छत्तीसगढ़

किसानों से अपराधी जैसे बर्ताव करना बंद करे छग प्रदेश कांग्रेस सरकार-श्रीमति चम्पादेवी पावले,पूर्व संसदीय सचिव,छग शासन

अशोक कुमार श्रीवास्तव कलयुग की कलम

बैकुण्ठपुर : छत्तीसगढ में कांग्रेस की सरकार बनते ही किसान,मजदूर,युवा सहित कर्मचारी वर्ग उपेक्षित और शोषित है,कह छग शासन के पूर्व संसदीय सचिव श्रीमति चम्पादेवी पावले ने कांग्रेस सरकार पर जमकर हमला बोला है।वहीं आईना दिखाते हुए कहा है कि, 15सालों से छत्तीसगढ में अपनी ढिकाना ढूंढ रही कांग्रेस सरकार को छल-कपट,झूठ का सहारा लेकर आखिर अपना आशियाना बनाने की मंशा तो पूरी हो गई।परंतु जिन बेरोजगार युवाओं को भत्ता का मोह दिखाया था,उनका आक्रोश अब सातवें आसमान पर है।सत्ता हथियाने के लिये किसानों को बिना शर्त 2500रू धान का समर्थन मूल्य हथकण्डे अपनाये वह अब पूरी तरह फ्लाॅप होते दिखने लगा है।बिजली बिल हाॅफ की जगह बिजली उपलब्धता हाॅफ हो चुकी है।इसके बावजूद भी प्रदेश कांग्रेस सरकार किसानों से बर्बरता करने नये नये हथिकण्डे ईजाद करने लगा है।माननीय मुख्यमंत्री जी का महत्वाकांक्षी योजना गौठान में भ्रष्टाचार का बोल बाला सिर चढकर बोल रहा है।जबकि पूर्व की तरह ही अपने अपने मवेशियों को चराने के लिये किसान निजी चरवाहे पर ही आश्रित है।एक भी गौठान में किसान मवेशी छोडकर दिन भर अपना कार्य कर सके यह व्यवस्था प्रदेश भर में कहीं नही देखने को मिल रहा है।बल्कि इसके जरिये कांग्रेस नेताओं द्वारा चल रहे कार्यों पर फर्जी हाजिरी,गोबर खरीदी धांधलीबाजी जैसे कार्यों से मस्त फल-फूल रहे हैं।

 विडम्बना है कि प्रदेश सरकार, फलीभूत हो रहे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के बजाये पूरे तंत्र को किसानों पर नजर रखने 24*7 दिन/घण्टे लगा दिया है।लगभग साल पूरा हो जाने के बावजूद,किसानों का धान बिक्री का आधा-अधूरा भुगतान कर 2500रू का झूठी वाहवाही बटोरने वाली प्रदेश सरकार अपनी बकाया चुकाने में अस्मर्थ हो चुकी स्वयं किसानो के लिये अपराधी स्वरूप है।फिर भी विडम्बना है कि प्रदेश सरकार किसानों से ही अपराधीपूर्ण व्यवहार अख्तियार कर अपनी असलियत का परिचय दे रही है।अचरज है कि,आज छत्तीसगढ के भोले-भाले किसान,कांग्रेस सरकार के नजर में शक के निशानदेही पर है।प्रदेश कांग्रेस सरकार का किसानों के प्रति यह कैसा विश्वास है कि के खेत से फसल खनिहाल तक आया नही है,फिर भी किसान संदेह के घेरे में अपराधी बना है।जिसे प्रदेश सरकार द्वारा जांच परख करने के लिये खेत में अपनी तंत्र को बैठा रखा है।वास्तविक मायने में फसल गिरदावरी नही बल्कि किसानों पर सरकार का संदेह मिटाने का जुगत है।चूंकि छग कांग्रेस सरकार के नजर में किसान का फसल गिरदावरी से आरोपमुक्त होना काफी नही है।इसके लिये सरकार बकायदा फसल कटने के बाद भी किसान के खनिहाल से लेकर घर तक में रात्रिगश्त कर किसानों से सख्ती से निगरानी करेगी,भोले -भाले किसान को इतनी कडाई के बाद भी स्वयं को बेगुनाह,आरोपमुक्त बनने के लिये कई नाकेबंदी,बरियर्स पार करने होगें,बेरियर पार करने के बाद भी सडक चलते पटवारी,राजस्व निरीक्षक,तहसीलदार,एसडीएम समेत थाना प्रभारी का भी आकस्मिक छापामार कार्यवाही पर पाक साफ होने होंगें,धान खरीदी केन्द्र में भारी मशक्कत के बाद टोकन लेने होंगें,फिर धान की गुणवत्ता परीक्षण कर लगभग साल भर उधारी धान बिक्री करने का हौसला बनाना होगा,जिसकी भुगतान के लिये दिवंगत कांग्रेसी नेताओं का लगभग चार जयन्ती अथवा पुण्यतिथि का लम्बा ईन्तजार करना होगा,

सवाल तो सिर्फ इतना है कि,भोले-भाले किसान जिन्होनें चिकनी-चुपडी,और 15साल के वनवास के दंश झेल रहे कांग्रेस पर सहानुभूति जता छग प्रदेश में भुपेश सरकार बनाई जो क्या किसानों के गले में फांस साबित होगी?अथवा अपने वादा निभाने का जतन करेगी?अथवा किसान अपने अधिकारों को हासिल करने आवाज न उठा सके इसके लिये प्रायोजित हथकण्डे अपनाते रहेगी?जिससे शोषित भूखे किसान दबे कुचले सीमित रहें?यह अन्याय,कुशासन किसानों को आखिर कब तक अपनी दमनचक्र से आहत करेगी?

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