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हम सच से डरते हैं, झूठ से प्यार करते हैं ? कितने नादान है हम,ये क्या करते हैं ?

कलयुग की कलम

हम सच से डरते हैं, झूठ से प्यार करते हैं ?

  कितने नादान है हम,ये क्या करते हैं ?

 

पंडित प्रदीप मोदी

(साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार)

9009597101

यह मृत्यु लोक है और यहां का एक मात्र सत्य मृत्यु है,जब मृत्यु ही सत्य है तो मृत्यु से भय कैसा? मृत्यु से डरना कैसा?जो सच है, उससे तो हम डरते हैं, जबकि जीवन झूठ है, उससे बेपनाह प्यार करते हैं, बेहिसाब प्रेम करते हैं, ये नादानी है,जो हम करते हैं। जानते हो मृत्यु से डरकर जीने में हम पल-पल, क्षण-क्षण मरते हैं और सुंदर से जीवन को नर्क बना लेते हैं।हम सच से जितना प्रेम करेंगे,जीवन उतना सुंदर होगा, हमारी परेशानियों का मूल ही यही है कि हम सच से दूर भागते हैं और झूठ से प्रेम करते हैं। झूठ जीवन तक ही सीमित नहीं है,अपितु संसार में सर्वव्याप्त है, यहां मृत्यु एक मात्र सत्य है।सच के निकट रहना ही ईश्वर के निकट रहना है और दृष्टा भाव के साथ सच पर तटस्थ हो जाना ही ईश्वर का पता पा जाना है। हम समझ ही नहीं पाते कि संसार झूठ का ताना-बाना है और इसमें हम आकंठ डूबे हुए हैं। हमारी मूर्खता देखो इस झूठ के ताने-बाने में हम कदम-कदम पर सच को साक्षी बनाकर सारे झूठे कर्म करते हैं,हम समझ ही नहीं पाते कि सच ही ईश्वर है और सच के साथ रहना ही ईश्वर के साथ रहना है।कल की चिंता में हम अपने वर्तमान को तबाह कर लेते हैं,या फिर अतीत का रोना रोते हुए, वर्तमान को सिसक-सिसक कर रेंगने पर विवश कर लेते हैं। वर्तमान में जीना हम जानते ही नहीं।अरे भाई हम रात को बिस्तर पर सोए हैं, सुबह उठेंगे कि नहीं? इसकी ही गारंटी नहीं है तो ये सौ साल का इकठ्ठा करने के लिए हम क्यों पागल हुए जा रहे हैं?ना तो हमारे साथ कोई पैदा हुआ है और ना कोई मरने वाला है तो आओ विचार करे कि अपनी आत्मा मारकर अनैतिक रूप से हम धन किसके लिए इकठ्ठा कर रहे हैं?हम अपने परिवार के पालनहार नहीं है, सिर्फ निमित्त है, यदि हम परिवार के पालनहार होने का मुगालता पालते हैं तो यकीनन नींद देकर उजगरा मोल लेते हैं।हम व्यास पीठ पर बैठने वाले पीठाधीश्वर से पैसे देकर ज्ञान की बातें सुनते हैं, लेकिन झूठ के फेर में फंसे उन बातों पर अमल नहीं करते। यदि हम यथार्थ के धरातल पर आकर सच का दामन थाम ले तो जीवन से परेशानियों का लोप हो जाए, जीवन सुखमय हो जाए। झूठ के फेर में फंसे हम अपने दुश्मन आप बन रहे हैं,बस हम इतना याद रखें,यह मृत्यु लोक है और यहां का एक मात्र सत्य मृत्यु है तो हमारी हर समस्या का समाधान हो जाए, क्योंकि जीवन नश्वर है,श्रणभंगुर हैं, जबकि मृत्यु अनश्वर, अवश्यंभावी है।

 

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