उत्तरप्रदेश

मन्दिर के पुजारी के हत्यारे को फांसी के साथ पुजारी के परिवार को सरकारी नौकरी, सुरक्षा व एक करोड़ रु0 मुआवजा दे सरकार समाजसेवी आर के पाण्डेय।

सुभाष चंद्र पटेल रिपोर्टर नैनी प्रयागराज

जातिवादी सरकारी व्यवस्था से बढ़ रहा असमानता व असन्तोष।

सवर्णोंका बढ़ता आक्रोश पड़ेगा राजनीति पर भारी।

 

नैनी, प्रयागराज, 10 अक्टूबर 2020। राजस्थान के करौली में दलितों द्वारा सवर्ण पुजारी को जिंदा जलाकर मार दिया जाना एक भयावह घटना है जोकि राजनैतिक वोट बैंक के चक्कर मे जातिवादी व्यवस्था के बढ़ावा का परिणाम है। आजकल आये दिन सवर्णों पर दलितों द्वारा किये जा रहे अत्याचार व उत्पीड़न को तत्काल न रोका गया तो देश में बहुत बड़ी अराजकता का माहौल बन सकता है।
आज मीडिया से वार्ता में उपरोक्त विचार रखते हुए समाजसेवी अधिवक्ता आर के पाण्डेय ने राजस्थान व केंद्र सरकार से तुरन्त हस्तक्षेप करते हुए मांग की कि सवर्ण पुजारी के हत्यारों को फांसी दी जाए व पुजारी के परिवार को सरकारी नौकरी, रु0 एक करोड़ बतौर मुआवजा के साथ सरकारी सुरक्षा भी प्रदान की जाए।
बता दें कि 73 वर्षों के लोकतांत्रिक आजादी के बावजूद भारत मे जातिवादी वोट बैंक के चक्कर मे जारी जातिगत आरक्षण व एससी एसटी ऐक्ट से सवर्ण वर्ग बुरी तरह प्रभावित है। एक तरफ अत्यधिक प्रतिभाव योग्य सवर्ण सरकारी नौकरी से वंचित हो रहे हैं जबकि बेहद कम अंक के बावजूद मात्र जातिगत आरक्षण के चलते कुछ विशेष जाति के लोगों को एक तरह से जबरन सरकारी नौकरी दी जा रही हैं वही एससी एसटी ऐक्ट के बढ़ते दुरुपुयोग व फर्जी मुकदमों से सवर्ण स्वयं को देश मे बेहद असुरक्षित महसूस कर रहा है। विगत कुछ समय से बेहद खतरनाक स्थिति देश मे बनती जा रही है। देश के कई हिस्सों में दबंग दलितों व उनके संगठनों द्वारा सवर्णों पर बढ़ते अत्याचार, हत्याओं, ब्राह्मणों का जनेऊ तक तोड़ने, जबरन पेशाब पिलाने तक की घटनाएं आ ही रही थीं कि इसी बीच राजस्थान के करौली में दलितों द्वारा एक सवर्ण पुजारी को जलाकर मार देने से पूरे देश के सवर्ण बेहद आक्रोशित हैं।
इसबावत आर के पाण्डेय एडवोकेट ने विधायिका, कार्यपालिका व न्यायपालिका में बैठे लोगों तथा सामाजिक संगठनों से पूछा है कि क्या सवर्णों का इस देश में कोई अधिकार नही है? आखिर बात-बात पर दलितों व मुसलमानों के हक के लिए हायतौबा मचाने वाले राजनैतिक लोग सवर्णों पर होने वाले अत्याचार पर खामोश क्यों रहते हैं। उन्होंने कहा कि सभी राजनैतिक दल, सरकार व सामाजिक संगठन देश की इस समस्या का तत्काल हल निकालें अन्यथा सवर्णों में बढ़ता आक्रोश स्वयं के हित की रक्षा में कोई बड़ा कदम उठाने को मजबूर न कर दे। आर के पाण्डेय एडवोकेट का कहना है कि देश के सभी नागरिकों को एक समान सुरक्षा, शिक्षा व सरकारी नौकरी का अधिकार मिलना ही चाहिए।

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