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वन विभाग के द्वारा निर्माण कार्यों में जमकर किया गया भ्रष्टाचार जांच होने पर लाखों का घोटाला आ सकता है सामने

वन विभाग के द्वारा निर्माण कार्यों में जमकर किया गया भ्रष्टाचार जांच होने पर लाखों का घोटाला आ सकता है सामने

वन विभाग के द्वारा निर्माण कार्यों में जमकर किया गया भ्रष्टाचार जांच होने पर लाखों का घोटाला आ सकता है सामने

पत्रकार -अशोक श्रीवास्तव

मनेंद्रगढ़ (छत्तीसगढ) वन मंडल अंतर्गत आने वाले वन परिक्षेत्रों में वृक्षारोपण सहित निर्माण कार्यों में जमकर धांधली करने का मामला प्रकाश में आया है। मनेंद्रगढ़ वन परिक्षेत्र व बिहारपुर वन परिक्षेत्र में जहां पुराने कार्यों पर रिपेयरिंग करके लाखों रुपए के फर्जी भुगतान किए गए हैं । तो वहीं दूसरी तरफ निर्माण कार्यों में भी जमकर धांधली की गई है। वन विभाग के द्वारा लाखों रुपए का फर्जी बिल के माध्यम से बंदरबांट किया गया है । लेकिन जिले में जांच ना होना भ्रष्टाचारियों के हौसले बुलंद कर रहा है। सभी जगह निर्माण कार्यो के नाम पर जमकर सरकार के खजाने को लूटने का काम वन विभाग के आला अधिकारियों ने किया है। यदि जिम्मेदार अधिकारी के द्वारा वास्तविक रूप से वन विभाग के द्वारा कराए गए कार्यों का जांच किया जाए तो लाखों रुपए के भ्रष्टाचार का खुलासा सामने आ सकता है । और भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्यवाही हो सकती है । लेकिन जांच करें तो करें कौन क्योंकि सभी को समयानुसार अनुदान राशि पहुंचा दी जाती है। सूत्रों की माने तो मनेंद्रगढ़ वन परिक्षेत्र में विगत 2 वर्षों से लाखों रुपए के निर्माण कार्य कराए गए हैं। जिसमें अधिकांश निर्माण कार्य सिर्फ कागजों पर खानापूर्ति करके सरकारी खजाने को लूटने का काम किया गया है । एक ओर जहां छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार वनों को हरा-भरा करने में किसी तरह का कोई कसर नहीं छोड़ रही है । तो वहीं जिले में बैठे वन विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों की छत्रछाया में भ्रष्टाचार का खुला खेल खेला जा रहा है।

लाखों रुपए के निर्माण कार्यों का आज तक नहीं लगा बोर्ड- आपको बताते चलें कि मनेंद्रगढ़ वन मंडल के अंतर्गत आने वाले वन परिक्षेत्र में इन दिनों इतना भ्रष्टाचार का बोलबाला है कि शासन की योजनाओं की जानकारी देने के लिए भले ही संबंधित स्थान पर बोर्ड लगाने के नाम पर हजारों रुपए का बिल लगाकर पैसा निकाल लिया जा रहा हो । लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। यहां आज तक वन विभाग के द्वारा कराए गए किसी भी कार्य में बोर्ड नहीं लगाया गया। जिससे लोगों को यह जानकारी मिल सके कि आखिर यह कार्य वन विभाग के द्वारा किस मद से कराया गया है । और इसकी वास्तविक लागत क्या है। इससे यह स्पष्ट होता है कि अपने भ्रष्टाचार की पोल को छुपाने के लिए वन विभाग के द्वारा इस तरह के कारनामे किए जा रहे हैं। की किसी को इस बात की जानकारी ना मिल सके कि आखिर वन विभाग के द्वारा कराए गए काम पर कितनी लाख रुपए की राशि खर्च की गई है। और शासन का मुख्य उद्देश्य क्या है।

मनेंद्रगढ़ वन परिक्षेत्र में पहली बारिश भी नहीं झेल सका तालाब निर्माण कार्य– मनेंद्रगढ़ वन परिक्षेत्र का तो यह हाल है । कि वन विभाग के द्वारा जंगल में कराए गए तालाबों के निर्माण कार्य पहली बारिश ही नहीं झेल सके हैं तो । वंही दूसरी ओर शासन की गाइड लाइन के अनुरूप तालाबों का निर्माण कार्य नही किया गया है । सूत्रों की माने तो यह भ्रष्टाचार का खेल उच्च अधिकारियों की छत्रछाया में प्रभारी रेंजर के द्वारा भ्रष्टाचार का खेल खेला जा रहा है । और यही वजह है कि गुणवत्ताहीन काम करा कर शासन के लाखों रुपए की राशि का बंदरबांट किया गया है। लेकिन जांच करे तो करे कौन सभी को तो भ्रष्टाचार व फर्जी बिल लगाकर सरकार की निकाली गई राशि का हिस्सा पहुंचता है। और यही वजह है कि जिम्मेदार अधिकारी कराए गए निर्माण कार्यों की जांच करना अपनी जिम्मेदारी नहीं समझते हैं।

मीडिया के सामने डीएफओ को शासन की गाइड लाइन की आई याद– वही जब मनेंद्रगढ़ वन परिक्षेत्र में निर्माण कार्य के नाम पर हुए गुणवत्ता विहीन कार्य कराकर शासकीय धन राशि के बंदरबांट की जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो मनेंद्रगढ़ डीएफओ श्री पटेल ने वही काम शुरू किया जो सभी अधिकारी अपने भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए करते हैं। डीएफओ के द्वारा मीडिया के बताने के बाद अपने बाबू को बुलाकर निर्माण कार्य व वन विभाग के द्वारा कराए गए सभी कार्यों के स्थानों में बोर्ड लगाने के लिए पत्र जारी करने की बात कही गई। इससे स्पष्ट होता है कि जिले का जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ दफ्तरों में बैठकर कुर्सी तोड़ने का काम कर रहा है। यदि वास्तविक रुप से क्षेत्रों का भ्रमण किया होता तो शायद जिले के जिम्मेदार अधिकारी को यह ज्ञात होता कि हमारे अधिकारियों के द्वारा कहां शासन के मंशा के अनुरूप कार्य कराए गए हैं । और कहां भ्रष्टाचार करके फर्जी बिल निकाला गया है।

हजारों रुपए का डीजल जलने के बाद भी अधिकारी को नही है निर्माण कार्य की जानकारी – जबकि डीएफओ साहब के द्वारा भ्रमण के नाम पर कई हजार रुपए का डीजल सरकार के पैसे का उड़ाया जा रहा है। लेकिन जिले के जिम्मेदार अधिकारी को यह तक पता नहीं है कि किन कार्यों में शासन की मंशा के अनुरूप कार्य किया गया है। और किन कार्यों में विभाग के द्वारा बिना बोर्ड लगाए फर्जी रूप से शासन की धनराशि बंदरबांट की गई है। वही अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की साफ स्वच्छ छवि पर कब तक ऐसे जिम्मेदार अधिकारी भ्रष्टाचारियों का साथ देकर शासकीय धनराशि का बंदरबांट कर धूमिल करते रहेंगे या फिर वन विभाग में कराए गए कार्यों की निष्पक्ष जांच होगी।

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