कि मैं हमेशा सकारात्मक विश्वास से परिपूर्ण रही हूं ।मेरी रुचि विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों मे है। वे कहती है कि-शास्त्रीय नृत्य में मैने क्षेत्रीय, राज्य स्तरीय और राष्ट्रीय स्तर की पहचान बनाई है और वॉलीबॉल खेल में भी क्षेत्रीय स्तर पर स्थान अर्जित किया है। पर लड़की होने के कारण संकीर्ण सोच की वजह से खेल के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर में आगे नहीं जा सकी । मैं अपने वर्तमान से खुश तो हूं पर संतुष्ट नहीं ।मुझे ताइक्वांडो और कराटे सीखने की इच्छा है पर हमारे छोटे से क्षेत्र में लड़कियों के लिए ऐसी कोई सुविधा यहाँ नहीं है जबकि यह चीज है जो लड़कियों को सशक्त बना सकती हैं ।अपना बचाव स्वयं करना सीख सकती हैं। चिरमिरी मालवीय नगर निवासी अर्पना खटकर कहती हैं कि -अपने दृढ़ संकल्प एवं इच्छा- शक्ति से मैं एक दिन अपना मुकाम जरूर हासिल करूंगी और मेरा भविष्य हरा भरा होगा ऐसा मुझे विश्वास है। पोडी कोरिया की पल्लवी सरकार इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ से संगीत में एम ए किया है। उनका कथन है कि मुझे संगीत में बहुत रुचि है और मैं इस क्षेत्र में काफी आगे जाना चाहती हूं ।मैं वर्तमान की स्थिति से संतुष्ट नहीं हूं हमारे कोरिया जिले में संगीत विश्वविद्यालय नहीं है ना कोई अनुभवी संगीत विशेषज्ञ है इसकी कोई व्यवस्था नहीं है जिस वजह से मुझे काफी परेशानी होती है। मैं चाहती हूं कि हमारे जिले में भी कला संगीत विद्यालय खुले जिससे हमारे जिले के प्रतिभावान गायक लड़कियों को भी कला के क्षेत्र में अपना हुनर दिखाने का मौका मिले ।महिलाओं की आत्म निर्भरता के संबंध में पल्लवी कहती हैं कि -मैंने भविष्य के लिए जो सपना देखा वह मेरे पिता ने मेरे लिए देखा था ,जो अब इस दुनिया में नहीं है और उस सपने को पूरा करने के लिए मै सारी कठिनाइयों को पार करके आगे बढ़ने में लगी हूं ।लड़की होने के बावजूद मेरे घर वालों ने मुझे संगीत क्षेत्र में जाने की सहमति दी, शायद यही वजह है कि उतार-चढ़ाव भरे रास्ते में भी मैं निडर होकर आगे बढ़ती गई। मैंने हसदेव आइडियल जीता । कई संगीत के सम्मानित मंचों में सम्मानित हुई ।कई पुरस्कार अर्जित किए और आज मुझे कई संगीत से जुड़े कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाता है ।मेरा मानना यह है कि लड़कियों को घर परिवार वाले जब समर्थन देंगे तभी वह आगे बढ़ सकेगी। चिरमिरी जीएम काम प्लेस रहने वाली लीना धवल जो अभी 11वीं की छात्रा है का कहना हैकि -मुझे नई चीजों को जानने और सीखने की इच्छा हमेशा रहती है, साथ ही मुझे स्विमिंग करना और कार चलाने में भी रुचि है ।मुझे डॉक्टर बनना है जिसके लिए मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रही हूं मैं और मेरे जीवन का यही एक सपना भी है। पढ़ाई के अलावा मुझे तैराकी करना पसंद है । मैं जिस क्षेत्र में ही रहती हूं वहां समाज के नजरों में लड़कियों को तैराकी करता देख हमेशा बंदिश लगाई जाती है । पर मेरे परिवार वाले मेरा हमेशा साथ देते हैं यही वजह है कि समाज की बातों को अनसुना कर मैं तैराकी मैं धीरे-धीरे पूरी तरीके से पारंगत होती जा रही हू, और आज कड़ी मेहनत और मेरे माता पिता के समर्थन से मैं आज मैं आगे बढ़ने की हिम्मत जुटा सकी हू । मेरा लक्ष्य है डॉक्टर बनना ।जिसकी मै पूरी तैयारी कर रही हूं ।भविष्य मे जरूरतमंद रोगियों को अच्छी चिकित्सा देना चाहती हूं और लड़कियों को भी प्रेरणा देना चाहती हूं। गोदरी पारा कोरिया की अनिशा कुरैशी जो अभी कक्षा बारहवीं की होनहार छात्रा है। इनका कहना है कि -मेरे अंदर मेरे विचारों को लोगों तक पहुंचाने की कला है और इसी वजह से मैं अपने विद्यालय में तरह-तरह के विषय पर भाषण देती हूं । मैं अपने वर्तमान से संतुष्ट नहीं हो क्योंकि लड़कियों की बात कोई सुनना नहीं चाहता भले ही मार्मिक विषय पर कुछ कहे। मैं निरंतर अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मेहनत कर रही हूं अपने लक्ष्य को पाने के लिए हर परेशानियों को नकार कर आगे बढ़ने की कोशिश में लगी हुई हूं । हमारे समाज की मानसिकता ऐसी है कि लड़कों से सवाल नहीं पूछे जाते लड़कियों पर बेवजह शक कर सौ- सौ सवाल पूछे जाते हैं। मुझे उस मुकाम तक पहुंचना है जहां से हर सवाल का जवाब मांगने से पहले मेरी काबिलियत को समाज देखें ।मैं अपने विद्यालय में भी नेतृत्व करती हूं । मेरा लक्ष्य डॉक्टर बनने का जिसे मैं एक दिन हासिल करूंगी इसके लिए मैं कड़ी मेहनत कर रही हूं । सृष्टि उपाध्याय जो मास कम्युनिकेशन से स्नातक है ।पुणे महाराष्ट्र से स्नातकोत्तर डिग्री कर रही हैं ।कोरोना संक्रमण काल के कारण अपने निवास मनेंद्रगढ़ वापस आई है- जर्मन की -व्युर्थ बिजनेस सर्विस की मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव है। फेसबुक में “सृष्टो- सिटी” से अपने पहचान बनाने वाली मनेंद्रगढ़ निवासी सृष्टि उपाध्याय का कहना है जब आप बुलंद हौसले से अपने सपने को साकार करने लगते हैं तो सृष्टि की पूरी कायनात भी आपकी मदद करने के लिए आपके सामने आ जाती है। सृष्टि का कहना है कि वर्तमान से संतुष्ट होने का मतलब है विकास को अवरुद्ध कर देना । मैं वर्तमान में अभी जिस जर्मनी की कंपनी में काम कर रही हूं वह विश्व की जानी मानी बिजनेस एवं मार्केटिंग की संस्था है भविष्य में इससे बेहतर कंपनी मुझको स्वयं आमंत्रित करें मैं अपने में इतनी योग्यता लाना चाहतीहू। जर्मनी की मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव सृष्टि उपाध्याय अभी अच्छे रिकॉर्ड के लिए प्रतिदिन आन लाईन निरंतर 12 घंटे काम कर रही हैं। रेशमा बानो कीट विज्ञान में स्नातकोत्तर प्रथम वर्ष की छात्रा है रेशमा का कहना है कि जो सच्चे दिल से परिश्रम करता है और अपने सपने पूरा करने के लिए लक्ष्य का लगातार पीछा करता है उसे 1 दिन निश्चित रूप से सफलता मिलती है कृषि क्षेत्र में रुचि रखने वाली रेशमा बानो आगे चलकर कृषि अनुसंधान क्षेत्र में कुछ बेहतर करने का मन बना चुकी उनका कहना है यदि परिस्थिति अनुकूल हुई तू कृषि क्षेत्र में अनुभव एवं कार्य मैं अपना विशेष नाम एवं ख्याति अर्जित करना चाहती हू।

राजेश सिन्हा संवाददाता कलयुग की कलम कोरिया

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