मध्यप्रदेश

गुटवाजी पर संचालित हो रहा सरलानगर अल्ट्राट्रेक सीमेन्ट प्लांट।

कलयुग की कलम

स्थानीय शासन प्रसाशन की आंखों के सामने शोषण का शिकार हो रहे कर्मचारी।

स्थानीय सम्प्पति (सम्पदा) को दोहन कर फिरंगी रूपी प्रवन्धक कहर वर्षा रहा बेरोज गार स्थानीय युवाओं पर

मैहर।। हम बात कर रहे है सरलानगर अल्ट्राट्रेक सीमेन्ट प्लांट की जंहा कर्मचारी व संचालित सरला हायर सेकेन्ड्री स्कूल के टीचर्स हिटलरशाही का शिकार हो रहे है। स्थानीय पीढ़ितों की माने तो इतना भय है कि कोई प्रवन्धक के खिलाफ मुँह नही खोल रहे है। देखा जा रहा है कि एक तरफ जहां देश के प्रधानमंत्री व वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेसन द्वारा महामारी बीमारी के घटते क्रम को देखते हुए लॉक डाउन खोला जा रहा है वही दूसरी ओर सरलानगर अल्ट्राट्रेक सीमेन्ट प्लांट की कालोनियों में रह रहे कर्मचारी लगभग 10 महीनों से कैदियों की जिंदगी बिता रहे है। कोई बीमार है उसे बाहर नही निकलने दिया जाएगा लेकिन अधिकारियों के घर मे काम करने वाली बाहर से बईया जरूर आएगी। कोई अपने माता पिता से मिलने हाल चाल पूंछने नही जा सकता लेकिन जमाने के कपड़े धोने वाला धोबी , दूध,शब्जी वाले अधिकारियों के घर जायेगे। माना जा रहा है कि ये हिटलर शाही है कंपनी के कुछ लोगो का गुट है जोकि अपने उच्चाधिकारियों को दिखाने में लगा है कि हमने कोरोना काल मे कड़ा प्रशासन कर प्लांट को चलाते रहे। जबकि सरलानगर अल्ट्राट्रेक की सारी मुहिम फेल रही कैदियों के तरह कमर्चारियों को रख कर आखिर उन्ही लेबर के बीच काम करना पड़ता है जो लोग बाहर से आते है जिनका कोई रिकॉर्ड नही है।

शोषण का शिकार

सूत्रोंकी माने तो सरलानगर अल्ट्राट्रेक सीमेन्ट के इस गुट द्वारा इतना शोषण किया जा रहा है कि कॉलोनी में रहने वाली लेडिजे अपने आप को सुरक्षित मह्सुश नही कर रही लेकिन इस गुट द्वारा अपने आप को पुलिस थाने का पवार दिखा कर व अधिकारी अपनी मद मस्त मस्ती में चूर हो कर लोगों पर कहर ढा रहा है।। जो कि स्थानीय प्रसाशन व जनप्रतिनिधियों को सब मालूम है।।

श्रमिकों के साथ क्षल* *प्रवन्धक गुट इंतजार में कब हो हड़ताल

श्रमिकों द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक वर्ष में मिलने वाला बोनस व यूनिफॉर्म तक नही मिला जबकि वर्ष के जुलाई महीने में मील जाना चाहिए। श्रमिकों का कहना है हम मान लेते है कि कोरोना विमारी के चलते देरी हो रही है लेकिन क्या कोरोना काल में प्लांट बंद हुआ स्थानीय प्रशासन कोरम पूरा करने के लिए कुछ दिनों के लिए प्लांट बंद रखा गया। जिसका खामयाजा श्रमिक को ही भुगतना पड़ रहा है। लेकिन स्थानीय शासन प्रसाशन मौन है ।

श्रमिकों को नौकरी से निकाल देने का भय

प्रवन्धक गुट द्वारा स्थानीय लोगो को बार बार भय दिया जाता है कि श्रमिक की तादात ज्यादा है अल्ट्राट्रेक सीमेन्ट कारखाने में किसी प्रकार का मुँह खिला तो निकाल दिए जाओगे। जबकि देखा जा रहा है बाहर से आये दिन सैकडों की तादात में श्रमिको व ठेकेदारों को कार्य दिया जा रहा है लेकिन बोट बैंक के चाटू नेता सब जानकर भी स्थानीय बेरिजगरी को दूर करने में असमर्थ।

सी एस आर के तहत कार्य कागजो में कोरम पूरा।

जी हाँ बता दे सरलानगर मैहर सीमेन्ट अल्ट्राट्रेक सीमेन्ट प्लांट 5 ग्रामीण क्षेत्रों को कागजी रूप में गोद लिया है जब विकास की बात करे य कोरोना काल मे ग्रामीणों के मद्दत की बात करे तो कुछ भी नही बस कोरम पूरा करने के लिए दिखावा किया गया। बतादे ये ग्राम पंचायत सोनवारी, डेल्हा,चौपड़ा,भदनपुर,पिपरहट ग्रामपंचतयों में देखा गया बेरोजगारी व लाचारी का जीवन यापन लोग कर रहे है। जबकि इन्ही पंचायतों का खनिज दोहन प्लांट कर रहा है कंपनी द्वारा पंचायत के सरपंच, सचीव ,स्थानीय जनप्रतिनिधि,स्थानीय शासन प्रशासन व जिला को पैसे में तौल कर मुँह बंद कर देती है तथा प्रवन्धक अपनी मनमानी करता है अपना स्वयं का हिटलर शाही संम्राज जमा लेता है तथा गरीब श्रमिक व स्थानीय लोग तंगी का जीवन यापन करते है।।

स्थानीय युवा की रगों में खून की जगह पानी भर गया

बिल्कुन सही ही कहा जा सकता है कि कभी वो दौर था 1990 का जब स्थानीय युवा अपने हक के लिए आगे आता था लड़ता था किसी के आश्रित नही रहता था लेकिन कंपनी व नेताओँ की जाल साजी रणनीति ने युवाओं पर आपसी मत भेद पैदा पर दिया जाती वाद का जहर ऐसे घुला की युवाओं की एकजुटता भंग है जोकि नेताओँ के तत्त्ले चाटने में व्यस्त है अब देखना होगा आखिर कब गक झूठी शान में स्थानीय युवा सोता रहेगा आखिर कब तक नेताओँ की कठपुतली बना घूमता रहेगा आखिर कब तक सरलानगर अल्ट्राट्रेक सीमेन्ट प्लांट प्रवंधन का हिटलरशाही प्रसाशन चलेगा आखिर कब तक स्थानीय बेरिजगर पढ़ा लिखा युवा भूँखा रहेगा और बाहर से आके कोई इन पर राज करेगा। आखिर कब तक प्रसाशन मौन रहेगा।।

शालू सौदागर सतना

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