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जय हो नगर सरकार        “किस्सा कुर्सी ” का “जन्मभूमि” का कर्ज चुकाना है       वो भी बिना किसी “हिम्मत” के क्या संभव रतलाम को “स्वर्णिम” बनाना है… वो भी बिना किसी “हिम्मत” के क्या संभव है            राजनीति शतरंज की बिछात पर अनबूझ खेल

कलयुग की कलम

जय हो नगर सरकार

       “किस्सा कुर्सी ” का

 

“जन्मभूमि” का कर्ज चुकाना है

वो भी बिना किसी “हिम्मत” के क्या संभव

रतलाम को “स्वर्णिम” बनाना है…

वो भी बिना किसी “हिम्मत” के क्या संभव है

राजनीति शतरंज की बिछात पर अनबूझ खेल

KKK न्यूज रतलाम । नगर पालिक निगम सरकार के लिये भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी व भारतीय जनता पार्टी व वर्तमान में भाजपा के जिला मीडिया प्रभारी बागी प्रत्याशी एवं अन्य निर्दलीय महापौर उम्मीदवारी के महासंग्राम का बिगुल बज चुका है। शहर के करीबन सवा दो लाख जागरुक जनता जनार्दन मतदाता दिनांक 13 जुलाई 2022 को होने वाले चुनावी “महायज्ञ” में मतदाता अपने-अपने मत का दान (मतदान) देकर आहुति देना तय है।

ऐसे ये शहर के वरिष्ठ, दिग्गज नेतागण अपने-अपने समर्थक को सुअवसर मिले वो इसके लिये हमेशा प्रयासरत् रहते भी है और दिखते भी रहे हैं। रतलाम नगर में तीन दर्शकों तक एक छत्र भारतीय जनता पार्टी के विधायकी का परचम लहराते हुये अपनी बेदाग, साँफ-सुथरी छवि वाले लोकप्रिय भाई हिम्मत जी कोठारी (सेठ) का उस दौर में लोक निर्माण मंत्री, वन मंत्री,परिवहन मंत्री, गृहमंत्री, जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी पदों के दौरान उस समय (सेठ) के नाम से जिधर देखो, उधर देखो ढंके बजते थे। और आज की तय तारीख में भी सैकड़ों सच्चे कार्यकर्ता और उनके परिवार का हर एक सदस्य उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने को आज भी बेताब रहते है।

लेकिन जो देखने में आया और नजर आ रहा है कि ऐसे जनाधार वाले ईमानदार राजनेता जो मान-सम्मान मिलना चाहिये वो पूर्व पार्षद महाशय द्वारा कहीं ना कहीं थोड़ी -बहुत (कंजूसी) करते दिखाई दे रहे हैं।

राजनीति के डालूमोदी बाजार के चार चौराहे पर चार लोग -होन आपस में बतिया रहे थे कि नगर के 49 वार्डों में से कितना वार्ड में पूर्व गृहमंत्री भाई हिम्मत जी कोठारी (सेठ) के समर्थकों को पार्षदी के लिये टिकट मिला यह तो टिकट देने वाले जाने या फिर टिकट लेने वाले जाने या फिर सेठ के समर्थक जाने या फिर भैय्या जी के समर्थक जाने कहीं ऐसा तो नही कि दाल में कुछ काला है या पूरी की पूरी दाल ही काली नजर वाली कहावत चरितार्थ न हो जाये। यह तो भगवान जाने या फिर राम जी जाने ।

हॉ इतना तो सच है कि पिछले कुछ समय से नगर में यह साफ-साफ नजर आ रहा है कि भाजपा के पूर्व पार्षद एवं वर्तमान में भाजपा के महापौर प्रत्याशी भाई पहलाद पटेल साहब अपने वरिष्ठ, दिग्गज, ईमानदार, राजनेता, को फ्लेक्स, बैनर,अन्य कार्यक्रम में (मान-सम्मान) देने से कुछ पीछे क्यों है।

समाचार के माध्यम से मेरे पास जो तीन फ्लेक्स फोटो प्राप्त हुये है वह मेरे भाई-बंधु जागरूक, पाठकगण तक पहुॅचाने का छोटा सा प्रयास किया है। बाकी तो आप स्वयं ही काफी बुद्धिजीवी, जागरूक समझदार है और समझदार को एक इशारा ही काफी है।

किसी जमाने में मशहूर फिल्मी पिक्चर में हीरो अजय देवगन का एक डायलॉग उस जमाने में काफी सुपर-डुपर हिट रहा है पेश डायलॉग की चन्द पंक्तियां ।

 

हमें तो अपनों ने ही लूटा ।

गैरों में कहॆ दम था ।।

हमारी कश्ती भी वहाँ डूबी ।

जहाँ अपनों से ऐसा विश्वास ना था ।।

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