मध्यप्रदेश

👍कभी मध्यप्रदेश का सूचना विभाग पत्रकारों की कलम का गवाह था, अब ग्रस्त हैं विचारधारा की दीमक से . . . 

कलयुग की कलम समाचार पत्र

👍कभी मध्यप्रदेश का सूचना विभाग पत्रकारों की कलम का गवाह था, अब ग्रस्त हैं विचारधारा की दीमक से . . .

 (भोपाल से राजेन्द्र सिंह जादौन)

 मध्यप्रदेश का जनसम्पर्क विभाग जो कभी देश भर में अपनी एक पहचान था । आज इस विभाग में दीमक लग गई है। ये वही सूचना विभाग है जो पत्रकारों का सम्मान और मान रख कर सरकार को भी सचेत कर देता था। क्योंकि वो वक्त और पत्रकार कुछ अलग ही थे, अपने मान सम्मान औऱ खबरो से समझौता नही करते थे और नौकरियां तक छोड़ दिया करते थे।
आज अगर आप जनसम्पर्क विभाग की बात करें तो यहां सिर्फ बचा है तो तराजू, जो सिर्फ़ वह लिखेगा उसे चुस्की मिलेगी। यहां पत्रकारों के लिए और उनके संरक्षण व पत्रकारिता के उद्देश्य के लिए अब कुछ नहीं बचा। बचा है तो सिर्फ और सिर्फ विज्ञापन का कमीशन, चापलूसी और चाय की चुस्कियां। इस विभाग में अलग-अलग कैटेगिरी में पत्रकारों की सूचियां बनाई जाती हैं और किस-किस को कौन-कौन सी सूचना का आदान प्रदान किया जाना है या फिर किसे किस कार्यक्रम में बुलाना है या नहीं। अब जनसम्पर्क पिछले डेढ़ दशक से भी ज्यादा समय से इसी नीति पर एक विचारधारा से बंध कर काम कर रहा है। जो अधिकारी विचारधारा से सहमत नहीं होता या अपने कार्य के लिए ईमानदार होता है, उन्हें भी यहां से संभाग-जिला या लूप लाईन में डाल दिया जाता है। क्योंकि वो आज की पत्रकारिता के परिवेश से वाकिफ होता है। इस विभाग का सिस्टम अपडेट हो न हो, लेकिन पत्रकारों की अवहेलना और उनके मान-सम्मान को ठेस कैसे लगे इसमे अपडेट जरूर है।
इस विभाग की संरचना जिस उद्देश्य से की गई थी अब उन उद्देश्यों से ये विभाग अलग ही दिशा में चल रहा है। और पत्रकारिता व पत्रकारो की कलम को समझने वाले अधिकार लूप लाईन में दबे कुचले पड़े हैं। साथ ही जो पत्रकार कभी अपने मान-सम्मान के लिए नौकरियों को भी छोड़ दिया करते थे, वो आज जनसम्पर्क की सूची से दरकिनार खड़े हैं। क्योंकि मुख्यमंत्री स्वयं जनसम्पर्क मंत्री हैं और मंच से ये कहते हैं कि एक अकेला आदमी पूरे जनसम्पर्क का काम करता है। तो अब ऐसे में अधिकारी भी सिर्फ दफ्तर में चुस्कियां ही लेते नज़र आते हैं। इस जनसम्पर्क विभाग को विचारधारा की दीमक ने जकड़ रखा है। क्योंकि माननीय जनसम्पर्क मंत्री एक अकेले चने से भाड़ फुड़वाने में लगे हैं।

 

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