मध्यप्रदेश

अपनी तरह की अनोखी अवसरवादी राजनीति के जनक का अवसान

लेखक अश्वनी बड़गैया, अधिवक्ता स्वतंत्र पत्रकार जिला कटनी (मध्य प्रदेश )

राजनीति के एकमात्र मौसम वैज्ञानिक को विनम्र श्रद्धांजलि

राजनीति के मौसम वैज्ञानिक, 6 प्रधानमंत्रियों के मंत्रिमंडल का हिस्सा रहे, राजनारायण, जयप्रकाश नारायण के अनुयायी, कर्पूरी ठाकुर, सत्येंद्र नारायण सिन्हा के करीबी, लोकसभा चुनाव जीतने के विश्व रिकॉर्ड धारी, दलित राजनीति के केन्द्र बिंदु में रहने वालों में से एक रामविलास पासवान ने 8 अक्टूबर 2020 को संसार से बिदा ले ली ।

बिहार के खगड़िया जिले के एक दलित परिवार में 5 जुलाई 1946 को पैदा हुए रामविलास पासवान ने अपना राजनीतिक सफ़र 23 साल की उमर में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी की टिकिट पर 1969 में अलौली से चुनाव जीत कर बिहार विधानसभा में विधायक बनकर शुरू किया था ।

जेपी को अपना आदर्श मानने वाले पासवान 1974 में लोकदल के महासचिव बने । 1975 में आपातकाल के दौरान जेल यात्रा की । 1977 में जनता पार्टी के महासचिव बने । 1977 में जनता पार्टी की ओर से हाजीपुर संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ कर विश्व रिकॉर्ड बनाते हुए जीत दर्ज कर पहली बार संसद की चौखट लांघी ।

जनता पार्टी टूटने पर विभिन्न दलों के सदस्य रहने के बाद रामविलास पासवान ने लोक जनशक्ति पार्टी नाम से पारिवारिक राजनीतिक पार्टी बना ली । लम्बे समय से अस्वस्थ रहने के कारण पार्टी की बाग़डोर अपने बेटे चिराग पासवान को सौंप कर बतौर संरक्षक बन गए ।

रामविलास पासवान पहली बार 1989 में विश्वनाथ प्रताप सिंह सरकार के मंत्रिमंडल का हिस्सा बने । उसके बाद 1996 में पहले एच डी देवगौड़ा फ़िर इन्द्र कुमार गुजराल, 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी, 2014 में मनमोहन सिंह सरकार में भी मंत्री पद से नवाज़े गये ।

2002 में गुजरात में हुए दंगों के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को जिम्मेदार मानते हुए अटल बिहारी वाजपेयी से इस्तीफा देने वाले रामविलास पासवान ने 2014 में उसी नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में बनी भारत सरकार में शामिल होकर मंत्री पद स्वीकार कर लिया । 2019 में दुबारा फ़िर बनी सरकार में मंत्री रहते हुए दुनिया को अलविदा कहा ।

गठबंधन की राजनीति में होने वाली उठापटक की हवा के रुख़ का पूर्वानुमान लगाने में महारत हासिल कर लेने का परिणाम था कि रामविलास पासवान आधा दर्जन प्रधानमंत्री के मंत्रिमंडल का हिस्सा बने रहे और ऐसा करने वाले वे देश के एकमात्र राजनेता थे । शायद भूतो न भविष्यति । अपने तरह की अनोखी अवसरवादी राजनीति करने वाले रामविलास पासवान को शायद इसीलिए राजनीति का मौसम वैज्ञानिक कहा जाता था ।

बिहार विधानसभा चुनाव की चलती प्रक्रिया के बीच लोक जनशक्ति पार्टी के जनक का अलविदा हो जाना निश्चित रूप से दलित राजनीति के लिए दुःखद तो है ही ।

रामविलास पासवान को विनम्र श्रद्धांजलि ।

लेखक अश्वनी बड़गैया, अधिवक्ता स्वतंत्र पत्रकार जिला कटनी मध्य प्रदेश

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