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बिजली संकट नहीं रुका तो शिवराजी सरकार का तड़ीपार होना तय

कलयुग की कलम

बिजली संकट नहीं रुका तो शिवराजी सरकार का तड़ीपार होना तय

प्रमुख सचिव ऊर्जा उतरे सड़क पर – थूक से प्यास बुझाने

जिस बिजली संकट ने कांग्रेसी दिग्विजयसिंह सरकार को प्रदेश से तड़ीपार करते हुए भारतीय जनता पार्टी को सत्तासीन कराया था उसी बिजली संकट से 18 साल बाद एक बार फिर भाजपाई शिवराज सरकार की सांसें उखाड़ने लगी है ।

भले ही विधानसभा चुनाव को 2 साल के आसपास का समय बाकी हो मगर प्रदेश व्यापी बिजली संकट से आम आदमी 2003 से पहले का फ्लैशबैक देखने लगा है । शिवराज सरकार के लिए विपक्ष से तो कोई चुनौती दिखाई नहीं दे रही है । कारण जब प्रदेश में प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस ही मुरदे से गई बीती है तो बाकी पार्टियां तो शैशवावस्था में ही हैं ।

शिवराज सरकार को बिजली संकट के लिए चुनौतियां अपनों से ही मिल रही है । कहीं विधायक सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन कर रहे हैं तो कहीं सांसद प्रतिनिधि बिजली विभाग के कार्यालय के सामने धरना देने के लिए लंगोट घुमा रहे हैं । जिसने शिवराज सरकार के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी है ।

हाल ही में प्रमुख सचिव ऊर्जा की कुर्सी पर बैठाये गए संजय दुबे बिजली संकट की गंभीरता को समझते हुए शिवराज सरकार के संकटमोचन की भूमिका में फील्ड पर उतर चुके हैं । उमसभरी गर्मी में वातानुकूलित कमरे का सुख छोड़कर शहर दर शहर के गली कूचों की खाख छानते हुए बिजली चोरी पकड़ रहे हैं ।

जहां तक बिजली चोरी का सवाल है तो जमीनी हकीकत यही है कि गरीब से ज्यादा अमीर, प्रभावशाली, सफेदपोश, बाहुबली, अफसर आदि माननीय, सम्माननीय बिजली की चोरी करते हैं । किसी बिजली अधिकारी ने, विजलेंस टीम ने कभी भी किसी मंत्री सन्तरी, सांसद, विधायक, पार्टी अध्यक्ष के घर, दुकान, प्रतिष्ठान पर, किसी कलेक्टर, एसपी के घर पर यहां तक कि अपने ही विभाग के किसी बड़े अधिकारी के घर की चेकिंग करने की हिम्मत नहीं जुटाई । जब भी चेकिंग की जाती है गरीब गुरबों आम आदमी के झोपड़ पट्टी, घर की ।

साहब का बिजली बिल सौ रुपैया झोपडी में रहने वाले का बिल हजार रुपैया । गलती से किसी प्रभावशाली का बिल ज्यादा आ गया तो चीफ इंजीनियर तक उसके बिल को कम करने के लिए सारे नियम कानून ताक पर रख देता है वहीं गरीब, आम आदमी बिजली दफ्तर के चक्कर पर चक्कर लगाता रहता है । मजाल है कोई उसकी सुन ले ।

लाटसाहब भी बिजली चोरी पकड़ने निकले हैं तो उन्हीं बस्तियों में जहां गरीब गुरबे आम आदमी रहता है । यहां भी वही गरीब की लुगाई सारे जहान की भौजाई की तर्ज पर छापामारी । है न कमाल की बात थूक से प्यास बुझाने चले हैं पीएस ।

सरकार द्वारा सोची समझी रणनीति के तहत पैदा किये गए कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे बिजली विभाग को निजी हाथों में सौंप कर बिजली संकट को दूर करने की घिनौनी साजिश रची जा रही है ।

यह सही है कि सोने की चिड़िया रहे ऊर्जा विभाग के सत्यानाश की नींव कांग्रेस सरकार ने रखी थी मगर भारतीय जनता पार्टी ने फीता काटने की लालसा में कांग्रेस सरकार द्वारा डाली गई नींव पर ताबड़तोड़ काम कर सत्यानाशी बहुमंजिला ईमारत खड़ी कर दी है ।

ऊर्जा क्षेत्र के निजीकरण की खिलाफत करते हुए कुछ समय पहले ही देशव्यापी आंदोलन प्रदर्शन आदि किए गए थे । राज्य सरकारों ने अपनी फितरत के मुताबिक खिलाफत कर रहे संगठनों को आश्वासनों की चुसनी चुसा कर आंदोलन की हवा ही निकाल दी ।

बिजली के निजीकरण की खिलाफत कर रहे संगठनों के सामने घुटनाटेक होकर सरकार के जो मंत्री – मिनिस्टर बिजली के निजीकरण का कोई प्रस्ताव नहीं है, का राग अलाप रहे थे वही अब अपनी असली औकात में आकर खुलेआम कहने लगे हैं कि धरना, प्रदर्शन, आंदोलन से बिजली क्षेत्र का निजीकरण रुकने वाला नहीं है । वैसे भी सरकार किसी भी पार्टी की हो थूककर चाटना उसकी जन्मजात आदत है ।

इतना तो तय है कि यदि शिवराज सरकार जल्द ही बिजली संकट से निजात नहीं पाती है तो उसकी हालत को दिग्विजयसिंह सरकार जैसी ही होने से कोई नहीं रोक पायेगा । भारतीय जनता पार्टी का भी तड़ीपार होना तय है ।

अश्वनी बड़गैंया, अधिवक्ता

स्वतंत्र पत्रकार

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