मध्यप्रदेश

कहब तो लग जाय धक से कुछ तो शर्म करो लुटेरो देश को दीमक की तरह चाट रहे दोपाये पशु

कलयुग की कलम

कहब तो लग जाय धक से कुछ तो शर्म करो लुटेरो देश को दीमक की तरह चाट रहे दोपाये पशु

लोकतंत्र के मंदिर को बना डाला कोठा

मालिक को रूखी सूखी चाकर को छप्पनभोग

हर्षद मेहता, विजय माल्या, मेहुल चौकसी, नीरव मोदी जैसे लुटेरों की चर्चा तो बहुत होती है परन्तु जो लोकतंत्र के मंदिर में बैठे दुष्कर्म, बलात्कार, अपहरण, हत्या, हत्या का प्रयास, फ़िरौती, गर्म गोश्त के दलाल, माफिया सरगना आदि संगीन आरोप, शर्मनाक अलंकरणों से नवाजे जाने वाले विशेषाधिकार प्राप्त सम्माननीय दोपाये पशु देश को वैधानिक तरीके से किस क़दर लूट रहे हैं । इसकी चर्चा गाहे बगाहे भी नहीं होती ।

बड़े बड़े लोगन के बंगला दो बंगला

और भईया ए सी अलग से

हमरे गरीबन के झोपड़ी जुल्मवा

बरसे से पानी चुये टप से

जनता के वोट से लोकतंत्र के मंदिर की चौखट लांघने वालों के ठाठबाट राजशाहियों से किसी भी कदर कम नहीं होते । चुनाव के समय देश का मालिक कही जाने वाली जनता चुनाव के बाद भिखारियों, गुलामों जैसा जीवन जीने को विवश होती है वहीं चुनाव जीतते ही जनसेवक मालिक बन जनता की छाती पर मूंग तो दलता ही है । संसद को मंडी बनाकर ख़ुद की तो बाजारू औरतों से भी गये बीते तरीक़े से बोली लगाता है ही मौका मिलते ही देश का सौदा करने से भी बाज नहीं आता ।

देशकी खस्ता आर्थिक हालात के बाद भी सांसदों के ऐशोआराम में कोई कमी नहीं आई है । एक सांसद को प्रतिमाह एक लाख चौवन हज़ार रुपये वेतन के रूप में मिलता है । जिसमें पचास हजार रुपये वेतन, पैतालीस हजार रुपये संसदीय क्षेत्र भत्ता, पैतालीस हजार रुपये कार्यालय खर्च भत्ता, औसतन चौदह हज़ार रुपये दैनिक भत्ता शामिल होता है । इसके अलावा संसद सत्र के दौरान संसद में उपस्थित होने पर प्रतिदिन दो हजार रुपये मिलते हैं ।

इतना ही नहीं प्रत्येक सांसद को घर में इस्तेमाल के लिए तीन टेलीफोन लाईन, हर लाईन पर सालाना पचास हजार लोकल कॉल मुफ्त, घर में फर्नीचर के लिए पचहत्तर हज़ार रुपये, पत्नी या किसी अन्य के साथ सालभर में चौतीस हवाई यात्रायें मुफ्त, रेल यात्रा के लिए प्रथम श्रेणी वातानुकूलित का टिकिट मुफ्त, घर पर सालाना चालीस लाख लीटर पानी फ्री, सालाना पचास हजार यूनिट बिजली मुफ़्त, सड़क यात्रा के लिए सोलह रुपये प्रति किलोमीटर किराया, आश्रितों सहित ख़ुद को सभी सरकारी अस्पताल में फ्री ईलाज, निजी अस्पताल में ईलाज कराने पर सरकारी ख़ज़ाने से वास्तविक ख़र्च का भुगतान, दिल्ली के पाश ईलाके में बंगला या फ़्लैट, वाहन खरीदने के लिए चार लाख रुपये का लोन वह भी बिना ब्याज के, कम्प्यूटर खरीदने के लिए सरकारी ख़ज़ाने से दो लाख रुपये, हर तीसरे महीने पर्दे, सोफा कव्हर धुलवाने का खर्चा भी सरकारी खजाने से दिया जाता है ।

प्रधान सेवक के ठाठबाट तो पुरातन राजशाही को भी मात दे रहे हैं । देश की सत्यानाशी कर दी गई आर्थिक स्थिति के बाद भी हाल ही में सर्वसुविधायुक्त विमान ख़रीदे गये हैं । ख़ुद को विज्ञापित करने के लिए सरकारी ख़ज़ाने से करोड़ों रुपये की बंदरबांट की जा रही है सो अलग से ।

बड़े बड़े लोगन के डनलप के गद्दा

और भईया सोफा अलग से

हमरे गरीबन के खटिया जुल्मवा

सोये से टूट जाये खट से

ये तो हुई ज़ाहिर तौर पर होने वाली कमाई और सुख सुविधाएं । सांसद निधि ख़र्च करने पर मिनिमम दस प्रतिशत का कमीशन भी मिलता है । भृष्टाचार से होने वाली कमाई अलग से होती ही है । तभी न पांच साल में सीधेसाधे सांसद की आय में भी पांच से दस गुना बढ़ोतरी हो जाती है ।

सांसद बनने के बाद भले ही संसद दूसरे दिन भंग हो जाये ताउम्र पेंशन पक्की । वेतन, पेंशन आयकर मुक्त । रुतवा अलग से । ग़ैरकानूनी धंधे चलते हैं बेरोकटोक । जिस प्रशासन को गिरेबान में हाथ डालकर सलाखों के पीछे डाल देना चाहिए वही प्रशासन इनकी चौखट पर हाथ जोड़े लम्बलेट पड़ा रहता है ।

बड़े बड़े लोगन के बियर व व्हिस्की

और भईया पेप्सी अलग से

हमरे गरीबन के पानी जुल्मवा

पिये से पेट जरे झर से

जहां देश की मालिक कही जाने वाली तीन चौथाई जनता को हाड़तोड़ मेहनत करने के बाद भी सही तरीके से दो टाईम का भोजन नसीब नहीं हो पाता, स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में नौनिहाल जन्म लेते ही मौत का आलिंगन कर रहे हैं, मातृशक्ति नरभक्षियों द्वारा नोची खसोटी जा रही हैं, किसान आत्महत्या कर रहा है, कर्मचारियों को सारी नौकरी करने के बाद पेंशन नहीं मिलती है वहीं देश को चारों पैरों से लुट रहे सर्व भक्षी शहंशाहों, नवाबों के ठाठ देखते ही बनते हैं ।

कटनी से लेखक अश्वनी बड़गैया, अधिवक्ता स्वतंत्र पत्रकार

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