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*इसे डेमेज कंट्रोल कहा जाता है मिस्टर एसडीएम*      *किसान बताने वाला वीडियो,अपने अंदर उपजे अपराधबोध का प्रदर्शन है* 

कलयुग की कलम

इसे डेमेज कंट्रोल कहा जाता है मिस्टर एसडीएम*

किसान बताने वाला वीडियो,अपने अंदर उपजे अपराधबोध का प्रदर्शन है

 

पंडित प्रदीप मोदी

(साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार)

9009597101

 

आदिवासी बहुल धार जिले की कुक्षी तहसील अंतर्गत आने वाले ग्राम लोहारी मेंं कथित रूप से ग्राम पंचायत सचिव और उपसरपंच के षड़यंत्र के शिकार होकर प्रशासनिक अधिकारी एक गरीब किसान को बर्बाद करने का निमित्त बन गए, उसमें भी हास्यास्पद बात यह कि कुक्षी तहसील के विद्वान समझदार अधिकारी छोटे भाई को नोटिस जारी करते हैं और बड़े भाई की घर-गृहस्थी तबाह कर देते हैं।उस निरीह गरीब किसान के प्रति अधिकारियों के आक्रोश की पराकाष्ठा यह कि उसके परिवार को सामान तक निकालने का मौका नहीं दिया।जब सामान निकालने का ही मौका नहीं दिया तो उस गरीब किसान को अपना पक्ष रखने का, उसके हितों की सुरक्षा करने वाले दस्तावेज दिखाने का मौका कब देते? शायद दस्तावेज देख लेते तो अधिकारी किसान को बर्बाद करने के जघन्य पाप से बच जाते। जनभावना को बयां किया जाए तो लोहारी की घटना प्रदेश के सारे भाजपा शासन के लिए शर्म की बात है,उस प्रशासन के लिए शर्म की बात है,जो जनहित के लिए काम करने की बात करता है और जन को ही पीसकर ठहाके लगाने की मंशा रखता है। ऐसी कड़ाके की ठंड में उस निरीह परिवार का कैसे जीवनयापन होता होगा? सोचकर ही रूह कांप जाती है, लेकिन शासन-प्रशासन के नूमाइंदों की संवेदना नहीं जागती, आश्चर्य है। प्रशासन के अधिकारियों के हाथों किसान को बर्बाद कर देने का पाप तो हुआ है, चूंकि तहसील के सबसे बड़े अधिकारी एसडीएम है और स्वाभाविक भी है उनके ही माथे पर ठीकरे फूटना है,ठीकरे फूट भी रहे हैं। कहा जा रहा है एसडीएम के रहते प्रशासन से किसान के साथ अन्याय कैसे हो गया?उस समय तो अधिकारियों को जो करना था कर गए, लेकिन अब अधिकारियों की स्थिति यह बन रही है कि “कुछ नहीं सूझे और खड़े-खड़े धूजे” और इसका प्रमाण है सोशल मीडिया पर वायरल होता कुक्षी एसडीएम का ज्वार अथवा मक्का की फसल काटते हुए वीडियो। महाराष्ट्र में अपने गांव में एसडीएम कुक्षी किसान की भूमिका में नजर आ रहे हैं। यह वीडियो लोहारी मेंं किसान के साथ हुए अन्याय के बाद सोशल मीडिया पर देखने में आया है, इसीलिए यह वीडियो एसडीएम कुक्षी के अंदर उपजे अपराधबोध का प्रदर्शन करता हुआ नजर आता है,डेमेज कंट्रोल का असफल प्रयास नजर आता है। लोहारी की घटना के बाद ही एसडीएम को अपने आपको किसान बताने की आवश्यकता क्यों पड़ी? क्या कुक्षी क्षेत्र का कोई मीडिया कर्मी एसडीएम साहब के गांव महाराष्ट्र में उन्हें किसान के रूप में कवरेज करने गया था,या फिर एसडीएम साहब ने ही अपना वीडियो पत्रकार मित्रों को उपलब्ध करा दिया? एसडीएम साहब की छवि के डेमेज कंट्रोल में जुटे ये कौन लोग हैं, जिनके मन बर्बाद कर दिए गए किसान परिवार के प्रति नहीं पसीजते?आप माने या ना माने एसडीएम साहब आपके वीडियो को आपके अंदर उपजे अपराधबोध का प्रदर्शन बताया जा रहा है।

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