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इंदौर प्रेस क्लब की फर्जी पत्रकार मुहिम और मन में उठते सवाल…

कलयुग की कलम समाचार पत्र

इंदौर प्रेस क्लब की फर्जी पत्रकार मुहिम और मन में उठते सवाल…

 

पंडित प्रदीप मोदी

(साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार)

9009597101

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 इंदौर में कथित फर्जी पत्रकार देवेन्द्र मराठा को ब्लैकमेलिंग के आरोप में सम्माननीय नागरिकों की शिकायत पर पुलिस ने पकड़कर जेल में बंद कर दिया और सहाब बहादुरों ने उस कथित फर्जी पत्रकार पर रासुका भी लगा दी, ये रासुका,अधिकारियों की पत्रकारों के खिलाफ चिढ़, झुंझलाहट,क्रोध और खजवाहट का नतीजा है। ब्लैकमेलर पत्रकार के खिलाफ कार्रवाई कर प्रशासन ने अच्छा नहीं, बहुत अच्छा किया, लेकिन प्रेस क्लब का अचानक फर्जी पत्रकारों के खिलाफ मुहिम चलाकर बिना सोचे-समझे सामने आ जाना,जन मन में संदेह उत्पन्न कर गया। सामान्य बात है किसी ने पत्रकारिता के नाम पर, पत्रकार बनकर,ब्लैकमेलिंग की,प्रताड़ित या प्रताड़ितों ने पुलिस को शिकायत की और पुलिस ने कार्रवाई की, इसमें इंदौर प्रेस क्लब को फर्जी पत्रकारों के खिलाफ मुहिम चलाने की क्या आवश्यकता पड़ गई? मुहिम ही नहीं चलाई, बाकायदा ब्लैकमेलिंग की शिकायत करने के लिए प्रेस क्लब पदाधिकारियों के मोबाइल नंबर भी जारी कर दिए, एक पदाधिकारी को छोड़कर, क्या उस पदाधिकारी को रिजर्व में रखा है?क्यों साहब? ब्लैकमेल होने वाला व्यक्ति पुलिस को शिकायत करेगा, प्रेस क्लब के पदाधिकारियों को शिकायत क्यों करेगा?और ब्लैकमेलिंग की शिकायत सुनने वाले आप होते कौन है? लोकतांत्रिक व्यवस्था में संविधान ने यह जिम्मेदारी पुलिस को सौंप रखी है, और पुलिस सुनते हुए कार्रवाई भी करती हैं,बस पुलिस अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी के प्रति ईमानदार होने की आवश्यकता है, कर्तव्यनिष्ठ होने की आवश्यकता है। प्रेस क्लब का काम शिकायत सुनना नहीं है,अपितु उसका काम है जाकर देखें कि देवेन्द्र मराठा फर्जी पत्रकार है या नहीं?मराठा ब्लैकमेलर है, फर्जी कैसे हुआ? कईं अखबारी पन्नों पर खबर के साथ देवेन्द्र मराठा का नाम छपा है, क्या उन अखबारी पन्नों को भी फर्जी घोषित कर दोगे? कौन पत्रकार फर्जी है और कौन नहीं?इसका निर्धारण कैसे होगा और कौन करेगा? देवेन्द्र मराठा ब्लैकमेलर है,वह भी तब, जब माननीय न्यायालय में यह बात सिद्ध हो जाए, फर्जी पत्रकार कैसे?यह किसने निर्धारित कर लिया कि देवेन्द्र मराठा फर्जी पत्रकार है? ये वे सवाल है, जिन्हें प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने देवेन्द्र मराठा पर कार्रवाई करने वाले अधिकारियों के सामने रखना था, लेकिन प्रेस क्लब के जिम्मेदार पदाधिकारी तो फर्जी पत्रकारों के खिलाफ मुहिम चलाकर अधिकारियों के हाथ में तलवार की मूठ पकड़ाने की मूर्खता कर रहे हैं, ताकि अधिकारी उनके खिलाफ लिखने वाले, उनके कारनामें उजागर करने वाले पत्रकारों का कत्लेआम मचा सके, पत्रकारिता को समर्पित पत्रकारों को फर्जी पत्रकार घोषित कर समाज की नजरों में गिरा सके। इंदौर प्रेस क्लब के पदाधिकारियों,आपकी फर्जी पत्रकार मुहिम के मायने सब समझ रहे हैं, क्या यह सच है कि देवेन्द्र मराठा के साथ दो और पत्रकार थे? क्या उन्हें बचाने के लिए फर्जी पत्रकारों के खिलाफ मुहिम चलाई है? अकस्मात मुहिम चलाने वाले प्रेस क्लब पदाधिकारियों को बताना तो पड़ेगा, क्योंकि चारों ओर कहा जाने लगा है, सवालिया निगाहों से पूछा जाने लगा है कि इंदौर प्रेस क्लब ने फर्जी पत्रकारों के खिलाफ अचानक मुहिम क्यों चलाई? मुहिम चलाने वाले प्रेस क्लब पदाधिकारियों ने मुहिम चलाकर उड़ता तीर हाथ में लिया है। देवेन्द्र मराठा के साथियों को बचाने के चक्कर में प्रेस क्लब पदाधिकारी कहीं प्रेस क्लब की इज्जत तो दांव पर नहीं लगा रहे हैं….?

 

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