मध्यप्रदेश

आम जन चर्चा में लोग कह देते हैं कि छोटे समाचार पत्र ब्लैक मेलिंग करते हैं ऐसे लोगों को मूर्ख नहीं कहा जाए तो क्या कहा जाए छोटे समाचार पत्र चाहे साप्ताहिक, पाक्षिक समाचार, या मासिक समाचार पत्र हो ग्रामों की चौपालों में होने वाली चर्चाओं और गांव में होने वाली समस्याओं को अपने पत्र के माध्यम से शासन तक पहुंचाते हैं और अपनी जेब से पैसे खर्च करते हैं और जो साप्ताहिक समाचार पत्र छोटे कस्बों या शहरों से प्रकाशित होते हैं

कलयुग की कलम

आम जन चर्चा में लोग कह देते हैं कि छोटे समाचार पत्र ब्लैक मेलिंग करते हैं ऐसे लोगों को मूर्ख नहीं कहा जाए तो क्या कहा जाए छोटे समाचार पत्र चाहे साप्ताहिक, पाक्षिक समाचार, या मासिक समाचार पत्र हो ग्रामों की चौपालों में होने वाली चर्चाओं और गांव में होने वाली समस्याओं को अपने पत्र के माध्यम से शासन तक पहुंचाते हैं और अपनी जेब से पैसे खर्च करते हैं और जो साप्ताहिक समाचार पत्र छोटे कस्बों या शहरों से प्रकाशित होते हैं वे वहां की जन समस्याओं को शासन के समक्ष लाकर उसका निदान चाहते हैं और शासन द्वारा गांव में जो योजना चलाई जाती है उस पर नजर रखते हैं ग्रामों में मजदूरों से काम कराने के बदले उन्हें उचित पैसे मिलते हैं या नहीं क्योंकि भ्रष्ट अधिकारियों पर अंकुश लगता है इसलिए ये अधिकारी भी छोटे समाचार पत्रों के संपादको और प्रतिनिधियों को पसंद नहीं करते परंतु यही अधिकारी जब अपने वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा प्रताड़ित किए जाते हैं तो इन्हीं साप्ताहिक समाचार पत्रों में अपने विभाग का काला पीला करनामा छपवाते हैं वर्तमान में सतना जिले में कोई एक व्यक्ति मोबाइल के व्हाट्सएप के माध्यम से सतना जिले के अंदर के कस्बों और ग्रामों के समाचारों से जनता को अवगत करा रहें हैं उनका यह प्रयास प्रशंसनीय मेरा ऐसा विश्वास है कि छोटे समाचार पत्र के संपादक और प्रकाशक अपनी जेब से पैसे खर्च करते हैं जबकि अपने आप को बड़ा समाचार पत्र कहलाने वाले विज्ञापन दाताओं के नियंत्रण से चलते हैं इसका एक प्रमाण सबके सामने आ गया सतना के डाली बाबा मंदिर की जमीन जो शासन के अधीन है उसे भू माफिया लोगों ने सतना के राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से हड़पने के लिए उसकी नाप सीमांकन के जरिए कराने का विज्ञापन सतना से प्रकाशित एक दैनिक समाचार पत्र में कराया यह समाचार पत्र अपने आप को देश का सबसे बड़ा अखबार कहता है जबकि सतना से प्रकाशित होने वाले अन्य समाचार पत्रों ने मंदिर की भूमि और राजस्व से जुड़े भ्रष्टाचारियों के विषय में विस्तृत समाचारों का प्रकाशन किया ताकि सतना की जनता के साथ प्रदेश के शासकीय कार्यालय तक इसकी गूंज जाय लेकिन इस मंदिर की भूमि के विषय में एक लाइन भी तथाकथित बड़े समाचार पत्र ने नहीं लिखा क्या यह विज्ञापन के पैसे का दबाव नहीं है तो ब्लैकमेलर कौन हुआ छोटे समाचार पत्र या यह बड़ा समाचार पत्र

 

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