छत्तीसगढ़

जयंती पर कवि सम्मेलन का आयोजन,वनमाली सृजन केंद्र कोरिया की पहल

राजेश सिन्हा कलयुग की कलम संवाददाता कोरिया

 कोरिया -: बीते 2 अक्टूबर गांधी जयंती पर वनमाली सृजन केंद्र कोरिया द्वारा ऑनलाइन कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें सर्वप्रथम महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री को पुष्पांजलि अर्पित की गई . श्रीनगर से गायक एवं कवि रमेश गुप्ता ने महात्मा गांधी के भजन वैष्णव जन तो तेने तेने कहिए, जे पीर पराई जाने रे की मनमोहक प्रस्तुति से कार्यक्रम को प्रारंभ किया अंबिकापुर के वरिष्ठ कवि जितेंद्र सिंह सोढ़ी ने गांधी जी के जीवन से संदर्भित कई महत्वपूर्ण घटनाओं को याद किया, उन्होंने कहा कि एक बार वायसराय के सवाल पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा था मेरी संत गिरी इसी में है कि मैं इस कलुषित भरी राजनीति में यदि कुछ नहीं कर पाया तब मेरा कोई औचित्य नहीं. सत्यता के बारे में उन्होंने कहा कि सत्य हमारे आस पास बहुत बिखरा पड़ा है, लेकिन हम सत्य का साक्षात्कार करना नहीं चाहते क्योंकि यह मार्ग काफी कठिन और जोखिम भरा है उन्होंने वर्तमान परिस्थितियों पर अपनी कविता- कलाबाँजिया दिखा रहे हैं लोग, तक रही है धरती टुकुर-टुकुर देखिए की प्रस्तुति दी!

इसी तरह वरिष्ठ कवि सतीश उपाध्याय ने गांधी के सपनों को याद करते हुए कहा कि गांधी जी ने देश के स्वावलंबन के लिए खादी को अपनाने की प्रेरणा दी थी उसी का अनुसरण करते हुए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय कृष्ण प्रसाद उपाध्याय गांधी आश्रम से जुड़कर खादी के प्रचार प्रसार में अपना जीवन लगा दिया . मुझे खुशी है कि मैं ऐसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का पुत्र हूं. अपनी कविता उन्होंने शुरू की “खूंटी पर टंगी अस्थियां मुक्ति नहीं मिली, रस्मो रिवाज डूब गए कश्ती नहीं मिली”

कवर्धा से कवियत्री अंतिमा पांडे के गीतों ने कार्यक्रम को ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया. उनका गीत ऐ हवाओं के झकोरों कहां आग लेकर निकले, मेरा गांव बच सके तो मेरी झोपड़ी को जला दो. रचनाकार सुनील गुप्ता ने युवाओं के लिए संदेश देते हुए कविता पढ़ी आंखों में सपने लेकर राही तू बढ़ता जा, राहों के कांटो को फूलों में तू गढ़ता जा. कवि कल्याण केसरी ने महात्मा गांधी से जुड़े संस्मरण याद करते हुए कहा महात्मा गांधी के सहयोग से ही मिली आजादी से आज हम विकासशील राष्ट्र से आगे निकलकर विकसित देशों की श्रेणी में पहुंच रहे हैं. महात्मा गांधी पर टिप्पणी करने वाले लोगों को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा लाल बहादुर शास्त्री जैसे राजनीतिज्ञ भी गांधीजी के आदर्शों पर ही चलते थे . उन्होंने वर्तमान संदर्भ की कविता प्रस्तुत की “जहां राम नहीं अब नर में है नारी में नहीं अब सीता है”

इसीतरह बैकुंठपुर के कवि रूद्र नारायण मिश्रा ने गांधीजी के कृतित्व पर अपनी कविता पड़ी “आधा वस्त्र त्याग कर जिसने भारत के वस्त्र जोड़े हैं, आग लगाकर गांधी को हम फूल चढ़ाने आए हैं”. युवा कवि गौरव अग्रवाल ने अपनी कविता में गांधी शब्द के दुरुपयोग पर भी व्यंग किया उन्होंने अपनी कविता पढ़ी “जो अंधेरों से गुजरने का हुनर रखते हैं वह इरादों में चिरागों का शहर रखते हैं”

कार्यक्रमसंचालक बीरेंद्र श्रीवास्तव ने महात्मा गांधी के बारे में गलत टिप्पणी करने वालों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति के कृतित्व की समीक्षा वर्तमान परिवेश में नहीं बल्कि उन तात्कालिक परिवेश में किया जाना चाहिए जिसमें वे जी रहे थे. समय और परिस्थितियां को देखकर ही निर्णय लिया जाना सही कर्मवीर की पहचान है. यही कारण है कि अपनी अहिंसात्मक राजनीति के लिए गांधी आज पूरे विश्व में अपनी पहचान रखते हैं . उन्होंने नर्मदा के उद्गम अमरकंटक पर गीत पढ़ा “तपोभूमि ये ऋषियों की पुराणों ने विचारा है तपस्या फल से निकली है ये” तपस्या फल से निकली है ये शिव की श्वेद धारा है.

कवि सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के कई रचनाकारों सहित बैकुंठपुर से कवि सुनील शर्मा, रूद्र नारायण मिश्रा, श्रीमती तारा पांडे ,मनेंद्रगढ़ से गायक नरोत्तम शर्मा , कवि कासिम फूल वाला की हिस्सेदारी ने देर शाम तक चलने वाले इस कवि सम्मेलन मे देश, आजादी और गांधी के सहयोग को शब्दों में बयान कर कार्यक्रम को उंचाइयाँ प्रदान की

राजेश सिन्हा संवाददाता कलयुग की कलम

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