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शिवराज सरकार में  “ एमबीबीएस की पढ़ाई हिंदी में कराने वाले मुख्यमंत्री का दावा मुंगेरी लाल के हसीन सपने”

कलयुग की कलम

शिवराज सरकार में

“ एमबीबीएस की पढ़ाई हिंदी में कराने वाले मुख्यमंत्री का दावा मुंगेरी लाल के हसीन सपने”

KKK न्यूज इन्दौर

“इंग्लिश के शब्दों को हिंदी में लिखकर दावा करना की एमबीबीएस की पढ़ाई हिंदी में होगी हास्यास्पद कदम”

उदाहरण के तौर पर..

“संस्कृत को इंग्लिश में लिखना क्या संस्कृत का इंग्लिश होने का प्रमाण “

 

इंदौर,नौटंकी से प्रदेश चलाने में सफल रहने वाली भाजपा की शिवराज सरकार एमबीबीएस छात्रों की पढ़ाई के लिए ऐतिहासिक नौटंकी करके देश का एमबीबीएस कोर्स का बंटाधार होने जा रहा हैं।

म.प्र.कांग्रेस कमेटी के प्रदेशसचिव राकेश सिंह यादव ने दावा किया कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की कलाबाज़ी में देश के गृहमंत्री भी फँस गये।देश के गृहमंत्री से एमबीबीएस पढ़ाई हिंदी में कराने का कोर्स लॉंच कराकर तालियॉं पीट पीटकर कोहराम मचा दिया की अब एमबीबीएस की पढ़ाई हिंदी में लिखी एमबीबीएस कोर्स की किताबों से करायी जाएगी ।जब मुख्यमंत्री के दावों की असलियत समझकर एमबीबीएस शिक्षा हिंदी कोर्स की असलियत समझी तो पैरों तले ज़मीन खिसक गई।भाजपा के मुख्यमंत्री एंव देश के गृहमंत्री अमित शाह जिस हिंदी एमबीबीएस कोर्स की किताबों का विमोचन करके गदगद हो रहे थे दरअसल इन मेडिकल की किताबों में इंग्लिश शब्दों का ट्रांसलेशन सिर्फ़ हिंदी शब्दों में किया गया हैं।लेकिन शब्द वहीं इंग्लिश का हैं।

अब सवाल यह हैं की इंग्लिश शब्द को हिंदी में लिखने से एमबीबीएस कोर्स कैसे हिंदी में हो जायेगा यह तो देश का एक भी पढ़ा लिखा व्यक्ति नहीं समझा सकता लेकिन मुख्यमंत्री और गृहमंत्री ने आपस में समझ लिया हैं।एमबीबीएस कोर्स का हिंदी रूपांतरण का दावा एकदम झूठा और बोगस हैं।यह वैसा ही दावा हैं जैसे संस्कृत के शब्द का इंग्लिश में रूपांतरण कर दिया जाये जैसे संस्कृत शब्द कदाप्रभृति को इंग्लिश में रूपांतरण करके लिखा kadaprabrati अब इसे पढ़ने पर कदाप्रभृति ही कहेंगे।मतलब उच्चारण संस्कृत में ही हैं।वैसे ही एमबीबीएस कोर्स में इंग्लिश में bone को हिंदी में भी बोन ही कहा हैं या osmoleritee को हिंदी में ओस्मोलेरिटी ही लिखा हैं।इसी तरह blood pressure को ब्लड प्रेशर ही लिखा हैं।जब शब्द का उच्चारण ही इंग्लिश शब्द का हैं तो इसे हिंदी में एमबीबीएस शिक्षा कहना सफ़ेद झूठ बोलना हैं।

इस रूपांतरण का क्या फ़ायदा इस पद्धति से तो एमबीबीएस पढ़ाई का सत्यानाश हो जाएगा।इस तरह की मेडिकल पढ़ाई का मतलब यह की बोलेगा नाम इंगलिश में लेकिन लिखेगा हिंदी में।अब माननीय मुख्यमंत्री और गृहमंत्री इस जादू से पर्दा उठाने के बाद यह समझाये की इस इंग्लिश और हिंदी के खिचड़ी व्हाट्स अप लायब्रेरी पैटर्न से पढ़ने वाले एमबीबीएस विघार्थी दवाईयों के नाम कैसे पढ़ पायेगें।क्या बिना दवाई का नाम पढ़े ही इलाज कर देगें।मुख्यमंत्री से पॉंच सवाल हैं-

1- इंग्लिश शब्दों को हिंदी में लिखकर एमबीबीएस शिक्षा को हिंदी पाठ्यक्रम में बदलने का झुठा दावा क्यों किया गया.?

क्या यह चुनावी शिगूफ़ा हैं या प्रदेश की जनता के जीवन से खिलवाड़ की कोशिश हैं।

2-एमबीबीएस शिक्षा के साथ राजनैतिक लाभ के लिए खिलवाड़ क्या उचित हैं।एमबीबीएस पाठ्यक्रम इंग्लिश शब्द को हिंदी में लिखने वाला मेडिकल छात्र बिना इंग्लिश का ज्ञान प्राप्त करें दवाओं और इंजेक्शन के नाम कैसे पढ़ेगा और लिखेगा।मुख्यमंत्री और चिकित्सा शिक्षा मंत्री स्पष्ट करें।

 

3- एमबीबीएस छात्र समस्त मेडिकल रिपोर्ट बिना इंग्लिश का ज्ञान प्राप्त करें ब्लड रिपोर्ट,एक्स रे रिपोर्ट,टीएमटी रिपोर्ट,कोरोना रिपोर्ट,ज्वाइंडिस रिपोर्ट,यूरिन रिपोर्ट,किडनी रिपोर्ट,शुगर रिपोर्ट सहित समस्त पेथॉलाजी रिपोर्ट कैसे समझेगा।

जवाब दीजिए मुख्यमंत्री जी.?

 

4- शिवराज सरकार के कथित इंग्लिश उच्चारण वाले हिंदी एमबीबीएस कोर्स से बना डॉक्टर आपरेशन थियेटर में सर्जिकल एक्यूमेंट एंव सर्जिकल दवाईयों के नाम कैसे पढेगा।मेडिकल उपचार हेतु समस्त उपकरणों का डाटा कैसे पढ़ेगा ।किसी भी बीमारी के संदर्भ में विदेशों से डॉक्टर का ओपिनियन बिना इंग्लिश जाने कैसे प्राप्त करेगा।

 

5- क्या अब म.प्र. में ऐसे डाक्टर बनायें जायेगे जिन्हें न दवाईयों के नाम पढ़ना याद होगें न ही पेथॉलाजी रिपोर्ट पढ़ने का ज्ञान होगा न ही मेडिकल उपकरण के नाम का ज्ञान होगा।इस हिंदी मेडिकल पाठ्यक्रम में मुख्यमंत्री को सलाह हैं की पढ़ने वाले विद्यार्थियों को यह भी सुविधा प्रदान कर दें की डॉक्टर बनने के बाद इलाज के दौरान दवाईयों के नाम नहीं पढ़ने की वजह से मरीज़ की मौत होने पर ग़ैर इरादतन हत्या का मुक़दमा दर्ज नहीं किया जाएगा ।

 

देश में पहली बार इस तरह का गंभीर मज़ाक़ मेडिकल शिक्षा के साथ हो रहा हैं।देश ऐसा हास्यास्पद कारनामा कैसे स्वीकार्य करेगा।क्या मुख्यमंत्री और भाजपा देश की एमबीबीएस शिक्षा को समाप्त करके देश में अराजकता फैलाना की कोशिश कर रहे हैं या फिर चुनावी राजनीति फ़ायदे के लिए देश और प्रदेश की जनता को धोखा दे रहे हैं।

देश के विख्यात डॉक्टर एंव बुद्धिजीवीयों को इस तरह के बेसिरपैर के निर्णयों का विरोध करके कम से कम एमबीबीएस मेडिकल शिक्षा को बचाना चाहिए।मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया पत्र लिखकर अपील करने के साथ ही सख़्त कदम उठाकर ऐसे हास्यास्पद निर्णयों से मेडिकल शिक्षा की रक्षा करने की अपील की हैं।

 

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