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भौंरासा को भंवर में छोड़कर बागली में सीएम की सेवा…? देवास एसपी की घोर लापरवाही

कलयुग की कलम

भौंरासा को भंवर में छोड़कर बागली में सीएम की सेवा…?

        देवास एसपी की घोर लापरवाही

पंडित प्रदीप मोदी

(साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार)

9009597101

बताया जा रहा है आज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान चुनावी गतिविधियों के तहत बागली में पधारे थे और मुख्यालय सहित देवास जिले के कई हिस्सों में दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन चल समारोह निकल रहे थे। ऐसे समय में जिले के बागली में सीएम का चुनावी कार्यक्रम होना,लापरवाही का असंवेदनशील उदाहरण है। इसमें देवास जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन सहित सत्तारूढ़ पार्टी के तमाम नेता दोषी है। क्या मुख्यमंत्री का दौरा कार्यक्रम एक दिन आगे नहीं बढ़ाया जा सकता था? क्या पुलिस प्रशासन के यशमैन अधिकारी मुख्यमंत्री को जिले के हालात एवं परिस्थितियों से अवगत नहीं करा सकते थे? क्या मुख्यमंत्री से निवेदन नहीं कर सकते थे कि आज का दिन चुनावी कार्यक्रम के लिए उचित नहीं है? क्या मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान में इतनी समझ नहीं है कि त्योहार के दिन ऐसे कार्यक्रम रखना पुलिस के लिए परेशानी खड़ी करना है और जनता का जीवन में खतरे में डालना है? देवास जिले के तमाम नेता भी दोषी है, उन्होंंने मुख्यमंत्री को क्यों नहीं बताया कि आज का दिन चुनावी कार्यक्रम के लिए ठीक नहीं है। उल्लेखनीय है साम्प्रदायिक दृष्टि से जिले के कई हिस्से संवेदनशील है, अतः पुलिस मुख्यमंत्री की सेवा में तैनात रहेगी या समाज के सद्भाव को थामेगी? सत्ता और प्रशासन के सब लोगों ने इस पर विचार क्यों नहीं किया? देवास एसपी शिवदयाल सिंह कदम-कदम पर संदेश देते जा रहे हैं कि उनके लिए सिर्फ नेता महत्वपूर्ण है, देवास की आम जनता नहीं। देवास मुख्यालय से लगा कस्बा भौंरासा साम्प्रदायिक दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है और कुछ वर्ष पूर्व इन्हीं दिनों में यह कस्बा धूं-धूं कर जल उठा था,जब नवरात्रि एवं मोहर्रम साथ-साथ आए थे। योग्य अधिकारी की यही पहचान होती है कि वह अतीत की घटनाओं से सीख लेते हुए,वर्तमान और भविष्य की रूपरेखा तैयार करें।भौंरासा में पुलिस कप्तान ने ऐसा नहीं किया है।भौंरासा थाने का अधिकांशतः पुलिस बल बागली में सीएम की सुरक्षा सेवा में लगा दिया, जिसे हम घोर लापरवाही ही निरूपित करेंगे। बताया जा रहा है भौंरासा में तीन दर्जनों से अधिक दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन चल समारोह निकला और व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस बल के नाम पर एक एएसआई सहित दर्जन भर पुलिस जवान थे। ऐसे समय में भौंरासा का साम्प्रदायिक सौहार्द बिगड़ जाता, कुछ घटित हो जाता तो भौंरासा का क्या होता,भौंरासा के लोगों का क्या होता और इन सब के लिए जिम्मेदार किसे माना जाता?हम नागरिकों का तो बस इतना ही निवेदन है कि एसपी साहब आप नेताओं का पूरा ध्यान रखो, लेकिन थोड़ा बहुत आम जनता का भी ध्यान रखो।

 

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