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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान योजनाएं तो सर्वश्रेष्ठ लाएं, लेकिन जनविरोधी अधिकारियों ने जमीन पर क्रियान्वयन नहीं होने दिया

कलयुग की कलम

पंडित प्रदीप मोदी

साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार

9009597101

 मध्यप्रदेश में एक सफल मुख्यमंत्री के रूप में श्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने आपको स्थापित किया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जनता के बीच सहज,सरल और अपना सा लगने वाले नेता की छवि है। इस छवि को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बरसों खाद-पानी दिया है।सलीके से निखारा है और जनता के बीच बड़े ही अपने बनकर, अपनी छवि को लेकर पहुंचे हैं शिवराज। मुख्यमंत्री के राजनीतिक लटके-झटके सहज है,दिखाए जाने वाले उनके अपनेपन में बनावटीपन नहीं है और यही गुण शिवराज को नेताओं की भीड़ से अलग करता हैं। लम्बे समय से मध्यप्रदेश मेंं शिवराज मुख्यमंत्री हैं और अपने बल पर हैं,अपने दम पर है। जनता के बीच सतत लोकप्रिय बने रहने के, अनवरत रूप से प्रभावशाली ढंग से राजनीतिक धारा में बने रहने के खट-करम मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बेहतर तरीके से जानते हैं। यही कारण रहा कि लोकप्रिय रहते हुए शिवराज सिंह चौहान ने इतने लंबे समय तक प्रदेश की सत्ता पर शासन किया और कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता के लिए,जनता के हितों के लिए , जनता की सुविधा हेतु अनेक योजनाएं चलाई, यदि इन योजनाओं पर जमीनी स्तर पर ईमानदारी से काम हो जाता तो यकीनन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जनता के बीच पुजा जाते। जनसुनवाई, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, लाड़ली लक्ष्मी जैसी योजनाओं के नाम गिनाने बैठे तो शायद स्थानाभाव महसूस हो, इसलिए योजनाओं का बखान करने के स्थान पर इनका सही क्रियान्वयन कर दिया जाता तो शायद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मध्यप्रदेश की राजनीति में जनहितैषी व्यक्तित्व का पर्याय बन जाते। उल्लेखनीय हैं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के शासन काल में उनकी लोकलुभावन योजनाओं का बखान तो बहुत हुआ, लेकिन जनविरोधी भाव रखने वाले अधिकारी जमीनी स्तर पर इनका ईमानदार क्रियान्वयन नहीं कर पाए।जनसुनवाई कितनी अच्छी सोच के साथ अस्तित्व में आई, लेकिन अधिकारियों ने क्या हाल किया इस योजना का? योजनाओं को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज ने अधिकारियों पर विश्वास करके,अंजाने में जनता के साथ विश्वासघात किया है। प्रदेशभर की जनसुनवाइयों में से किसी एक जिले की जनसुनवाई में मुख्यमंत्री स्वयं अकस्मात पहुंचते और अपनी उपस्थिति में जनसुनवाई कराते तो कल्पना की जा सकती थी कि आज प्रदेशभर में जनसुनवाई का स्वरूप क्या होता? प्रदेशभर के जिला प्रशासनों में भय बना रहता कि ना जाने कब,कहां मुख्यमंत्री जनसुनवाई कराने पहुंच जाए? मुख्यमंत्री ही क्यों? उनकी सरकार के मंत्री अकस्मात जनसुनवाई में पहुंचते और अपनी उपस्थिति में जनसुनवाई कराते। यदि ऐसा हो जाता तो जनसुनवाई में जनता को सरकार की उपस्थिति में न्याय मिलने लगता। जनसुनवाई के साथ ऐसा नहीं हुआ, मुख्यमंत्री ने इस योजना को अधिकारियों के हवाले करके अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली और अधिकारियों ने इस अच्छी भली योजना को पलीता लगा दिया, औपचारिकता बनाकर पटक दिया। पहले तो मीडिया वाले भी बता दिया करते थे, जनसुनवाई में इतने नागरिकों की समस्या का समाधान हुआ,अब तो वह भी नागरिकों के सामने नहीं आता। जनसुनवाई चल भी रही है या नहीं?पता नहीं।इसी तरह मुख्यमंत्री हेल्पलाइन भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की छवि बनाने वाली योजना है, लेकिन मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर प्रशासन के लोगों के खिलाफ की गई शिकायत का निराकरण कम ही हो पाता है। ज्यादा ही जागरूकता दिखाई जाती है तो प्रशासन के छोटे कर्मचारियों के खिलाफ तो कार्रवाई हो जाती है, लेकिन अधिकारियों का बाल बांका नहीं कर पाती मुख्यमंत्री हेल्पलाइन।ये तो महज उदाहरण है ऐसी कईं योजनाएं हैं,जिनका अधिकारियों ने धरातल पर ईमानदार क्रियान्वयन नहीं किया है, सिर्फ प्रचार किया है, बखान किया है।

 

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