मध्यप्रदेश

दोसी होकर भी पंछियो की तरह आजाद है आदित्य सोनकिया

राज कुमार सेन ब्यूरो चीफ कलयुग की कलम छतरपुर

 

एस एल आर का पद खाली होने के बाद भी सालों से एक ही कुर्सी पर जमे बैठे है ए एस एल आर आदित्य सोनकिया। आखिरकार साहब को

संरक्षण क्यों दे रहे अधिकारी।

छतरपुर। जिले में कई विभाग ऐसे हैं जहां पर अधिकारी कर्मचारियों ने अपना एक अलग साम्राज्य खड़ा कर रखा है। कई अधिकारी ऐसे हैं जिन्हें एक दो नहीं बल्कि एक ही कुर्सी पर बैठे बैठे पूरा एक दशक बीतने वाला है इसके बाद भी उनका तबादला नहीं हो रहा है जबकि नियमानुसार सरकारी मुलाजिम का एक निश्चित समय में तबादला हो जाता है। मिली जानकारी के मुताबिक ए एस एल आर आदित्य सोनाकिया तकरीबन 9 साल से एक ही कुर्सी पर विराजमान है, हालांकि वहां पर अभी एस एल आर का पद खाली है और उनके द्वारा अपने हिसाब से आरई एवं पटवारियों की पोस्टिंग की जाती है। दिलचस्प बात तो यह है कि इसके पहले जो रीडर थे, उनकी छवि बेहद स्वस्थ और इमानदार वाली थी लेकिन उनके स्थान पर नायब तहसीलदार रहे श्रीपत अहिरवार को रीडर बना दिया गया संभवतः यह बेहतर तालमेल का नतीजा हो सकता है। सूत्रों की माने तो आदित्य सोनकिया किसी ना किसी मसले को लेकर सुर्खियों में बने रहते हैं, यहां तक की विधायक तक इनकी शिकायत कर चुके हैं लेकिन राजधानी में बेहतर पकड़ होने के कारण उनके ऊपर कोई कार्यवाही नहीं हो रही है और यही कारण है कि जिले की ईमानदार कलेक्टर की छवि 9 साल से जमे बैठे साहब द्वारा धूमिल की जा रही है।प्राप्त जानकारी के अनुसार कलेक्टर कार्यालय के अंतर्गत भू अभिलेख शाखा में पदस्थ लिपिक अजय सौर ने अपने ही विभाग के पांच आरआई के जीपीएफ एवं एरियर एवं वेतन का आहरण अपने निजी खाते में कर लिया। उसके बाद लिपिक अजय सौर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया और उसकी विभागीय जांच शुरु हो गई है।अपना बचाव करते हुये आदित्य सोनकिया ने बाबू के खिलाफ सिटी कोतवाली में 17 सितंबर को एफआईआर भी दर्ज करा दी। मिली जानकारी के अनुसार भू अभिलेख शाखा में पदस्थ आरआई अभय सिंह गौर के जीपीएफ की राशि डेढ़ लाख रुपए मल्लू प्रसाद पॉल जिसकी जीपीएफ की राशि दो लाख रुपए, रामकरण प्रजापति जिसकी जीपीएफ की राशि दो लाख रुपए इसके अलावा राम दयाल सिंह का एरियर तीन लाख 25486 रुपए के साथ हनुमान सिंह की दो माह की वेतन को अजय सिंह सौर ने अपने निजी खाते में ट्रांसफर कर ली थी। शेष वसूली अभी किया जाना बाकी है। फिलहाल भू अभिलेख शाखा में हुए इस घोटाले को लेकर कर्मचारियों में हडकंप मचा हुआ है। वर्षों से अपनी सेवा दे रहे आरआई के निजी खातों की राशि आहरण करने का यह पहला मामला है।
ऑनलाईन होने के बावजूद भी अरुण सौर ने यह कारिस्तानी कर दी। इस संबंध में एसएलआर आदित्य सोनकिया का कहना है कि विभाग के प्रमुख होने के नाते इसमें मेरी भी गलती है परंतु कहीं न कहीं ट्रेजरी विभाग भी इसके लिए दोषी है। जिले भर के आरआई एवं पटवारियों के वेतन एवं अन्य देयकों के बिल मेरे पास आते हैं। बाबुओं पर विश्वास करना पड़ता है। विश्वास का फायदा उठाकर अरुण सौंर ने यह घोटाला कर डाला है। कलेक्ट्रेट छतरपुर स्थित भू अभिलेख शाखा में सत्तरह लाख रुपये के धोखाधड़ी पूर्ण आहरण और गबन के मामले में एसएलआर आदित्य सोनकिया भी अपराध में बराबर के दोषी हैं ।सूत्रों की माने तो केवल बाबू पर आरोप लगाकर आदित्य सोनकिया खुद बचना चाहते है। अपने को पाक साफ साबित करने के लिए वह सरासर झूंठ बोल रहे हैं कि उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गये ।
हालांकि अभी कलेक्टर ने एसएलआर के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की है। गौरतलब हो कि अरुण सौंर की नियुक्ति पिता की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति के तहत हुई थी। इसके पहले डिप्टी कलेक्टर मरकाम एवं वर्तमान डिप्टी कलेक्टर प्रियांशी भंवर भी भू अभिलेख शाखा की ओआईसी के प्रभारी अधिकारी रहीं हैं। फिलहाल 17 लाख 12 हजार 817 रुपए का गवन हुआ था और इस गवन की राशि की रिकवरी साढ़े 13 लाख रुपए अभी तक की जा चुकी है। लिपिक कार्यालय से फरार है। आदित्य सोनकिया छतरपुर जिले में लगभग 10 वर्षों से पदस्थ हैं और उन्होंने अपने कार्यकाल में लगभग 6 कलेक्टर के साथ काम किया है।
सरकारें बदलीं परंतु सोनकिया अभी तक नहीं बदले गए। विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भू अभिलेख शाखा में जो बाबू वित्त का काम देखता था उसे स्वयं सोनकिया जी ने बदल दिया था। और एक अनुभवहीन लिपिक को वित्त का प्रभार सौंप दिया था। अति विश्वास में लेकर लिपिक ने यह कांड कर दिया है। संबंधित पांच आरआईयों को रिकवरी की राशि उनके खातों में ट्रांसफर कर दी गई है शेष बची राशि अतिशीघ्र वसूल करकर संबंधी आरआईयों के खाते में जमा करा दी जाएगी। इतना बड़ा मामला होने के बाद भी इस मामले को प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा दबाया जा रहा था। अब देखना है कि इस पूरे कांड में दोषियों के खिलाफ क्या कार्यवाही होती है।
     राजकुमार सेन (ब्यूरो चीफ)
     कलयुग की कलम छतरपुर

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