मध्यप्रदेश

पत्रकारों की आई भरमार पोर्टल बनवाकर बन रहे पत्रकार लोग कहते हैं कि डिजिटल जमाना आ गया है हम भी इस बात को मानने से इंकार नहीं कर रहे।

कलयुग की कलम समाचार पत्रिका प्रिंट मीडिया समूह

पत्रकारों की आई भरमार पोर्टल बनवाकर बन रहे पत्रकार लोग कहते हैं कि डिजिटल जमाना आ गया है हम भी इस बात को मानने से इंकार नहीं कर रहे।

लेकिन चौथे स्तंभ का अस्तित्व अब डिजिटल जमाने में खतरे के घेरे में गिरा नजर आने लगा है ऐसा ही वैसे तो खेल सभी जगह चल रहा है लेकिन हम बात कर रहे हैं कटनी जिले की जंहा कई तहसीलों में फर्जी पत्रकारों की भरमार सी आ गई है । ऐसे में सवाल उठता है कि क्या प्रशासन कभी करेगा इन फर्जी पत्रकारों पर कानूनी कार्यवाही

कटनी जिले के अंतर्गत ऐसी कई तहसील है जहां पर आपको फर्जी पत्रकार अधिकांश दफ्तरों में नजर आएंगे चाहे ओ संबंधित पुलिस अधीक्षक कार्यालय हो या फिर थाना प्रभारी का थाना सभी जगह कोई ना कोई नमूना आपको देखने को मिलता रहेगा आखिर क्या उन फर्जी पत्रकारों के संस्थानों के आर एन आई रजिस्टर्ड नंबर एवं जो चैनल चला रहे हैं क्या वह चैनल उन समाचार पत्रिकाओं से मिलता-जुलता है कि नहीं क्योंकि अक्सर देखने में मिलता है कि कई लोग बिना आरएनआई रजिस्टर्ड के चैनल चला रहे हैं।

जिससे पत्रकारों की पहचान करना असंभव हो गया है कि यह कौन सा पत्रकार है क्या इसका संस्थान रजिस्टर्ड है या नहीं क्योंकि जिन समाचार पत्रों के यह पत्रिकाओं के आरएनआई नंबर रजिस्टर्ड है उन्हीं का ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल या उसी नाम से न्यूज़ वेबसाइट यह यूट्यूब चैनल बना हुआ है

परंतु अक्सर देखने में आया है कि कई लोगों के पास ना तो कोई समाचार पत्र है ना पत्रिकाएं हैं बस एक न्यूज़ वेबसाइट के दम पर वह पत्रकारिता कर रहे हैं ऐसे में असली और नकली पत्रकारों की जनता को पहचान करना मुश्किल हो गया है प्रशासन व जिला प्रशासन को चाहिए कि ऐसे फर्जी पत्रकारों के विषय में वह तत्काल कानूनी कार्रवाई करें और उनके संस्थान से आरएनआई रजिस्टर्ड नंबर मांगे तभी ऐसे फर्जी पत्रकारों पर कार्रवाई हो सकती है

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   पत्रिका प्रिंट मीडिया समूह

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