मध्यप्रदेश

छतरपुर महर्षि स्कूल के प्राचार्य की कार्यशैली के कारण मानवता तार-तार

राज कुमार सेन ब्यूरो चीफ कलयुग की कलम छतरपुर

पिता के सिर में गठान और बच्चे की किडनी का ऑपरेशन होने की जानकारी देने के बावजूद चैक के प्रकरण में 4 हजार रुपये अतिरिक्त शुल्क की मांग

कलयुग की कलम

छतरपुर। महर्षि महेश योगी ने जिन उद्देश्यों को लेकर पूरे देश में शिक्षा के मंदिरों की स्थापना की ऐसा ही एक मंदिर शहर में देरी रोड पर स्थित है, परंतु स्कूल के प्राचार्य की कार्यशैली के कारण अब स्कूल व्यावसायिक गतिविधियों में संलग्न हो गया है। भले ही प्राचार्य फोटो के माध्यमों से यह दिखाने का प्रयास करें कि वे जो कार्य कर रहे हैं वे महर्षि पतंजलि के उद्देश्यों को पूरा करते हैं परंतु हकीकत कुछ और है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है।

जब स्कूल प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अभिभावक विजय द्विवेदी की पुत्री दिव्यांशी द्विवेदी कक्षा 7वीं की छात्रा है और यह छात्रा शुरू से इस विद्यालय में पढ़ रही है। कक्षा 7वीं की शेष फीस 16750 की एक चैक जो 7 मार्च 2020 की थी स्कूल प्रबंधन को दी गई परंतु श्री द्विवेदी के सामने कुछ ऐसी परिस्थितियां आईं जिसके कारण उन्होंने जो चैक दी थी उस समय स्कूल को वह पैसा नहीं मिला। श्री द्विवेदी की अचानक 18 नवम्बर को तबियत खराब हुई थी जिसके कारण उन्हें ग्वालियर इलाज हेतु जाना पड़ा जहां डॉक्टरों ने बताया कि उनके सिर में दो गठाने हैं जिनका आज भी इलाज चल रह है साथ ही उनके पुत्र राजवर्धन द्विवेदी 22 वर्ष की बाईं तरफ की किडनी में दर्द होने के कारण उसे 22 से 30 जून, 18 से 22 अगस्त एवं 9 सितम्बर से 19 सितम्बर 2020 के दरम्यान एमकेएम भोपाल में इलाज कराने जाना पड़ा। 14 सितम्बर को राजवर्धन द्विवेदी की बाईं ओर की किडनी का ऑपरेशन हुआ जिसमें श्री द्विवेदी का काफी पैसा खर्च हुआ। किसी तरह कर्जा लेकर 25 सितम्बर को श्री द्विवेदी महर्षि स्कूल की शेष फीस 16750 रुपये जमा करने के लिए गये परंतु वहां उपस्थित लिपिक ने बताया कि आपको 4 हजार रुपये और जमा करना है।

जब लिपिक से पूछा गया कि किस बात के रुपये तो उसने बताया कि आपकी चैक बाउंस हो गई थी, इस कारण। जबकि अभिभावक विजय द्विवेदी ने स्कूल प्रबंधन को यह बता दिया था कि बच्चे की किडनी में समस्या होने के कारण उसका ऑपरेशन होना है इसलिए फीस बाद में जमा की जायेगी, परंतु स्कूल के प्राचार्य किसी बात को सुनने के लिए तैयार नहीं हैं। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में लिखित शिकायत की गई है और जिला कलेक्टर को भी अवगत कराया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार स्कूल द्वारा कम से कम 20 लोगों को  नोटिस देकर फीस के लिए दबाव बनाया जा रहा है। कोरोना के काल में अभिभावकों का इस प्रकार नोटिस देकर दबाव बनाना कहां तक उचित है? अब देखना होगा कि स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जिला शिक्षा अधिकारी क्या कार्यवाही करते हैं।

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